Viral Post: वीकेंड पर काम करने पर नॉर्वे में भारतीय कर्मचारी को बॉस से मिली डांट, 'हसल कल्चर' पर पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल
नॉर्वे में काम करने वाले एक भारतीय पेशेवर की सोशल मीडिया पोस्ट ने कॉर्पोरेट जगत में 'हसल कल्चर' (लगातार काम करने की होड़) और वर्क-लाइफ बैलेंस पर एक नई बहस छेड़ दी है. वीकेंड पर काम करने और छुट्टियां रद्द करने पर बॉस से मिली डांट का उनका अनुभव इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है.
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नई दिल्ली, 13 जून: सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर एक भारतीय प्रवासी की पोस्ट ने दुनिया भर के कॉर्पोरेट कर्मचारियों (Corporate Employees) का ध्यान अपनी ओर खींचा है. विनोद नाम के इस पेशेवर ने साझा किया कि कैसे भारत में अत्यधिक घंटे काम करने की उनकी पुरानी आदत की वजह से नॉर्वे (Norway) में उनके मैनेजर ने उनकी तारीफ करने के बजाय उन्हें फटकार लगा दी. यह पोस्ट वैश्विक स्तर पर कॉर्पोरेट कार्यसंस्कृति, काम की सीमाओं और कर्मचारियों में होने वाले मानसिक तनाव (बर्नआउट) को लेकर एक बड़ी बहस में बदल गई है. यह भी पढ़ें: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बॉस का 'दिल जीतने वाला' ईमेल; कर्मचारी के इस्तीफे पर दिया ऐसा जवाब, लोग बोले- 'प्रोफेशनल मैच्योरिटी का शिखर'
स्कैंडिनेवियाई देशों के साथ सांस्कृतिक टकराव
विनोड करीब 15 साल पहले नॉर्वे शिफ्ट हुए थे. उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि जब वे शुरुआत में वहां गए, तो उनके भीतर भारत की वही पारंपरिक कार्यशैली (इंडियन वर्क एथिक्स) रची-बसी थी. वे वीकेंड पर भी काम करते थे, लंच छोड़ देते थे, देर रात तक ऑफिस में रुकते थे और तबीयत ठीक न होने पर भी खुद को काम के लिए झोंक देते थे.
उनके जीवन में बदलाव तब आया जब शुरुआती दिनों में उनके बॉस ने उन्हें एक अचानक बैठक के लिए बुलाया. विनोद को लगा कि उनके कड़े परिश्रम और बेहतरीन आउटपुट के लिए उनकी सराहना की जाएगी, लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ.
भारतीय व्यक्ति का कहना है कि ज़्यादा काम करने के कारण उन्हें डांट पड़ी
15 years ago, I moved to Norway 🇳🇴... carrying my Indian work ethic - weekend work, skipped lunches, late evenings, and pushing myself even when I was not well.
Then one day, during my early days in Norway, my boss called me in. I thought I was going to be praised.
You replied…
— Vinod (@turiyatman) June 10, 2026
X यूजर ने कहा, 'इसने दिल को छू लिया'
This hit hard. In India, overworking is still seen as dedication, while healthy boundaries are viewed as weakness. Your Norwegian boss taught a powerful lesson real leadership protects well-being, not burnout.
We need this culture shift badly. Thanks for sharing!
— Mr Dixit (@Amardixit27) June 10, 2026
जब बॉस ने कहा- 'यह समर्पण नहीं है'
विनोड ने अपने पोस्ट में बॉस के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा, 'मेरे बॉस ने मुझसे कहा—तुमने शनिवार को मेरे ईमेल का जवाब दिया और बिना बताए एक प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अपनी छुट्टियां रद्द कर दीं. मैं जानता हूं कि तुम्हारी नीयत अच्छी थी, लेकिन यह बिल्कुल सही नहीं है. यहां छुट्टियां अनिवार्य हैं और तुम इन्हें छोड़ नहीं सकते. तुम्हारे जूनियर तुम्हें देख रहे हैं, अगर वे ऐसा देखेंगे तो सोचेंगे कि समर्पण का मतलब यही होता है.'
इस घटना ने विनोद को झकझोर कर रख दिया. उन्होंने लिखा, 'भारत में इस काम के लिए मुझे 'अत्यधिक समर्पित' कर्मचारी का तमगा मिलता, लेकिन यहां यह एक समस्या बन गया था। उस दिन मेरे भीतर कुछ टूट गया. मुझे समझ आया कि लगातार काम की इस अंधी दौड़ और चिंता ने मुझसे मेरी जिंदगी में चुपचाप क्या-क्या छीन लिया था, और मैं पहली बार फूट-फूट कर रो पड़ा.'
X यूजर का कहना है कि मेरे बॉस ने मुझे जाने से पहले दो काम पूरे करने के लिए कहा
15 years ago, I moved to Norway 🇳🇴... carrying my Indian work ethic - weekend work, skipped lunches, late evenings, and pushing myself even when I was not well.
Then one day, during my early days in Norway, my boss called me in. I thought I was going to be praised.
You replied…
— Vinod (@turiyatman) June 10, 2026
सोशल मीडिया पर 'हसल कल्चर' के खिलाफ फूटा गुस्सा
विनोड की यह पोस्ट वायरल होते ही इंटरनेट पर भारतीय कॉर्पोरेट कंपनियों की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों ने अपनी भड़ास निकालनी शुरू कर दी. एक यूजर ने कमेंट किया, 'इस पोस्ट ने दिल को छू लिया. भारत में आज भी जरूरत से ज्यादा काम करने को समर्पण माना जाता है, जबकि व्यक्तिगत समय की सीमा तय करने को कमजोरी समझा जाता है. नॉर्वे के बॉस ने सिखाया कि असली लीडरशिप बर्नआउट को नहीं, बल्कि कर्मचारियों की भलाई को बढ़ावा देती है..
वहीं, कुछ अन्य यूजर्स ने भारत में तत्काल किसी बड़े बदलाव की उम्मीद पर संदेह जताया. एक यूजर ने लिखा, 'भारत में कॉर्पोरेट शेड्यूल अभी नहीं बदलने वाला. लोग बॉस की नजरों में अच्छा बनने के लिए एक-दूसरे से ज्यादा काम करते रहेंगे. कम से कम यह देखकर खुशी हो रही है कि नॉर्वे में चीजें अलग हैं.'
अत्यधिक काम का मानवीय और मानसिक नुकसान
इस ऑनलाइन बहस के दौरान कई अन्य कर्मचारियों ने भी काम के भारी दबाव से जुड़े अपने कड़वे अनुभव साझा किए। एक पूर्व कर्मचारी ने बताया, "एक दिन मुझे बहुत तेज बुखार था, जब मैंने घर जाने की अनुमति मांगी तो बॉस ने जाने से पहले दो काम पूरे करने को कहा. उसी दिन मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और कंपनी ने मेरी आधे दिन की सैलरी भी काट ली। बात पैसों की नहीं, बल्कि इंसानियत और सम्मान की है."
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरल पोस्ट दुनिया भर में अनिवार्य आराम के नियमों, कॉर्पोरेट पारदर्शिता और काम के घंटों की एक स्वस्थ सीमा तय करने की बढ़ती मांग को रेखांकित करती है. लंबे समय तक बिना आराम के काम करना प्रदर्शन को बेहतर नहीं बनाता, बल्कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 13, 2026 03:37 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

