‘एआई मंत्री’ से अपनी पहचान वापस लेने की लड़ाई लड़ती एक महिला
अल्बानिया के पीएम ने पिछले साल पहली एआई मंत्री 'डियेला' पेश की, लेकिन अभिनेत्री अनिला बिशा का आरोप है कि उनका चेहरा और आवाज बिना उनकी अनुमति के इस्तेमाल हुए.
अल्बानिया के पीएम ने पिछले साल पहली एआई मंत्री 'डियेला' पेश की, लेकिन अभिनेत्री अनिला बिशा का आरोप है कि उनका चेहरा और आवाज बिना उनकी अनुमति के इस्तेमाल हुए. अब वह इस मामले को लेकर अदालत पहुंची हैं.11 सितंबर 2025 को अल्बानियाई अभिनेत्री अनिला बिशा अपने परिवार के साथ घर पर बैठकर प्रधानमंत्री एडी रामा द्वारा नए मंत्रिमंडल की लाइव प्रस्तुति देख रही थीं. लेकिन अगले ही पल जो हुआ, उसने उन्हें हैरान कर दिया. उन्होंने खुद को मंत्री के रूप में देखा, लेकिन एक इंसान के रूप में नहीं, बल्कि एक "अवतार" के रूप में.
डियेला नाम की वर्चुअल मंत्री, जिसे अल्बानिया के प्रधानमंत्री एडी रामा ने दुनिया की पहली वर्चुअल मंत्री 'डियेला' को पेश किया, बिशा के ही "चेहरे और आवाज" के साथ सामने आई. सरकार के लिए यह टेक इनोवेशन का प्रदर्शन था, लेकिन लगभग 40 साल से मंच और स्क्रीन से जुड़ी बिशा के लिए इसका मतलब कुछ और था. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, "मैंने पहले तो परिवार के साथ हंसकर टाल दिया, लेकिन मुझे अंदाजा नहीं था कि इसके आगे क्या होने वाला है.”
एक्टर अनिला बिशा का कहना है कि उस वर्चुअल अवतार को बनाने के लिए उन्होंने अपने चेहरे और आवाज के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी थी. डिजिटल प्रोग्रेस के प्रतीक के रूप में पेश की गई यह छवि जल्द ही एक जटिल विवाद में बदल गई. वर्चुअल मंत्री की चर्चा ने यह दिखाया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं और इन्हीं सवालों ने अब पूरे मामले को अदालत तक पहुंचा दिया है.
वर्चुअल असिस्टेंट से मंत्री तक का सफर
मंत्री बनने से पहले 'डियेला' एक आम डिजिटल असिस्टेंट थी. वह ई-अल्बानिया, यानी सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर एक ऐसे अवतार के रूप में दिखाई देती थी जो नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं के बारे में मार्गदर्शन देती थी. बिशा की कोर्ट फाइलिंग के अनुसार, उन्होंने दिसंबर 2024 में एक साल की अवधि के लिए सिर्फ इसी उद्देश्य यानी ई-अल्बानिया पर डिजिटल असिस्टेंट के लिए अपना चेहरा और आवाज देने का कॉन्ट्रैक्ट किया था.
लेकिन कैबिनेट प्रेजेंटेशन वाले दिन 'डियेला' को "एआई मंत्री" के रूप में पेश किया गया, उसी आवाज और चेहरे के साथ, जो अनिला बिशा की पहचान से मेल खाता था. बिशा का कहना है कि उन्हें इस बदलाव की जानकारी नहीं दी गई थी. उनके वकील अरानित रोशी के मुताबिक कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें बेहद स्पष्ट थीं. उनका कहना है कि "कॉन्ट्रैक्ट का उद्देश्य सीमित था. बिशा की छवि और आवाज किसी और प्रोडक्ट के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती थी.”
सरकार इन आरोपों से इनकार करती है. सरकारी बयान में कहा गया, "हमारी नजर में यह दावा निराधार है.” मामले पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है. लेकिन मामला केवल कॉपीराइट तक ही सीमित नहीं है.
