Ahmedabad Call Centre Busted: अहमदाबाद में फेक Sex आयुर्वेदिक दवा और जबरन वसूली के बड़े रैकेट का भंडाफोड़, 5,000 लोगों से करोड़ों की ठगी; 7 गिरफ्तार
गुजरात सीआईडी ने अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में चल रहे एक बड़े साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. यह गैंग सोशल मीडिया पर नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बेचकर और बाद में फर्जी पुलिस केस की धमकी देकर देश भर के 5,000 से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है.
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Ahmedabad Call Centre Busted: गुजरात सीआईडी (CID) के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने अहमदाबाद में चल रहे एक बड़े अखिल भारतीय साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह कथित तौर पर सोशल मीडिया के जरिए नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बेचकर और बाद में फर्जी पुलिस केस की धमकी देकर करीब 5,000 लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है. पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के रहने वाले मास्टरमाइंड देवेंद्रसिंह राजावत और एक महिला समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है.
अहमदाबाद और उत्तर प्रदेश में एक साथ छापेमारी
यह पूरा मामला 10 जुलाई को तब सामने आया जब पुलिस की एक टीम ने अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में चल रहे 15 सीटों वाले एक कॉल सेंटर पर छापा मारा. इस कार्रवाई के तुरंत बाद गुजरात पुलिस ने उत्तर प्रदेश में भी छापेमारी की, जहां से कुछ और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. जांच अधिकारियों का मानना है कि इस गैंग का नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ है और यह बड़े पैमाने पर लोगों को अपना शिकार बना रहा था.
इस तरह काम करता था फर्जी दवा का खेल
गुजरात सीआईडी के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर "100% गारंटीड" आयुर्वेदिक इलाज और शारीरिक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं के झूठे विज्ञापन पोस्ट करते थे. जब कोई ग्राहक इन विज्ञापनों में रुचि दिखाता था, तो कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को डॉक्टर या मेडिकल एक्सपर्ट बताकर उनसे बात करते थे. इसके बाद ग्राहकों को ऑनलाइन ऑर्डर देने के लिए राजी किया जाता था और कोरियर सर्विस के जरिए उनके घर पार्सल भेज दिया जाता था.
फर्जी पुलिस केस और जबरन वसूली का तरीका
दवा की डिलीवरी होने के बाद असली धोखाधड़ी का खेल शुरू होता था. गिरोह के सदस्य पीड़ितों को फोन करके खुद को पुलिस अधिकारी, डॉक्टर या सरकारी अफसर बताते थे. वे दावा करते थे कि जो दवाएं भेजी गई हैं वे प्रतिबंधित नशीली दवाएं (Stimulants) हैं. पीड़ितों को डराने के लिए उनके घर के पास के पुलिस स्टेशनों के नाम पर फर्जी एफआईआर (FIR) की कॉपी दिखाई जाती थी.
मामले को रफा-दफा करने और गिरफ्तारी से बचने के लिए पीड़ितों से 2,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की "सेटलमेंट राशि" मांगी जाती थी. पुलिस जांच में सामने आया है कि जिन ग्राहकों ने कोरियर से आए पार्सल को स्वीकार करने से मना कर दिया था, उन्हें भी जेल भेजने की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करवाए गए.
विज्ञापनों पर रोजाना 30,000 रुपये का खर्च
जांचकर्ताओं ने बताया कि यह सिंडिकेट ग्राहकों का डेटाबेस तैयार करने और नए शिकार ढूंढने के लिए सोशल मीडिया विज्ञापनों पर रोजाना लगभग 30,000 रुपये खर्च करता था. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी उत्तर प्रदेश के बिधूना में भी इसी तरह का एक और नया कॉल सेंटर शुरू करने की योजना बना रहे थे.
पुलिस ने छापेमारी के दौरान 44 मोबाइल फोन, 23 सीपीयू (CPU), दो लैपटॉप, तीन कॉलर-आईडी वाले टेलीफोन, पांच बैंक पासबुक, चेक बुक, क्यूआर कोड रिकॉर्ड और तन्वी एंटरप्राइजेज, अश्वनी आयुर्वेद, डीआर आयुर्वेद व आयुषक्ति आयुर्वेद के नाम की फर्जी रबर स्टांप बरामद की हैं.
5 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन
वित्तीय जांच में पुलिस को आरोपियों से जुड़े 14 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें 5 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन (Transactions) दर्ज किए गए हैं. इन बैंक खातों के खिलाफ पहले से ही अलग-अलग राज्यों में छह शिकायतें दर्ज थीं. गुजरात सीआईडी इस साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश में जांच को आगे बढ़ा रही है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 11, 2026 10:01 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

