Kanpur Crime News: कानपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, परिवार की महिलाओं के अश्लील वीडियो रिकॉर्ड कर Google Drive पर सेव करने का आरोप; युवक गिरफ्तार; VIDEO
Kanpur Police

Kanpur Crime News:   उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में पुलिस ने एक चौंकाने वाले मामले में 19 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है. आरोपी पर आरोप है कि उसने अपनी ही नाबालिग चचेरी बहनों और पड़ोस की अन्य लड़कियों के आपत्तिजनक वीडियो गुप्त रूप से रिकॉर्ड किए और उन्हें अपने गूगल ड्राइव (Google Drive) अकाउंट पर सेव कर लिया था. इस मामले का खुलासा तब हुआ जब टेक दिग्गज गूगल (Google) ने अपने क्लाउड स्टोरेज पर मौजूद इस आपत्तिजनक सामग्री को ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए डिटेक्ट किया और भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) को इसकी सूचना दी.

आईपी एड्रेस से हुआ आरोपी का पर्दाफाश

गूगल द्वारा दी गई जानकारी के बाद कानपुर पुलिस की सेंट्रल ज़ोन साइबर सेल तुरंत हरकत में आई. पुलिस ने गूगल द्वारा मुहैया कराए गए आईपी (IP) एड्रेस और मोबाइल आईएमईआई (IMEI) नंबर की मदद से आरोपी की लोकेशन को ट्रैक किया. आरोपी कानपुर के चमनगंज इलाके का रहने वाला है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है और अब इस बात की जांच की जा रही है कि क्या उसने इन वीडियो को किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर भी शेयर या अपलोड किया था.  यह भी पढ़े:   Mumbai Crime News: शादी के प्रस्ताव को ठुकराने पर होने वाली सास की अश्लील तस्वीरें बनाकर वायरल करने का आरोप, महिला के खिलाफ मामला दर्ज

कानपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

टेक कंपनियों की मॉनिटरिंग और प्राइवेसी का सवाल

इस कार्रवाई ने जहां एक तरफ गंभीर साइबर अपराध को रोकने में सफलता हासिल की है, वहीं दूसरी तरफ इसने डिजिटल प्राइवेसी (Digital Privacy) को लेकर एक बड़ी बहस को भी जन्म दे दिया है. आम तौर पर उपयोगकर्ता यह मानते हैं कि गूगल ड्राइव या अन्य क्लाउड स्टोरेज पर रखा गया उनका निजी डेटा पूरी तरह से गोपनीय और सुरक्षित है. हालांकि, यह घटना स्पष्ट करती है कि गूगल जैसी कंपनियां अवैध सामग्री, विशेषकर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) को रोकने के लिए उपयोगकर्ताओं के डेटा की लगातार 24x7 ऑटोमैटिक स्कैनिंग करती हैं.

क्या सुरक्षित है आपका क्लाउड डेटा?

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश बड़ी तकनीकी कंपनियां अपनी सेवा की शर्तों (Terms of Service) में स्पष्ट करती हैं कि वे प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए डेटा को स्कैन कर सकती हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि क्लाउड स्टोरेज पर सेव किया गया डेटा पूरी तरह से 'प्राइवेट' या एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होता है, जब तक कि उपयोगकर्ता खुद उसे एन्क्रिप्ट न करे. सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह निगरानी अपराधियों को पकड़ने में मददगार साबित होती है, लेकिन यह आम उपयोगकर्ताओं के लिए अपनी व्यक्तिगत फाइलों की गोपनीयता को लेकर सतर्क रहने की चेतावनी भी है.