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Year Ender 2022: चीन और पाकिस्तान के लिए टेंशन बनी भारत की स्वदेशी मिसाइलें, हासिल किया नया मुकाम

भारत ने वर्ष 2022 में रक्षा आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ाते हुए रक्षा क्षेत्र में नया मुकाम हासिल किया है. भारत ने एक से एक स्वदेशी मिसाइलों का परीक्षण करके आसमान में अपनी ताकत दिखाई है. इसके साथ ही वर्ष 2022 की बात की जाए तो डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं

Year Ender 2022: चीन और पाकिस्तान के लिए टेंशन बनी भारत की स्वदेशी मिसाइलें, हासिल किया नया मुकाम
मिसाइल -प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credits WC)

Year Ender 2022: भारत ने वर्ष 2022 में रक्षा आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ाते हुए रक्षा क्षेत्र में नया मुकाम हासिल किया है. भारत ने एक से एक स्वदेशी मिसाइलों का परीक्षण करके आसमान में अपनी ताकत दिखाई है. इसके साथ ही वर्ष 2022 की बात की जाए तो डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. एक ओर जहां आधुनिक मिसाइल प्रणालियों के जरिए भारत ने एयरोस्पेस में बढ़ती ताकत का एहसास दुनिया को कराया है, वहीं 'मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड' विजन के अनुरूप स्वदेशी हथियार प्रणालियों के सफल परीक्षणों से भारत ने रक्षा क्षेत्र में नया मुकाम हासिल किया है.वर्ष 2022 में एयरोस्पेस सेक्टर और मिसाइल रक्षा प्रणाली में भारत द्वारा किए गए सफल प्रयास में इन स्वदेशी मिसाइलों का अहम योगदान रहा.

मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल: डीआरडीओ ने जनवरी के महीने में मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल के फाइनल डिलीवरेबल कॉन्फिगरेशन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। स्वदेशी रूप से विकसित एंटी-टैंक मिसाइल कम वजन वाली मिसाइल है। इसे थर्मल इंडिकेशन की मदद से एकीकृत एक मैन पोर्टेबल लॉन्चर से लॉन्च किया जाता है. परीक्षण के समय मिसाइल ने निर्धारित लक्ष्य पर निशाना साधा और उसे नष्ट कर दिया. यह भी पढ़े: Agni-5 Nuclear-Capable Ballistic Missile: रात में भी कर सकेगी दुश्मन को नेस्तोनाबूद, ट्रायल हुआ कामयाब, 5000 km तक हमले की क्षमता

मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल: इस मिसाइल प्रणाली ने एक बार फिर दो मिसाइलों के रूप में अपनी प्रभावशीलता साबित की। उड़ान परीक्षणों के दौरान एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर में उच्च गति वाले हवाई लक्ष्यों के खिलाफ सीधी हिट हासिल की. मार्च में ओडिशा के तट पर समुद्री स्किमिंग और उच्च ऊंचाई की कार्यक्षमता को कवर करने वाले लक्ष्यों के खिलाफ हथियार प्रणाली की सटीकता और विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए लॉन्च किए गए.

हेलिना मिसाइल: स्वदेशी रूप से विकसित हेलीकॉप्टर से अप्रैल में एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल 'हेलीना' लॉन्च की गई। इस मिसाइल का विभिन्न उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दो बार सफलतापूर्वक उपयोगकर्ता उड़ान परीक्षण किया गया.  यह उड़ान परीक्षण डीआरडीओ, भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना ने संयुक्त रूप से आयोजित किए थे। उड़ान परीक्षण एक उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर से किए गए थे और मिसाइल को नकली टैंक लक्ष्य को भेदते हुए सफलतापूर्वक दागा गया था.

ब्रह्मोस एक्सटेंडेड रेंज एडिशन: मई में भारत ने सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस एयर लॉन्च मिसाइल के एक्सटेंडेड रेंज एडिशन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। योजना के अनुसार विमान से प्रक्षेपण किए गए मिसाइल ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य पर सीधा प्रहार किया. पृथ्वी-II कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी-II का सफल प्रक्षेपण जून में एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर, ओडिशा से किया गया. यह मिसाइल प्रणाली बहुत उच्च स्तर की सटीकता के साथ लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है.

नेवल एंटी-शिप मिसाइल: डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने मई में ओडिशा के तट पर चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से नौसेना के हेलीकॉप्टर से लॉन्च की गई स्वदेशी रूप से विकसित नेवल एंटी-शिप मिसाइल का पहला उड़ान-परीक्षण किया. मिसाइल ने जरूरी समुद्री स्किमिंग प्रक्षेपवक्र का पालन किया और सही नियंत्रण और मिशन एल्गोरिदम को मान्य करते हुए उच्च स्तर की सटीकता के साथ लक्ष्य को मार गिराया.