मामला कॉपीराइट का नहीं, व्यक्तिगत डाटा संरक्षण का
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यह मुद्दा कॉपीराइट का नहीं बल्कि 'पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन' का है. यूरोपीय संघ के डाटा संरक्षण मानकों के अनुरूप चलने वाले अल्बानियाई कानून के तहत किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज उसका 'व्यक्तिगत डाटा' माने जाते हैं. कानून विशेषज्ञ एल्टन पेप्पो बताते हैं कि "अगर कॉन्ट्रैक्ट की अवधि या उद्देश्य से बाहर जाकर इनका इस्तेमाल किया जाता है, तो यह उल्लंघन है.”
बिशा ने अदालत से अनुरोध किया है कि अंतिम निर्णय आने तक उनके चेहरे और आवाज का इस्तेमाल रोका जाए. अपनी याचिका में उन्होंने काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स, जनसंचार की राष्ट्रीय एजेंसी (अक्षी), अवतार तैयार करने वाली निजी कंपनी और प्रधानमंत्री एडी रामा को प्रतिवादी बनाया है. उन्होंने 10 लाख यूरो की नैतिक क्षतिपूर्ति भी मांग भी की है. इस बीच, बिशा कहती हैं कि महीनों से लोग उन्हें सार्वजनिक जगहों पर "मंत्री डियेला” कहकर संबोधित कर रहे हैं और कैसे एक डिजिटल इमेज उनके एक वास्तविक व्यक्ति होने पर हावी होने लगी है.
पहचान के दोहराव का मामला
मीडिया विशेषज्ञ मार्क मार्कू ऐसे मामलों को "पहचान के दोहराव” की श्रेणी में रखते हैं. उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, "आप अपनी छवि बेचते हैं, अपनी पहचान नहीं. आपकी मान्यताएं, राजनीतिक विचार या मूल्य किसी को नहीं मिल जाते.”
फर्क यह भी है कि डिजिटल असिस्टेंट तकनीकी सवालों का जवाब देता है, लेकिन मंत्री राज्य की ओर से बोलता है. 'डियेला' संसद में बड़े स्क्रीन पर दिखाई दी और राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल हुई.
स्क्रिप्ट चाहे कोई और लिखे, चेहरा तो वही है. बिशा कहती हैं कि कई बार उन्हें डर लगा कि उनका डिजिटल संस्करण क्या बोलेगा. उन्होंने बताया, "पार्लियामेंट वाले मामले में तो मैं सच में चिंतित थी.”
फरवरी 2026 में 'डियेला' को वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट, दुबई में 'ग्लोबल फ्यूचर फिट सील' से सम्मानित किया गया. 100 से अधिक देशों से आई 1,500 से ज्यादा प्रविष्टियों में से इसे विजेता चुना गया. तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार अब भी 'डियेला' एक चैटबॉट ही है. आईटी विशेषज्ञ बेसमिर सेमानाई का कहना है कि ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं कि 'डियेला' किसी ऑटोनॉमस एआई प्रणाली में बदली हो.
'डियेला' के अलावा भी कई सरकारी कामों की कानूनी जांच
प्रधानमंत्री एडी रामा ने 'डियेला' को एआई मंत्री के रूप में पेश करते हुए कहा था कि अब पब्लिक टेंडर "100 फीसदी भ्रष्टाचार-मुक्त” होंगे. लेकिन 'डियेला' कोई स्वतंत्र प्रोजेक्ट नहीं बल्कि अल्बानिया की डिजिटल गवर्नेंस प्रणाली का हिस्सा है, जिसे 'अक्षी' संचालित करता है.
दिसंबर 2025 में भ्रष्टाचार और शक्ति के दुरुपयोग के आरोपों पर 'अक्षी' के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसे एहतियाती कदम उठाए गए. माना जाता है कि जांच डिजिटल सेवाओं और सरकारी परियोजनाओं के लिए बोली लगाने से जुड़ी अनियमितताओं पर केंद्रित है. हालांकि यह जांच बिशा के मुकदमे से कानूनी रूप से अलग है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इससे 'डियेला' जैसे प्रोजेक्ट्स की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, खासकर जब यही सिस्टम भ्रष्टाचार कम करने का दावा करता है.