IAF की बढ़ी मारक ताकत, 40 सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों में तैनात हुई सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल
The Indian Air Force (IAF) has significantly enhanced its long-range offensive capabilities, with approximately 40 of its frontline Sukhoi Su-30MKI fighter jets now fully integrated with the air-launched BrahMos supersonic cruise missile system.
IAF Equips 40 Sukhoi Su-30MKI Fighter Jets With Supersonic BrahMos Cruise Missiles: भारतीय वायुसेना (IAF) ने अपनी लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को और मजबूत करते हुए करीब 40 फ्रंटलाइन सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों को एयर-लॉन्च ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस कर दिया है. इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की पुष्टि ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सह-निदेशक अलेक्जेंडर माक्सीचेव ने की है. उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक सुखोई विमानों को इस अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली से लैस करने का कार्यक्रम लगातार जारी है.
40 सुखोई लड़ाकू विमान बने और अधिक घातक
रूस की समाचार एजेंसी स्पुतनिक से बातचीत के दौरान अलेक्जेंडर माक्सीचेव ने बताया कि सुखोई Su-30MKI विमानों में ब्रह्मोस मिसाइल के एकीकरण (Integration) का कार्य तेजी से चल रहा है. फिलहाल भारतीय वायुसेना के 40 लड़ाकू विमान इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस हो चुके हैं.
भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा रूस के लाइसेंस के तहत निर्मित Su-30MKI भारतीय वायुसेना का सबसे प्रमुख मल्टीरोल फाइटर जेट है. IAF के बेड़े में ऐसे करीब 270 विमान शामिल हैं.
दुश्मन की सीमा में दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम
एयर-लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइल, भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का हल्का संस्करण है. इसका वजन लगभग 2.5 टन है, जबकि जमीन और नौसेना से लॉन्च होने वाले संस्करण का वजन करीब 3 टन होता है.
इस मिसाइल को सुखोई विमान में लगाने के लिए उसके ढांचे और एयरोडायनामिक डिजाइन में कई तकनीकी बदलाव किए गए. लगभग 3,000 किलोमीटर की उड़ान क्षमता वाले Su-30MKI और 450 किलोमीटर तक मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल का संयोजन भारतीय वायुसेना को दुश्मन की सीमा के भीतर मौजूद अहम सैन्य ठिकानों और समुद्री लक्ष्यों पर बिना दुश्मन की एयर डिफेंस रेंज में आए सटीक हमला करने की क्षमता देता है.
ऑपरेशन सिंदूर में मिली क्षमता की पुष्टि
अलेक्जेंडर माक्सीचेव के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस लड़ाकू विमान और ब्रह्मोस मिसाइल की संयुक्त क्षमता का सफल प्रदर्शन देखने को मिला. इस अभियान में हाई-प्रिसिजन स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक मिशनों ने इस हथियार प्रणाली की प्रभावशीलता को साबित किया.
ब्रह्मोस-NG और हाइपरसोनिक तकनीक पर भी काम
ब्रह्मोस एयरोस्पेस और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस-NG (Next Generation) मिसाइल पर भी काम कर रहे हैं. यह मौजूदा ब्रह्मोस की तुलना में आकार में छोटी, वजन में हल्की और अधिक घातक होगी.
अलेक्जेंडर माक्सीचेव ने बताया कि नई मिसाइल में अत्याधुनिक एवियोनिक्स, AI आधारित गाइडेंस सिस्टम और बेहतर सटीकता होगी. इसके 2028-29 तक भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने की संभावना है. इसके साथ ही भारत और रूस हाइपरसोनिक हथियार तकनीक पर भी संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं.
ब्रह्मोस के निर्यात पर भी भारत का फोकस
1998 में शुरू हुए भारत-रूस के इस संयुक्त रक्षा प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता मिल रही है. फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति के बाद भारत अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित कई देशों के साथ रक्षा निर्यात को लेकर बातचीत कर रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE ने ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम के साथ-साथ भारत के स्वदेशी आकाशतीर (Akashteer) एयर डिफेंस सिस्टम में भी रुचि दिखाई है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 26, 2026 05:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

