तन्हाई भी बिकती है! लोनलीनेस इन्फ्लुएंसरों के कंटेंट पर बरस रहे हैं क्लिक
ना कोई दोस्त, ना डेटिंग, फिर भी कोई समस्या नहीं? कई इन्फ्लुएंसर अकेलेपन को एक लाइफस्टाइल की तरह दिखा रहे हैं.
ना कोई दोस्त, ना डेटिंग, फिर भी कोई समस्या नहीं? कई इन्फ्लुएंसर अकेलेपन को एक लाइफस्टाइल की तरह दिखा रहे हैं. हालांकि, विशेषज्ञों ने इसके बुरे नतीजों की चेतावनी दी है.इंस्टाग्राम पर एक वीडियो काफी वायरल हुआ है. इसमें दिखता है कि एक युवा कामकाजी महिला अपने घर लौटती है, अपनी बिल्ली को प्यार करती है, अपनी हाई हील्स साफ करती है, नहाती है और पाजामे में सोफे पर बैठकर पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक के साथ टीवी देखने लगती है. इसके बाद, वह घर की सफाई करती है और कचरा बाहर फेंकती है, क्योंकि उसके घर में कभी भी गंदगी नहीं रहती. फिर वह शाम का बाकी समय सोफे पर अपनी बिल्ली के साथ बिताती है.
वीडियो का शीर्षक है: "पीओवी: आप न्यूयॉर्क में अकेले रहते हैं और आपका कोई दोस्त नहीं है, तो आप अपनी शुक्रवार की रात ऐसे बिताते हैं.” इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर 11 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है.
जर्मनी के लोकतंत्र के लिए कितना बड़ा खतरा है अकेलापन
यह रील पॉलीना सी का अब तक का सबसे लोकप्रिय वीडियो है. उनके 3,20,000 से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर हैं. उनके अकाउंट पर इस तरह के कई वीडियो हैं, जिनमें वे हमेशा बिना दोस्तों वाली अपनी जिंदगी पर जोर देती हैं.
पॉलीना सी एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा हैं. सोशल मीडिया ऐसी युवा महिलाओं से भरा पड़ा है जो अपने अकेलेपन को एक लाइफस्टाइल की तरह दिखा रही हैं. कभी उनके पास एक कुत्ता होता है, तो कभी एक या दो बिल्लियां, लेकिन बाकी सभी वीडियो का अंदाज एक जैसा होता है. एक ऐसा अपार्टमेंट जो इतना साफ है और इतने कम सामान हैं कि उसमें बिल्कुल सन्नाटा और खालीपन सा एहसास होता है.
खुद के साथ और अकेले रहने का सुकून
टोरंटो की लाना ईसा इस ट्रेंड की शुरुआती इन्फ्लुएंसरों में से एक हैं. उनके वीडियो के शीर्षक कुछ ऐसे होते हैं: ‘अपने पसंदीदा माहौल में एक इंट्रोवर्ट (घर पर अकेले और स्वादिष्ट खाना)' या फिर ‘बिना दोस्तों वाली लड़की का वीकेंड कैसा होता है, जिसे पुरुषों या डेटिंग में कोई दिलचस्पी नहीं है.'
ऑफिस में दोस्त होना जरूरी है
लाना ईसा हमेशा अपनी रील्स का अंत एक सकारात्मक संदेश ‘एंजॉय योर लाइफ' (अपनी जिंदगी का मजा लें) के साथ करती हैं. ऐसा लगता है कि वे अपनी काफी हद तक अकेली जिंदगी से पूरी तरह खुश और संतुष्ट हैं. अपनी मां के साथ फेसटाइम कॉल और अपनी बहन से बातचीत के अलावा, उनके वीडियो मुख्य रूप से खरीदारी और उपभोग के इर्द-गिर्द ही घूमते हैं. इसमें अक्सर अस्वस्थ खाना (जंक फूड), नए कपड़े या फिल्में शामिल होती हैं.
इस कनाडाई इन्फ्लुएंसर का कहना है कि उनके कंटेंट का मकसद सिर्फ अपनी असली जिंदगी को शेयर करना है. उनके मुताबिक, उनकी यह जिंदगी जनरलाइज्ड एंजायटी डिसऑर्डर (लगातार चिंता से जुड़ी मानसिक समस्या), अपना रिश्ता टूटने और कुछ साल पहले अपने सभी दोस्तों को खो देने की वजह से ऐसी बन गई है.
वह कहती हैं, "इसका मकसद कभी भी सिर्फ ‘एस्थेटिक व्लॉग' बनाना या दोस्तों के ना होने को अच्छा दिखाना नहीं था... मैंने बस अपनी जिंदगी के मौजूदा दौर को फिल्माना और दिखाना शुरू किया, जो अपनी भावनाओं को समझने और उनसे निपटने के बाद मिला सुकून था.”
