जर्मनी में आर्थिक दबाव के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण गहराया

जर्मनी में आर्थिक तंगी और बढ़ती सामाजिक असंतुष्टि के बीच वाम और दक्षिणपंथी दलों की सदस्यता में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी में आर्थिक तंगी और बढ़ती सामाजिक असंतुष्टि के बीच वाम और दक्षिणपंथी दलों की सदस्यता में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में परिवार बचत करने में असमर्थ हैं.जर्मनी की घरेलू आर्थिक चुनौतियों और राजनीतिक माहौल में बढ़ती असंतुष्टि के बीच देश में वाम और दक्षिणपंथी दलों की सदस्य संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिल रही है. एक ओर जहां चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की अगुआई वाली सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार की लोकप्रियता घट रही है, वहीं दूसरी ओर वामपंथी लेफ्ट पार्टी (डी लिंके), धुर-दक्षिणपंथी ऑल्टरनेटिव फर जर्मनी (एएफडी) और ग्रीन पार्टी में सदस्यता में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है.

लेफ्ट पार्टी ने वर्ष 2025 के दौरान अपनी सदस्यता को दोगुने से भी अधिक बढ़ाकर साल के अंत तक 1,23,000 से ऊपर पहुंचा दिया. यह वृद्धि देश के राजनीतिक परिदृश्य में बढ़ती ध्रुवीकरण की दिशा में एक संकेत मानी जा रही है.

एएफडी को बड़ी बढ़त

इसी क्रम में, एएफडी ने भी बड़ा विस्तार दर्ज किया. पार्टी के एक नेता कार्स्टेन ह्यूटर के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को पार्टी के सदस्यों की संख्या 73,108 थी. हालांकि पिछले वर्ष के लिए सटीक तुलना उपलब्ध नहीं कराई गई, लेकिन पार्टी का कहना है कि सदस्य संख्या लगभग 51,000 रही थी, जो दर्शाता है कि वर्ष 2025 के दौरान इसमें 43 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई.

ग्रीन पार्टी में भी लगातार बढ़ता रुझान जारी है. दशक भर से वृद्धि देख रही यह पार्टी वर्ष 2025 के अंत में लगभग 1,84,000 सदस्यों तक पहुंच गई. यह 2024 के मुकाबले 18.3 प्रतिशत अधिक है.

इसके विपरीत, सत्तारूढ़ दलों में वृद्धि धीमी रही या मामूली गिरावट देखी गई. मैर्त्स की क्रिश्चियन डेमोक्रैटिक यूनियन (सीडीयू) गठबंधन की एकमात्र ऐसी पार्टी रही जिसने वृद्धि दर्ज की. एक प्रवक्ता के अनुसार, 2025 में सीडीयू की सदस्यता में 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह कुल 1,32,000 पर पहुंच गई. गठबंधन की अन्य पार्टियों, क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीएसयू) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी), में न्यूनतम बढ़ोतरी या गिरावट ही दर्ज की गई.

आर्थिक चिंताएं बढ़ीं

यह राजनीतिक उतार चढ़ाव ऐसे समय में सामने आ रहा है जब देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति चिंताजनक दिशा में बढ़ रही है. जर्मनी में घरेलू वित्तीय संपत्ति के नए रिकॉर्ड के बावजूद बड़ी संख्या में परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और बचत करने में सक्षम नहीं हैं.

आईएनजी बैंक के लिए इप्सोस द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 27 प्रतिशत निजी परिवारों ने कहा कि उनके पास कोई बचत नहीं है. यह आंकड़ा एक वर्ष पहले 23.5 प्रतिशत था. साथ ही, बचत करने वालों का अनुपात 2024 के 70.7 प्रतिशत से घटकर 63.7 प्रतिशत पर आ गया.

जिन परिवारों के पास बचत नहीं है, उनमें से लगभग आधे यानी 46.7 प्रतिशत ने कहा कि उनकी आय इतनी नहीं है कि वे बचत कर सकें. लगभग 22 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया कि बढ़ते खर्च ने उनकी बचत को खत्म कर दिया है. लगभग 17.9 प्रतिशत लोग रात में आर्थिक चिंताओं के कारण सो नहीं पाते. 36.5 प्रतिशत लोगों ने यह स्वीकार किया कि अपनी वित्तीय स्थिति के चलते उन्हें लगता है कि वे अपनी इच्छाएं कभी पूरी नहीं कर पाएंगे.

असमानता भी बढ़ी

बुंडेसबैंक के अनुसार, 2025 की तीसरी तिमाही तक जर्मन निजी परिवारों की वित्तीय संपत्ति 9.389 ट्रिलियन यूरो तक पहुंच गई थी. डीजेड बैंक का अनुमान है कि साल के अंत तक यह आंकड़ा 10 ट्रिलियन यूरो से थोड़ा ऊपर रहा और 2026 में 10.5 ट्रिलियन तक बढ़ सकता है. हालांकि यह संपत्ति बेहद असमान रूप से वितरित है. बुंडेसबैंक के अनुसार, कुल संपत्ति का लगभग आधा हिस्सा शीर्ष 10 प्रतिशत परिवारों के पास है, जबकि लगभग दो करोड़ परिवारों के पास केवल 8 प्रतिशत संपत्ति ही है.

इसी आर्थिक दबाव और सामाजिक असंतोष ने जनमानस में असंतुष्टि को बढ़ाया है, जिसका असर राजनीति पर साफ दिख रहा है. आईएनएसए द्वारा बिल्ड अखबार के लिए दिसंबर में किए गए एक सर्वे में 63 प्रतिशत लोगों ने सरकार के प्रति असंतोष जताया और 62 प्रतिशत ने चांसलर मैर्त्स के कामकाज पर नाराजगी जाहिर की.

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