Vasu Baras 2025 Greetings: शुभ वसु बारस! इन मनमोहक WhatsApp Status, HD Images, Photo Wishes, Wallpapers के जरिए दें बधाई
ऐसी मान्यता है कि गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए गौ माता की पूजा की जाती है. श्रीकृष्ण भी स्वंय गाय की सेवा करते थे, क्योंकि उन्हें गौ माता अतिप्रिय है. कहा जाता है कि गौ-भक्ति और गौ-सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है. वसु बारस के दिन आप इन मनमोहक ग्रीटिंग्स, वॉट्सऐप स्टेटस, एचडी इमेजेस, फोटो विशेज, वॉलपेपर्स के जरिए अपनों को बधाई दे सकते हैं.
Vasu Baras 2025 Greetings in Hindi: पांच दिवसीय दिवाली (Diwali) उत्सव का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस (Dhanteras) से होती है, लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले यानि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को गौ माता को समर्पित गोवत्स द्वादशी (Gowatsa Dwadashi) का पर्व मनाया जाता है. इस साल 17 अक्टूबर 2025 को गोवत्स द्वादशी मनाई जा रही है. देश के विभिन्न हिस्सों में गोवत्स द्वादशी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इस पर्व को महाराष्ट्र में वसु बारस (Vasu Baras), गुजरात में बाघ बारस (Vagh Baras) या बछ बारस (Bach Baras) के नाम से जाना जाता है, जबकि आंध्र प्रदेश में इसे श्रीपाद श्री वल्लभ (Sripada Sri Vallabha) के श्रीपाद वल्लभ आराधना उत्सव (Sripada Vallabha Aradhana Utsav) के तौर पर मनाया जाता है. गोवत्स द्वादशी यानी वसु बारस के दिन गाय और बछड़ों को सजाकर उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उनके प्रति सम्मान जाहिर किया जाता है. इस दिन पवित्र पशु को चना और अंकुरित मूंग जैसी कई चीजें खिलाई जाती हैं,
ऐसी मान्यता है कि गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए गौ माता की पूजा की जाती है. श्रीकृष्ण भी स्वंय गाय की सेवा करते थे, क्योंकि उन्हें गौ माता अतिप्रिय है. कहा जाता है कि गौ-भक्ति और गौ-सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है. वसु बारस के दिन आप इन मनमोहक ग्रीटिंग्स, वॉट्सऐप स्टेटस, एचडी इमेजेस, फोटो विशेज, वॉलपेपर्स के जरिए अपनों को बधाई दे सकते हैं.
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, गौ माता के पूजन से सिर्फ देवी-देवता ही प्रसन्न नहीं होते हैं, बल्कि इससे पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है, इसलिए गोवत्स द्वादशी पर गौ माता की पूजा कर उनके प्रति सम्मान जाहिर किया जाता है. भविष्य पुराण के मुताबिक, गाय के पृष्ठदेश में ब्रह्मा, गले में विष्णु, मुख में रुद्र, मध्य में समस्त देवी-देवता, रोमकूपों में महर्षिगण, पूंछ में अनंत नाग, खूरों में सभी पर्वत, नेत्रों में सूर्य-चंद्र, गौमूत्र में सभी पवित्र नदियों का वास माना जाता है. ऐसे में इस दिन गाय और बछड़े की पूजा व सेवा से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है.