Shab E Barat Mubarak In Urdu: इबादत की रात और उर्दू शायरी के जरिए भावनाओं का इजहार; जानें इसका महत्व
shab e barat mubarak in urdu text

Shab E Barat Mubarak In Urdu: इस्लामी कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की 15वीं रात को 'शब-ए-बरात' के रूप में मनाया जाता है. साल 2026 में यह रात फरवरी के शुरुआती सप्ताह में पड़ रही है. मुस्लिम समुदाय के लिए यह रात इबादत, तौबा और अपनों की मगफिरत की दुआ करने का वक्त होता है. इस मौके पर जहाँ मस्जिदों और घरों में रात भर नमाज और कुरान ख्वानी होती है, वहीं लोग उर्दू शायरी और साहित्यिक पैगामों के जरिए एक-दूसरे से माफी माँगते हैं और नेक तमन्नाओं का इजहार करते हैं.

शब-ए-बरात का धार्मिक महत्व

शब-ए-बरात का अर्थ है 'मुक्ति की रात'. मान्यता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के पूरे साल के कर्मों का हिसाब देखता है और आने वाले साल के लिए उनकी तकदीर लिखता है. इसे 'बजट की रात' भी कहा जाता है, जिसमें जीवन, मृत्यु और रिज्क (रोजी) के फैसले होते हैं. मुस्लिम धर्मावलंबी इस रात को कब्रिस्तानों में जाकर अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातिहा पढ़ते हैं और उनके लिए जन्नत की दुआ करते हैं.

उर्दू शायरी और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति

उर्दू शायरी हमेशा से ही भावनाओं को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम रही है. शब-ए-बरात के मौके पर शायरी का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि रूहानियत और माफी माँगने के लिए किया जाता है. लोग अक्सर ऐसी पंक्तियाँ साझा करते हैं जिनमें विनम्रता और सुधार की गुंजाइश झलकती है.

लोकप्रिय शायरी का एक उदाहरण: "रहमतों की है यह रात, नमाजों का रखना साथ. मनवा लेना खुदा से हर बात, दुआओं में रखना याद."

"नसीब बन जाएगा, खुद पर यकीन रखना. दुआओं में बस उस खुदा को करीब रखना. हो गई हो अनजाने में कोई खता अगर, शब-ए-बरात की इस रात हमें माफ रखना."

"रात को नया चांद मुबारक, चांद को चांदनी मुबारक. फलक को सितारे मुबारक, और आपको हमारी तरफ से शब-ए-बरात मुबारक."

"रहमतों की आई है ये रात, दुआओं में रखना हमें भी याद. खुदा कबूल करे हर इबादत आपकी, यही है हमारी तरफ से आपको मुबारकबाद."

"या अल्लाह! इस रात में हमारी हर खता माफ फरमा. हमें नेक रास्ते पर चलने की हिदायत अता फरमा. जो चले गए हैं इस दुनिया से, उन सबकी मगफिरत (मोक्ष) फरमा."

शायरी के इन अंशों में अक्सर खुदा की रहमत और इंसान की तौबा (पछतावा) का जिक्र होता है, जो इस रात की संजीदगी को और बढ़ा देता है.

डिजिटल दौर में माफी का चलन

सोशल मीडिया के दौर में शब-ए-बरात पर 'माफी' माँगने का चलन काफी बढ़ गया है. फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर लोग उर्दू शायरी वाले कार्ड्स और स्टेटस लगाते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि यदि अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो इस पाक रात के आने से पहले गिले-शिकवे दूर कर लिए जाएं. हालांकि, उलेमा (धर्मगुरु) अक्सर सलाह देते हैं कि दिखावे से बचकर दिल से इबादत पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

बदलते समय के साथ उत्सव के तरीके

पहले के समय में इस रात आतिशबाजी का चलन था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मुस्लिम समाज के भीतर जागरूकता बढ़ी है. अब लोग आतिशबाजी और फिजूलखर्ची के बजाय गरीबों को खाना खिलाने, दान (सदका) देने और मस्जिदों में शांति के साथ इबादत करने को प्राथमिकता दे रहे हैं. प्रदूषण और सुरक्षा कारणों से भी प्रशासन द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की जाती है.