नई दिल्ली: भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (Drug Controller General of India) (DCGI) ने ताकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स (Takeda Biopharmaceuticals) की डेंगू रोधी वैक्सीन 'क्यूडेंगा' (QDENGA / TAK-003) को भारत में आधिकारिक बाजार मंजूरी (Market Authorisation) दे दी है.
यह निर्णय भारत की पहली डेंगू वैक्सीन के आगमन का प्रतीक है. वैश्विक स्तर पर डेंगू के कुल मामलों का एक बड़ा हिस्सा भारत में दर्ज किया जाता है, ऐसे में यह मंजूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. यह भी पढ़ें: FSSAI Advisory: खाने-पीने की चीजों को अखबार में पैक करने या परोसने पर लगी रोक, FSSAI ने स्वास्थ्य के लिए बताया गंभीर खतरा
क्या है क्यूडेंगा (QDENGA) वैक्सीन?
क्यूडेंगा एक 'लाइव-अटेन्युएटेड टेट्रावेलेंट' (Live-attenuated Tetravalent) वैक्सीन है, जिसे जापानी दवा निर्माता कंपनी ताकेडा द्वारा तैयार किया गया है. इसे डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप—DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4—से सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है.
- पात्रता: यह वैक्सीन 4 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की आयु के व्यक्तियों के लिए स्वीकृत की गई है.
- खुराक (Dose): इसे 5 मि.ली. की दो खुराकों (Injections) में त्वचा के नीचे (Subcutaneously) दिया जाता है. दूसरी खुराक पहली खुराक के 3 महीने बाद दी जाती है.
- पूर्व जांच की आवश्यकता नहीं: क्यूडेंगा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं, यह जांचे बिना दिया जा सकता है. इसके लिए प्री-वैक्सीनेशन ब्लड स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं होती.
यह वैक्सीन शरीर में कैसे काम करती है?
क्यूडेंगा की संरचना डेंगू वायरस सीरोटाइप-2 (DENV-2) के कमजोर (Attenuated) स्ट्रेन के जेनेटिक बैकबोन पर आधारित है. रीकॉम्बीनेंट डीएनए (Recombinant DNA) तकनीक के जरिए अन्य तीन सीरोटाइप्स (1, 3 और 4) के सरफेस प्रोटीन्स को इस DENV-2 बैकबोन पर इंजीनियर किया गया है.
जब यह वैक्सीन दी जाती है, तो यह बिना कोई गंभीर बीमारी पैदा किए शरीर के भीतर एक प्राकृतिक संक्रमण की नकल करती है. इससे मानव प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) सक्रिय हो जाती है और चारों सीरोटाइप्स के खिलाफ एंटीबॉडीज व कोशिकीय सुरक्षा (Cell-mediated defence) का निर्माण करती है, जो भविष्य में होने वाले गंभीर डेंगू संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को रोकती है.
क्लीनिकल ट्रायल और प्रभावकारिता (Efficacy)
DCGI की यह मंजूरी वैश्विक और भारतीय दोनों स्तरों पर किए गए व्यापक क्लीनिकल ट्रायल्स के आधार पर दी गई है. वैश्विक स्तर पर 8 डेंगू-प्रभावित देशों में 20,000 से अधिक प्रतिभागियों पर किए गए फेज़-3 TIDES ट्रायल में वैक्सीन के प्रभावी और सुरक्षित होने की पुष्टि हुई.
ट्रायल के आंकड़ों के अनुसार:
- दूसरी खुराक के 12 महीने बाद डेंगू संक्रमण रोकने में यह वैक्सीन 2% प्रभावी पाई गई।
- डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के मामलों को रोकने में इसकी प्रभावकारिता 84% से 90% तक दर्ज की गई.
- भारत में भी 4 से 60 वर्ष के आयु वर्ग पर फेज़-3 (DEN-302) ट्रायल आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय प्रतिभागियों में इसके सुरक्षित और मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स की पुष्टि हुई.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मान्यता और आगे की योजना
क्यूडेंगा को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्री-क्वालिफिकेशन प्राप्त हो चुकी है और इसे दुनिया के 43 से अधिक देशों (यूरोप, ब्रिटेन, ब्राजील, इंडोनेशिया आदि) में मंजूरी मिल चुकी है.
वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि यह वैक्सीन डेंगू के खिलाफ एक बड़ा हथियार है, लेकिन यह मच्छरों के नियंत्रण, स्वच्छता अभियान और सामुदायिक जागरूकता जैसे मौजूदा उपायों का विकल्प नहीं है, बल्कि उनके पूरक के रूप में काम करेगी. ताकेडा कंपनी भारत में इसकी व्यावसायिक उपलब्धता और सप्लाई के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है.













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