Mobile Ban in South Korea School: दक्षिण कोरिया ने एक बड़ा कदम उठाते हुए स्कूलों में मोबाइल फोन और डिजिटल गैजेट्स (Digital Gadgets) के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित कर दिया है. यह कानून मार्च 2026 से लागू होगा. दुनिया के सबसे ज्यादा कनेक्टेड देशों में गिने जाने वाले दक्षिण कोरिया में लगभग 98% लोग स्मार्टफोन (Smartphone Ban) का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में बच्चों पर सोशल मीडिया का बढ़ता दबाव अब सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है. इस बिल को विपक्षी सांसदों का भी समर्थन मिला है.
विपक्ष के सांसद चो जंग-हुन (MP Cho Jung-hun) ने संसद में कहा, "आजकल बच्चे रात के 2-3 बजे तक इंस्टाग्राम पर एक्टिव रहते हैं, उनकी आंखें सुबह तक लाल रहती हैं. यह अब एक गंभीर समस्या बन रही है."
बच्चों पर मोबाइल का प्रभाव
मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों की नींद, ध्यान और व्यवहार को प्रभावित करता है. इसके कारण आंखों में जलन, सिरदर्द और शरीर की गलत मुद्रा जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. लगातार स्क्रीन देखने से मानसिक तनाव और चिंता भी बढ़ती है, क्योंकि बच्चे हमेशा कुछ छूट जाने के डर यानी "FOMO" से जूझते रहते हैं. कई बार वे आक्रामक या विद्रोही स्वभाव भी दिखाने लगते हैं, खासकर जब उन्हें फोन से दूर रखा जाता है.
पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव
स्कूलों में फोन का उपयोग बच्चों के सीखने की क्षमता को भी प्रभावित करता है. फोन और AI उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता उनकी आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान क्षमता को कमजोर करती है. साथ ही, कक्षा में ध्यान भटकने और नकल करने की संभावना भी बढ़ जाती है.
प्रतिबंध से क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में यह प्रतिबंध पूरे दिन इंटरनेट पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने का एक तरीका है, जो सिर्फ मनोरंजन के लिए है. इस दौरान बच्चों को खेलकूद, शौक या सामुदायिक कार्यों में व्यस्त रखा जा सकता है, ताकि वे सामाजिक रूप से भी सक्रिय रहें.












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