फ्रांस सितंबर में फिलिस्तीन को एक देश के रूप में देगा मान्यता, राष्ट्रपति मैक्रों के ऐलान से US नाराज

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ऐलान किया है कि उनका देश सितंबर में फलस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देगा. ऐसा करने वाला फ्रांस पहला G7 देश होगा, जिसका मकसद गाज़ा में शांति लाना है. इस फैसले का फलस्तीन ने स्वागत किया है, जबकि इज़रायल और अमेरिका ने इसका कड़ा विरोध किया है.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि फ्रांस इस साल सितंबर में फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता देगा. अगर ऐसा होता है, तो फ्रांस G7 देशों के समूह में ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा.

मैक्रों ने क्यों लिया यह फैसला?

राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "आज सबसे बड़ी ज़रूरत गाज़ा में युद्ध को खत्म करने की है और वहां के आम नागरिकों को बचाने की है. शांति संभव है. हमें तुरंत युद्धविराम, सभी बंधकों की रिहाई और गाज़ा के लोगों के लिए बड़े पैमाने पर मानवीय मदद की ज़रूरत है."

उन्होंने यह भी कहा कि फिलिस्तीन को एक देश बनाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हमास के पास हथियार न हों और गाज़ा को फिर से सुरक्षित बनाया जाए.

इस फैसले पर दुनिया की क्या प्रतिक्रिया है?

इस फैसले पर दुनिया भर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

अभी क्या स्थिति है?

G7 दुनिया के सात बड़े औद्योगिक देशों का समूह है, जिसमें फ्रांस के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, कनाडा और जापान शामिल हैं. अभी तक इनमें से किसी ने भी फिलिस्तीन को देश के तौर पर मान्यता नहीं दी है.

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र (UN) के 193 सदस्य देशों में से 140 से ज़्यादा देश फिलिस्तीन को पहले ही एक राज्य के रूप में मान्यता दे चुके हैं.

यह पूरा मामला 7 अक्टूबर, 2023 को इज़रायल पर हुए हमास के हमले के बाद और ज़्यादा गंभीर हो गया. उस हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे. इसके जवाब में इज़रायल ने गाज़ा में सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें अब तक 59,000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. गाज़ा में हालात बहुत खराब हैं और भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है.

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