Ganesh Visarjan 2026: 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर होगी बप्पा की विदाई; जानें विसर्जन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और अनंत सूत्र का महत्व
10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर भव्य गणेश विसर्जन के साथ होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर श्रद्धालु 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयकारों के साथ विघ्नहर्ता भगवान गणेश को विदाई देते हैं. इसी दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना और 14 गांठों वाले रक्षा सूत्र (अनंत सूत्र) बांधने की परंपरा भी निभाई जाती है.
मुंबई/नई दिल्ली: 10 दिनों तक घरों और सार्वजनिक पंडालों में विराजने के बाद विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश के स्वधाम लौटने का महापर्व गणेश विसर्जन वर्ष 2026 में शुक्रवार, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाएगा.
हिंदू धर्म में गणेश विसर्जन केवल एक विदाई अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवन के शाश्वत चक्र—सृजन, संरक्षण और विलीनीकरण—का आध्यात्मिक प्रतीक है. मान्यता है कि विसर्जन के दौरान बप्पा भक्तों के समस्त विघ्न और कष्ट अपने साथ ले जाते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. यह भी पढ़ें: Eco-Friendly Ganesh Visarjan: पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे दें बप्पा को विदाई? जानिए 'ग्रीन विसर्जन' के 6 आसान और प्रभावी तरीके
गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी का संयोग: दोहरे पर्व का महत्व
25 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ-साथ अनंत चतुर्दशी का व्रत भी रखा जाएगा:
- भगवान विष्णु की आराधना: यह दिन सृष्टि के पालनकर्ता भगवान श्रीहरि विष्णु के अनंत (विराट्) स्वरूप को समर्पित है.
- अनंत सूत्र का विधान: इस दिन 14 गांठों वाला पवित्र रक्षा सूत्र (अनंत सूत्र) विधि-विधान से पूजा के बाद बांधा जाता है. शास्त्रों के अनुसार, पुरुष इसे अपनी दाहिनी भुजा पर और महिलाएं बाईं भुजा पर धारण करती हैं, जो जीवन में रक्षा और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है.
- दोनों पर्वों का एक ही दिन पड़ना आध्यात्मिक दृष्टि से इस दिन के महत्व को दोगुना कर देता है.
विसर्जन तिथि और शुभ मुहूर्त का समय
पंचांग गणना के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की देर रात शुरू होकर 25 सितंबर की रात तक रहेगी:
- गणेश विसर्जन तिथि: शुक्रवार, 25 सितंबर 2026.
- शुभ चौघड़िया मुहूर्त: विसर्जन के लिए प्रात:काल (चर, लाभ, अमृत चौघड़िया) और दोपहर (शुभ चौघड़िया) का समय सबसे उत्तम माना जाता है.
- स्थानीय सूर्योदय और शहरवार समय के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार अनुकूल चौघड़िया देखकर प्रतिमा को विसर्जन के लिए प्रस्थान कराना चाहिए.
अंतिम विदाई और विसर्जन की संपूर्ण पूजा विधि
अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा को विदा करने से पूर्व यह विधि अपनाई जाती है:
- महाआरती और स्तुति: परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर भगवान गणेश की अंतिम विस्तृत आरती करें और पारंपरिक गणेश मंत्रों का जप करें.
- भोग और समर्पण: बप्पा को उनके प्रिय मोदक, लड्डू, दुर्वा, लाल पुष्प, धूप, दीप और इत्र अर्पित करें.
- प्रतिमा का संचलन (स्थान परिवर्तन): विसर्जन यात्रा शुरू करने से कुछ मिनट पहले प्रतिमा को चौकी से थोड़ा सा आगे खिसकाएं, जो यात्रा की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है.
- शोभायात्रा: ढोल-ताशों की धुन और जयकारों के साथ बप्पा की प्रतिमा को जल स्रोत या विसर्जन स्थल की ओर ले जाएं.
- भावभीना विसर्जन: नदी, समुद्र, झील या घर पर तैयार किए गए कृत्रिम जलकुंड में प्रतिमा को आदरपूर्वक विसर्जित करें.
पर्यावरण अनुकूल (इको-फ्रेंडली) विसर्जन पर जोर
पर्यावरण और जलीय जीवों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नागरिक प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञ इको-फ्रेंडली विसर्जन अपनाने की अपील कर रहे हैं:
- घरों में स्थापित मिट्टी (शाडू माटी) की छोटी मूर्तियों का विसर्जन पानी से भरी बाल्टी या गमलों में किया जा सकता है, जिससे बाद में उस मिट्टी में पौधे लगाए जा सकें.
- सार्वजनिक पंडालों और बड़ी मूर्तियों के लिए स्थानीय निकायों द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाबों का उपयोग करने की सलाह दी गई है, ताकि प्राकृतिक नदियों और समुद्र तटों का जल प्रदूषित न हो.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 21, 2026 02:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

