Balaram Jayanti 2026 Messages: बलराम जयंती के इन हिंदी Quotes, WhatsApp Wishes, Facebook Greetings को भेजकर अपनों को दें शुभकामनाएं
भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार भगवान बलराम का जन्मोत्सव यानी 'बलराम जयंती' इस वर्ष 2 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है. भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ने वाले इस पर्व को उत्तर भारत में हल छठ, हरछठ, ललही छठ, राधन छठ और चंदन छठ के नाम से भी जाना जाता है. संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और कृषि समृद्धि के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है. बलराम जी के मुख्य आयुध 'हल' के कारण यह दिन कृषक समुदाय के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है.
Balaram Jayanti 2026 Messages in Hindi : सनातन परंपरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से ठीक दो दिन पहले उनके अग्रज और शक्ति के प्रतीक भगवान बलराम का जन्मोत्सव (Balaram Jayanti 2026) बुधवार, 2 सितंबर 2026 को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को शेषनाग ने द्वापर युग में बलराम जी के रूप में अवतार लिया था.
बलराम जयंती को देश के विभिन्न हिस्सों में हल षष्ठी, हल छठ, ललही छठ, हरछठ, राधन छठ, चंदन छठ और खमर छठ जैसे कई नामों से जाना जाता है.
कृषक संस्कृति के संरक्षक और 'हलधर' का महत्व
भगवान बलराम को कृषि का देवता और किसानों का संरक्षक माना जाता है. उनका मुख्य शस्त्र 'हल' और 'मूसल' होने के कारण उन्हें 'हलधर' भी कहा जाता है:
- कृषि यंत्रों का पूजन: इस दिन ग्रामीण और कृषक समुदाय में हल और खेती के अन्य औजारों की विशेष पूजा की जाती है.
- संतान सुख और दीर्घायु: इस पावन तिथि पर माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, आरोग्य और संकटों से रक्षा के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यता है कि निसंतान महिलाएं यदि विधि-विधान से यह व्रत करें, तो उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है.
अपनों को भेजें बलराम जयंती के शुभकामना संदेश
बलराम जयंती के पावन पर्व पर श्रद्धालु सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेजते हैं.





- "बल, बुद्धि और पराक्रम के प्रतीक भगवान बलराम का आशीर्वाद आप और आपके परिवार पर सदा बना रहे. बलराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!"
- "हलधर बलराम जी हरें आपकी संतान के सारे कष्ट, जीवन में आए खुशहाली और आरोग्य. हल षष्ठी और बलराम जन्मोत्सव की बधाई!"
व्रत और पूजन के प्रमुख नियम
बलराम जयंती और हल षष्ठी व्रत के नियम अन्य सामान्य व्रतों से काफी भिन्न और कड़े होते हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: व्रती को सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी, जलाशय या घर पर गंगाजल युक्त जल से स्नान करना चाहिए.
- अन्न का परहेज और फलाहार: इस दिन हल से जोते गए अनाज का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है। व्रती केवल फलाहार, महुआ, तिन्नी (पसही) के चावल और बिना जोती जमीन पर उगने वाली खाद्य सामग्रियों का ही उपयोग करते हैं.
- भैंस के दूध का उपयोग: इस व्रत में गाय के दूध और उससे बने उत्पादों का सेवन नहीं किया जाता, केवल भैंस के दूध, घी और दही का ही उपयोग मान्य है.
पूजन विधि और पारण परंपरा
बलराम जी की प्रतिमा या चित्र की स्थापना कर षष्ठी माता के साथ उनका आह्वान किया जाता है. पूजा में महुआ, पलाश के पत्ते, रोली, अक्षत और फल अर्पित किए जाते हैं.
पूजा संपन्न होने के बाद अगले दिन पुनः पूजन कर या प्रदोष काल में पलाश के पत्तों पर फलाहारी प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 02, 2026 06:30 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

