Viral Video: चीन में जनसंख्या विस्फोट! रेलवे स्टेशन पर दिखा भारी भीड़ का सैलाब, वायरल वीडियो पर छिड़ी बहस
Photo- @Sheetal2242/X

Viral Video: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, दावा किया जा रहा है कि यह चीन के एक रेलवे स्टेशन का वीडियो है. वायरल वीडियो में रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ को दिखाया गया है. लोग एक-दूसरे से सटे खड़े नजर आ रहे हैं, जिससे साफ पता चलता है कि वहां पैर रखने की भी जगह नहीं है. इस पर यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. किसी ने इसे मजाक में लिया तो किसी ने गंभीरता से कहा कि आबादी ही असली समस्या है. कई यूजर्स ने तुलना भारत के रेलवे स्टेशनों से भी की. किसी ने कहा, "भारत में इससे भी खराब हाल होता है." लेकिन यह तुलना बताती है कि भारत और चीन दोनों देशों के सामने जनसंख्या और इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है.

ये भी पढें: Typhoon Wipha In China: दक्षिण चीन में टाइफून विफा के बीच तेज़ हवाओं में उड़ते और गिरते दिखे लोग, देखें दिल दहला देने वाला वीडियो

जनसंख्या और व्यवस्था की हकीकत

चीन में दुनिया का सबसे लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

वीडियो देखकर जो बात सबसे पहले दिमाग में आती है, वो है चीन का तेजी से बढ़ता यात्री दबाव. चीन में दुनिया का सबसे लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है, जो हर दिन करोड़ों यात्रियों को सफर की सुविधा देता है. लेकिन छुट्टियों के समय, जैसे कि चीनी न्यू ईयर के दौरान, हालात बेकाबू हो जाते हैं. चुन्युन पीरियड, यानी स्प्रिंग फेस्टिवल के वक्त, पूरे देश में करोड़ों लोग अपने घर लौटते हैं. यही वजह है कि रेलवे स्टेशन पर पैर रखने की जगह भी नहीं मिलती.

2007 के आंकड़े बताते हैं कि केवल 40 दिनों में करीब 15.6 करोड़ लोग ट्रेनों से सफर करते थे, जबकि सामान्य दिनों में ये संख्या काफी कम होती है. बीजिंग वेस्ट स्टेशन, शंघाई होंगकियाओ और गुआंगझोउ साउथ जैसे बड़े स्टेशन सामान्य दिनों में ही लाखों यात्रियों को संभालते हैं. अब सोचिए, जब त्योहारी भीड़ उमड़ती है, तो हालात कैसे हो जाते होंगे.

जनसंख्या का प्रबंधन जरूरी

ये वीडियो इस बात का भी संकेत देता है कि चाहे देश कितना भी एडवांस क्यों न हो, अगर जनसंख्या का प्रबंधन नहीं हुआ तो व्यवस्था चरमरा सकती है. चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर में जोरदार निवेश किया है, फिर भी ऐसी भीड़ से बचा नहीं जा सका.

इस तरह के वीडियो न सिर्फ भीड़ दिखाते हैं, बल्कि यह भी सवाल उठाते हैं कि क्या हमारे शहर और व्यवस्थाएं इतनी बड़ी जनसंख्या को संभालने के लिए तैयार हैं? यह बहस का विषय है, और भविष्य की योजना बनाने के लिए जरूरी भी.