Shani Jayanti 2025 Messages: हैप्पी शनि जयंती! इन हिंदी WhatsApp Wishes, Quotes, GIF Greetings के जरिए दें अपनों को बधाई
शनि जयंती के दिन कुंडली में शनि दोष, शनि की साढ़े साती, ढैय्या इत्यादि से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं. इसके साथ ही मंदिरों में उनके लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं और शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान भी किया जाता है. ऐसे में इस बेहद खास अवसर पर आप इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, कोट्स, जीआईएफ ग्रीटिंग्स को अपनों संग शेयर कर उन्हें हैप्पी शनि जयंती कह सकते हैं.
Shani Jayanti 2025 Messages in Hindi: कर्मफलदाता और न्याय के देवता शनिदेव (Shani Dev) की आज (27 मई 2025) देशभर में जयंती मनाई जा रही है. शनिदेव की पूजा-अर्चना करने के लिए तमाम शनि मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि जयंती (Shani Jayanti) का पर्व मनाया जाता है, जिसे शनैश्चर जयंती भी कहा जाता है. कहा जाता है कि शनि जयंती के दिन किए गए पूजा-पाठ और उपायों को करने से शनिदेव अपने भक्तों की प्रसन्न होते हैं और उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं. यही वजह है कि सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि शनिदेव के कुपित होने से राजा भी रंक बन जाता है और जब वो प्रसन्न होते हैं तो रंक को भी राजा बना देते हैं.
शनि जयंती के दिन कुंडली में शनि दोष, शनि की साढ़े साती, ढैय्या इत्यादि से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं. इसके साथ ही मंदिरों में उनके लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं और शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान भी किया जाता है. ऐसे में इस बेहद खास अवसर पर आप इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, कोट्स, जीआईएफ ग्रीटिंग्स को अपनों संग शेयर कर उन्हें हैप्पी शनि जयंती कह सकते हैं.
शनि जयंती यानी शनिदेव के जन्मोत्सव के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर शनिदेव को स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें. इसके बाद एक चौकी पर काले रंग का कपड़ा बिछाकर उनकी प्रतिमा स्थापित करते हुए उन्हें पंचगव्य या पंचामृत से स्नान कराएं, फिर नीले फूल, काले तिल, काली उड़द, श्रीफल अर्पित करते हुए धूप-दीप प्रज्जवलित करें. पूजन के दौरान शनिदेव के मंत्रों का जप और शनि चालीसा का पाठ करें, फिर किसी मंदिर में जाकर शनिदेव को तेल अर्पित करें और पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्जवलित करें. मान्यता है कि शनि जयंती के दिन शनिदेव की पूजा करने से कई गुना ज्यादा फल मिलता है.