क्लाउड स्टोरेज प्लेटफॉर्म जैसे Google Drive पर कोई भी सामग्री सेव करना भले ही निजी लगता हो, लेकिन हाल ही में कानपुर में हुई एक गिरफ्तारी इस धारणा को गलत साबित करती है. एक व्यक्ति को तब गिरफ्तार किया गया जब Google के ऑटोमेटेड सिस्टम ने उसके अकाउंट पर संदिग्ध चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) को चिन्हित कर लिया। कुछ ही दिनों में पुलिस आरोपी तक पहुंच गई. यह मामला दिखाता है कि टेक कंपनियां अवैध सामग्री को लेकर कितनी सतर्क हैं और ऐसी जानकारी कितनी तेजी से कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचती है.
कैसे पकड़ा गया आरोपी
कानपुर के चमन गंज इलाके से गिरफ्तार आरोपी पर आरोप है कि उसने अपनी नाबालिग रिश्तेदारों और आसपास की लड़कियों के अश्लील वीडियो गुप्त रूप से रिकॉर्ड किए और उन्हें अपने Google Drive अकाउंट पर अपलोड कर दिया. उसने अपने फोन से वीडियो डिलीट कर दिए, लेकिन क्लाउड में मौजूद फाइल्स Google के सुरक्षा सिस्टम द्वारा पकड़ ली गईं.
डिजिटल सबूत मिटाना लगभग नामुमकिन
पुलिस के अनुसार, Google ने जांच एजेंसियों को आरोपी की पहचान से जुड़ी कई तकनीकी जानकारियां साझा कीं, जैसे ईमेल आईडी, मोबाइल का IMEI नंबर, IP एड्रेस और अन्य डिजिटल डिटेल्स. इन जानकारियों के आधार पर पुलिस ने कुछ ही दिनों में आरोपी को ट्रेस कर गिरफ्तार कर लिया. यह मामला स्पष्ट करता है कि फोन से डेटा डिलीट करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि क्लाउड बैकअप में डेटा सुरक्षित रहता है और उसे आसानी से ट्रैक किया जा सकता है.
अश्लील क्लिप रिकॉर्ड करने के आरोप में गूगल अलर्ट की वजह से एक व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई:
साइबर सेल सेन्ट्रल टीम द्वारा NCMEC के तहत की गयी कार्यवाही के सम्बन्ध में अपर पुलिस उपायुक्त अपराध महदोया की बाइट। @Uppolice @Dcpcentralknr @DcpCrimeKanpur pic.twitter.com/l1LWhnyolE
— POLICE COMMISSIONERATE KANPUR NAGAR (@kanpurnagarpol) July 10, 2026
किस तरह ट्रिगर होता है अलर्ट
Google Drive जैसे प्लेटफॉर्म ऑटोमेटेड स्कैनिंग टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, जो अपलोड की गई फाइल्स को अवैध कंटेंट डेटाबेस से मिलाते हैं. यदि कोई सामग्री CSAM या अन्य प्रतिबंधित श्रेणी में आती है, तो अकाउंट तुरंत सस्पेंड किया जा सकता है. इसके बाद कंपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित जानकारी एजेंसियों के साथ साझा कर सकती है. इस मामले में जानकारी NCMEC (National Center for Missing & Exploited Children) के माध्यम से भारत की साइबर क्राइम एजेंसियों तक पहुंची.
कानूनी कार्रवाई बेहद सख्त
भारत में नाबालिगों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखना, बनाना या साझा करना गंभीर अपराध है. ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई होती है. आरोपी पर अब गंभीर धाराओं में केस दर्ज है और यह भी जांच हो रही है कि क्या सामग्री आगे कहीं शेयर की गई थी.
निष्कर्ष
क्लाउड स्टोरेज पूरी तरह निजी नहीं है. Google जैसे प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई अवैध सामग्री को ऑटोमेटेड सिस्टम तुरंत पहचान सकते हैं और इसकी जानकारी एजेंसियों तक पहुंच सकती है. किसी भी प्रकार की अवैध या नाबालिगों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखना न केवल अपराध है बल्कि इसके लिए गिरफ्तारी और जेल की सजा भी हो सकती है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर दें.
Disclaimer: यह लेख केवल जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है. हम किसी भी प्रकार की अश्लील, अवैध या गैर-सहमति वाली सामग्री का समर्थन या प्रसार नहीं करते हैं। ऐसी सामग्री को सर्च या शेयर करना कानूनन अपराध है.













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