लेजर-गाइडेड एंटी-टैंक मिसाइल: स्वदेशी रूप से विकसित लेजर-गाइडेड एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का जून में आर्मर्ड कॉर्प्स सेंटर एंड स्कूल, अहमदनगर के सहयोग से केके रेंज में डीआरडीओ और भारतीय सेना ने मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन से सफलतापूर्वक परीक्षण किया। परीक्षण में एटीजीएम ने सटीकता के साथ लक्ष्य को न्यूनतम दूरी पर सफलतापूर्वक पराजित किया। पूरी तरह से स्वदेशी ATGM विस्फोटक रिएक्टिव आर्मर (ERA) संरक्षित बख्तरबंद वाहनों के लिए भारी मात्र में एंटी-टैंक विस्फोटक वारहेड का उपयोग करता है,

ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटरः ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर की पहली उड़ान जुलाई में कर्नाटक के चित्रदुर्ग स्थित एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज से सफलतापूर्वक भरी गई। पूरी तरह से ऑटोनॉमस मोड में चलते हुए इस विमान ने एक बेहतरीन उड़ान का प्रदर्शन किया, जिसमें वे पॉइंट नेविगेशन, टेक-ऑफ और एक सहज टचडाउन शामिल है.

वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल: वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (VL-SRSAM) का डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने 23 अगस्त 2022 को उड़ीसा, चांदीपुर में भारतीय नौसेना के जहाज से सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इससे पहले भी यह परीक्षण भारतीय नौसैनिक पोत से 24 जून, 2022 को किया गया था. सी-स्किमिंग लक्ष्यों सहित निकट दूरी पर विभिन्न हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए यह प्रणाली भारतीय नौसेना को और भी अधिक मजबूती प्रदान करेगी.

क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल: भारतीय सेना और DRDO ने सितंबर में हाई-स्पीड एयरबोर्न टारगेट के खिलाफ छह उड़ान परीक्षण किए। यह परीक्षण विभिन्न प्रकार की मिसाइलों सहित अलग-अलग परिदृश्यों में हथियार प्रणाली की क्षमताओं का आकलन करने के लिए और खतरे का अनुकरण किया गया था.

सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल: आईएनएस अरिहंत ने अक्टूबर में पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का प्रभावी परीक्षण किया। मिसाइल का आवश्यक रेंज में परीक्षण किया गया और बंगाल की खाड़ी के भीतर लक्ष्य स्थान पर बड़ी सटीकता के साथ निशाना साधा गया। हथियार उपकरण के सभी परिचालन और तकनीकी मापदंडों का सत्यापन किया गया.

अग्नि-3: भारत ने इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-3 का सफल प्रशिक्षण ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया था। यह प्रशिक्षण नवंबर के महीने में पूरी की गई। यह प्रशिक्षण सामरिक बल कमांड के तत्वावधान में किए गए रेगुलर लॉन्च का हिस्सा था. एक पूर्व निर्धारित सीमा के लिए इस उड़ान परीक्षण को लॉन्च किया गया था और इसने सिस्टम के सभी परिचालन मापदंडों का सत्यापन किया गया। इससे पहले अग्नि-4 का सफल प्रशिक्षण प्रक्षेपण जून में किया गया था। इसने सभी परिचालन मापदंडों के साथ-साथ सिस्टम की जरूरी अहर्ताओं को भी पूरा किया.

बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर: बड़े मारक क्षमता वाले चरण- II बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर एडी-1 मिसाइल का सफल प्रथम उड़ान परीक्षण डीआरडीओ द्वारा नवंबर में ओडिशा के तट से दूर अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। यह उड़ान-परीक्षण अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर रखे गए सभी हथियार प्रणाली की एक साथ भागीदारी से किया गया था। एडी-1 एक लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल है, जिसकी डिजाइन लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के एक्सो-वायुमंडलीय और एंडो-वायुमंडलीय इंटरसेप्टर के लिए की गई है.

अग्नि-5: रक्षा क्षेत्र को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत ने 15 दिसंबर 2022 को परमाणु-सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) अग्नि-V का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, मिसाइल का परीक्षण ओडिशा तट के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया, यह अग्नि मिसाइल श्रृंखला का नवीनतम परीक्षण था। यह मिसाइल उच्च स्तर की सटीकता के साथ करीब 5,000 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्य को भेदने में सक्षम है.

 

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 20, 2022 08:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).