ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड: WhatsApp और Telegram पर 'VIP स्टॉक टिप्स' देने वालों से रहें सावधान, गृह मंत्रालय की I4C विंग ने जारी की एडवाइजरी
केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर विंग (I4C) ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए होने वाले ऑनलाइन निवेश घोटालों को लेकर नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है. जालसाज फर्जी ग्रुप बनाकर भारी मुनाफे और 'VIP टिप्स' का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं.
नई दिल्ली: व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर मासूम निवेशकों को शिकार बनाने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ सरकार ने देशव्यापी अलर्ट जारी किया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन काम करने वाले 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) ने नागरिकों को ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी (Investment Fraud) के बढ़ते खतरे के प्रति सतर्क रहने के लिए कहा है. जांचकर्ताओं के अनुसार, ये जालसाज फर्जी निवेश ग्रुप बनाकर खुद को शेयर बाजार का विशेषज्ञ या प्रतिष्ठित वित्तीय कंपनियों का प्रतिनिधि बताते हैं और 'गारंटीड रिटर्न' का झूठा वादा कर लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं. यह भी पढ़ें: मेटा CSAM विवाद: इंस्टाग्राम विज्ञापनों पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय का कड़ा नोटिस, एआई मॉडरेशन की विफलताओं पर उठे गंभीर सवाल
ऐसे जाल में फंसाते हैं साइबर ठग
साइबर विंग के अधिकारियों के अनुसार, इन घोटालों की शुरुआत व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर अनचाहे इनविटेशन लिंक से होती है. ग्रुप में जोड़ने के बाद ठग यूजर्स को तथाकथित "VIP स्टॉक टिप्स" और फर्जी ट्रेडिंग मुनाफे की कहानियां दिखाकर उनका भरोसा जीतते हैं.
इसके बाद, पीड़ितों को आधिकारिक ऐप स्टोर (Google Play Store या Apple App Store) के बजाय निजी (प्राइवेट) लिंक के जरिए फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए राजी किया जाता है. इन फर्जी ऐप्स पर शुरुआत में केवल कागजी या डिजिटल रूप में बड़ा मुनाफा दिखाया जाता है, जिससे प्रभावित होकर निवेशक और बड़ी रकम लगाने के लिए तैयार हो जाते हैं.
पैसे निकालने के नाम पर अतिरिक्त वसूली
ठगी का असली खेल तब शुरू होता है जब पीड़ित अपना मुनाफा या मूल रकम निकालने (विथड्रॉ) का प्रयास करता है. आई4सी (I4C) ने बताया कि पैसा निकालने की कोशिश करते ही निवेशक का अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता है.
इसके बाद, जालसाज टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अकाउंट वेरिफिकेशन चार्ज के नाम पर और अधिक पैसे जमा करने का दबाव बनाते हैं. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वास्तविक स्टॉकब्रोकर या वित्तीय संस्थान कभी भी ग्राहकों से उनका अपना ही पैसा निकालने के लिए अतिरिक्त नकद जमा करने की मांग नहीं करता है.
मुंबई के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक से 3.63 करोड़ की ठगी
इस तरह के फ्रॉड की गंभीरता को समझाने के लिए I4C ने मुंबई के एक रिटायर्ड वैज्ञानिक का उदाहरण दिया है, जिन्हें इसी तरह एक अज्ञात व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था. जालसाजों के झांसे में आकर उन्होंने एक प्राइवेट लिंक से नकली ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड किया, जहां उन्हें लगातार झूठा मुनाफा दिखाया गया.
वैज्ञानिक ने धीरे-धीरे 15 दिनों के भीतर कुल 3.63 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया. जब उन्होंने अपनी कमाई निकालनी चाही, तो उनका खाता फ्रीज कर दिया गया, जिससे वह अपनी मूल रकम भी नहीं बचा सके. गौरतलब है कि मुंबई और महाराष्ट्र में हाल के दिनों में ऐसे कई बड़े पोंजी और निवेश घोटाले सामने आए हैं, जिनकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) जैसी एजेंसियां कर रही हैं. यह भी पढ़ें: WhatsApp का नया 'यूजरनेम' फीचर सुरक्षा के लिए खतरा? भारत सरकार ने मेटा को भेजा नोटिस, मनीष सिसोदिया ने भी उठाए सवाल
खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
साइबर विशेषज्ञों और गृह मंत्रालय ने नागरिकों को सुरक्षित रहने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- किसी भी अज्ञात व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में शेयर की जाने वाली निवेश सलाह पर आंख मूंदकर भरोसा न करें.
- किसी प्राइवेट लिंक या APK फाइल के जरिए ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड न करें, हमेशा आधिकारिक ऐप स्टोर का ही उपयोग करें.
- शेयर बाजार में "गारंटीड रिटर्न" या विशेष "VIP टिप्स" के दावों को हमेशा एक खतरे का संकेत (Red Flag) मानें.
- पैसे लगाने से पहले ब्रोकर और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के क्रेडेंशियल्स की सेबी (SEBI) की आधिकारिक वेबसाइट पर जांच जरूर करें.
यदि आप किसी ऐसे साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते डूबी हुई रकम को फ्रीज और रिकवर किया जा सके.