Balaram Jayanti 2023: कब है बलराम जयंती? जानें इसका महत्व, पूजा-विधि एवं मुहूर्त एवं मंत्र!

प्रतिमा के समक्ष दूध, दही, इत्र, सिंदूर, मिश्री और मौसमी फल अर्पित करें. इसके बाद बलराम जी की कथा सुनें. इसके बाद बलराम जी की आती उतारें.

Balaram Jayanti (Photo Credits: File Photo)

Balaram Jayanti 2023: विष्णु पुराण के अनुसार भाद्रपद माह कृष्ण पक्ष की षष्ठी को विष्णुजी के आठवें अवतार के रूप में बलराम का जन्म हुआ था, इसे बलराम जयंती के रूप में मनाया जाता है. भगवान बलराम श्रीकृष्ण के बड़े भाई थे. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार बलरामजी को आदिशेष के अवतार के रूप में पूजा जाता है, गौरतलब है कि आदिशेष नाग पर विष्णुजी विश्राम करते हैं. बलराम को बलदेव, बलभद्र एवं हलायुध आदि के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन उत्तर भारत में हल षष्ठी अथवा ललही छठ के रूप में व्रत एवं पूजा-अर्चना का विधान है. गुजरात में इसे रंधन छठ कहा जाता है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष 05 सितंबर को बलराम जयंती मनाई जाएगी. आइये जानते हैं, बलराम जयंती के महात्म्य, व्रत, पूजा-विधि, एवं मुहूर्त आदि के बारे में..

बलराम जयंती का महत्व

  हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसारबलराम को आदि शेष का अवतार माना जाता हैजिस पर भगवान विष्णु सोते हैं. भगवान बलराम को वासुदेव और देवकी की सातवीं संतान माना जाता हैजिन्होंने कई राक्षसों का वध किया, बलराम शक्ति और साहस का प्रतीक है, साथ ही मल्ल युद्ध में प्रवीण थे. मान्यता है कि भगवान बलराम की पूजा एवं व्रत आदि करने वाला जातक सदा स्वस्थ जीवन जीने का आशीर्वाद प्राप्त करता है.  

मूल तिथि एवं शुभ मुहूर्त   

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी प्रारंभः 04.41 PM (04 सितंबर 2023, सोमवार) से

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी समाप्तः 03.46 PM (05 सितंबर 2023, मंगलवार) तक

इस तरह उदया तिथि के अनुसार बलराम जयंती 5 सितंबर 2023 को मनाई जाएगी. बलराम जयंती की पूजा सुबह के समय की जाती है.

व्रत एवं पूजा-अनुष्ठान के नियम?

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को प्रातःकाल उठकर स्नान-ध्यान करें, सूर्य को पुष्प-जल अर्पित करें, और व्रत एवं पूजा का संकल्प लें. बलराम की पूजा शुरू करने से पूर्व मंदिर को ताजे फूलों से सजायें. तत्पश्चात बलराम जी की प्रतिमा को पहले पंचामृत से फिर गंगाजल से स्नान कराएं. अब उन्हें नये वस्त्र पहनाएं, एक स्वच्छ चौकी पर लाल अथवा पीला वस्त्र बिछाकर इस पर बलराम जी को स्थापित करें. धूप-दीप प्रज्वलित करें. निम्न मंत्र का जाप करते हुए बलराम को रोली और अक्षत का तिलक लगाएं, एवं पुष्प अर्पित अर्पित करें.

ॐ बलभद्राय नमः

प्रतिमा के समक्ष दूध, दही, इत्र, सिंदूर, मिश्री और मौसमी फल अर्पित करें. इसके बाद बलराम जी की कथा सुनें. इसके बाद बलराम जी की आती उतारें.

बलराम जी के जन्म की पौराणिक कथा

  भागवत पुराण के अनुसार बलराम को विष्णुजी का शेषावतार माना जाता है. भगवान विष्णु का अंश माने जाने वाले शेषनागउनके हर अवतार पर पृथ्वी पर अवतरित होते हैं. विष्णुजी के आठवें अवतार श्री कृष्ण के बड़े भाई के रूप में शेषनाग ने बलराम के रूप में अवतार लिया था. कहते हैं कि एकबार मथुरा नरेश कंस बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को विदा करके ले जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान उसका काल होगी. मृत्यु के भय से कंस ने देवकी और वासुदेव को कारगार में डाल दिया. कंस ने एक-एक कर देवकी-वासुदेव की 6 संतानों की हत्या कर दी, लेकिन सांतवी संतान के रूप में शेषवतार भगवान बलराम गर्भ में स्थापित हुए, तब श्रीहरि ने योग माया से उन्हें माता रोहणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया. उनका जन्म कृष्ण के बड़े भाई के रूप में नंद बाबा के यहां हुआ. बलराम मल्लयुद्धकुश्ती और गदा युद्ध में पारंगत थे तथा हमेशा हल धारण करते थे. इसलिए उन्हे हलधर भी कहा जाता है. इनके जन्म को हल षष्ठी के रूप में मनाया जाता है.

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