क्या वाकई में अकेले रहते हैं लोनलीनेस इन्फ्लुएंसर्स
क्लागेनफर्ट यूनिवर्सिटी में मनोविश्लेषण-आधारित साइकोथेरेपी रिसर्च की असिस्टेंट प्रोफेसर मरेके अर्न्स्ट ऐसी रील को लेकर मिली-जुली राय रखती हैं. उन्होंने साइकोथेरेपी और अकेलेपन पर रिसर्च किया है. वह कहती हैं कि एक तरफ तो यह अच्छी बात है कि युवा महिलाएं सार्वजनिक तौर पर यह दिखाती हैं कि अकेले रहना, सही और सामान्य बात है: "इससे अकेलेपन से जुड़े ताने या शर्म को खत्म करने में मदद मिल सकती है. साथ ही, यह उन कई अन्य इन्फ्लुएंसरों के कंटेंट का एक बेहतर जवाब है, जो अक्सर हमेशा लोगों से घिरे रहने और मेल-जोल को ही सही दिखाते हैं.”
दूसरी ओर, ऐसी ही जिंदगी जी रहे युवा इन ‘लोनलीनेस इन्फ्लुएंसर्स' को रोल मॉडल मान सकते हैं, "जिससे ज्यादातर समय अकेले बिताना और खुद को यह यकीन दिलाना कि ‘यह बिल्कुल ठीक है', आम बात हो जाती है.”
ये ‘लोनलीनेस इन्फ्लुएंसर्स' सच में इतने अकेले हैं या नहीं, यह तय करना मुश्किल है. लेकिन असली बात यह है कि बहुत से फॉलोअर उन पर भरोसा करते हैं और वीडियो में दिखाई गई इस अकेली जिंदगी को पसंद कर रहे हैं. फिर भी कड़वा सच यही है कि लंबे समय तक समाज और लोगों से कटे रहने से इंसान बीमार पड़ सकता है. अध्ययनों से पता चलता है कि इससे दिल की बीमारियों, डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओंऔर असमय मौत का खतरा बढ़ जाता है.
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बहुत ज्यादा युवा इन खतरों की चपेट में आ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के 2025 के एक अध्ययन में, 13 से 29 साल के 17 से 21 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अकेलापन महसूस करते हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या किशोरों की थी. डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि इनमें से लगभग एक-चौथाई लोग सामाजिक रूप से अलग-थलग हैं. 13 देशों में किए गए ‘निविया' के एक अध्ययन के मुताबिक, 16 से 24 साल के 24 फीसदी युवा खुद को समाज से कटा हुआ महसूस करते हैं, जबकि सभी उम्र के लोगों में यह आंकड़ा 19 फीसदी है.
क्या अकेलेपन को एस्थेटिक माना जा सकता है?
‘लोनलीनेस इन्फ्लुएंसर्स' में ज्यादातर महिलाएं ही हैं. प्रोफेसर अर्न्स्ट को लगता है कि इसका संबंध जेंडर स्टीरियोटाइप यानी लिंग से जुड़ी रूढ़िवादी सोच से है. महिलाओं से हमेशा यह उम्मीद की जाती है कि वे रिश्ते बनाएं और दूसरों के लिए मौजूद रहें. इसलिए, यह नया ट्रेंड एक तरह से इस सोच से आजादी या सशक्तीकरण का जरिया हो सकता है.
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अर्न्स्ट ने कहा, "या फिर शायद यह ट्रेंड महिला इन्फ्लुएंसरों के उस एस्थेटिक स्टाइल के साथ बेहतर ढंग से मेल खाता है, जिसमें अक्सर खुद का ख्याल रखने, खाना पकाने, घर की साफ-सफाई और इस तरह के दूसरे कामों पर ध्यान दिया जाता है.”
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इसी एस्थेटिक स्टाइल को देखते हुए, अमेरिकी साइकोथेरेपिस्ट फिल लेन ने हाल ही में इन इन्फ्लुएंसर्स को संबोधित करते हुए एक इंस्टाग्राम पोस्ट लिखा, "लोनलीनेस इन्फ्लुएंसर्स, अकेलेपन को एस्थेटिक स्टाइल बनाकर पेश करना बंद कीजिए. यह कोई ट्रेंड बनने वाला नहीं है. हमारा दूसरे इंसानों के साथ रहना और मिलना-जुलना बहुत जरूरी है. यह हम इंसानों की बुनियादी जरूरतों में से एक है.”
लेन ने इस बात पर जोर दिया कि अकेले समय बिताने में कोई बुराई नहीं है. उन्होंने लिखा, "कभी-कभी मुझे अकेले रहना और अपना साथ बहुत अच्छा लगता है, लेकिन हमें हद से ज्यादा ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे सेहत को गंभीर नुकसान हो सकते हैं.”
हालांकि, अब तक उनके मैसेज को ज्यादा लोगों ने नहीं देखा है. उनकी पोस्ट को सिर्फ 900 के आस-पास ही व्यूज मिले हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 31, 2026 05:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

