Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026 Quotes: लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती आज, अपनों को भेजें सादगी और निष्ठा के प्रतीक शास्त्री जी के 10 प्रेरक विचार
सादगी, ईमानदारी और अदम्य साहस के प्रतीक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को मनाई जा रही है. इस अवसर पर लोग उनके शुचिता और कर्तव्यपरायणता से भरे 10 प्रमुख प्रेरक विचारों को साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026 Quotes in Hindi: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रिम पंक्ति के सेनानी और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) की याद में 2 अक्टूबर को पूरा देश उनकी 122वीं जयंती मनाने जा रहा है. महात्मा गांधी के जन्मदिवस के साथ ही पड़ने वाला यह दिन भारत के दो महान विचारकों और नेताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है.
पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 9 जून 1964 को जब शास्त्री जी ने प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला, तब देश गंभीर खाद्यान्न संकट और बाहरी सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा था. महज करीब 18 महीने के संक्षिप्त कार्यकाल में उन्होंने अपने दृढ़ नेतृत्व से भारत को आत्मनिर्भरता और सैन्य मजबूती का मार्ग दिखाया.
शास्त्री जयंती पर साझा करने योग्य 10 अनमोल विचार
शास्त्री जी के विचार आज भी शासन, समाज और व्यक्तिगत जीवन के लिए मार्गदर्शक हैं:










- "जय जवान, जय किसान."
- "सच्चा लोकतंत्र या जनता का स्वराज कभी भी असत्य और हिंसक साधनों से हासिल नहीं किया जा सकता."
- "हम सिर्फ अपने देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखते हैं."
- "देश की रक्षा केवल सैनिकों का काम नहीं है, इसके लिए पूरे राष्ट्र को मजबूत और एकजुट होना पड़ेगा."
- "कानून का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि हमारे लोकतंत्र की बुनियादी संरचना सुरक्षित और मजबूत बनी रहे."
- "अनुशासन और निष्ठा ही किसी देश को आगे ले जाने वाली सबसे बड़ी ताकत होती है."
- "हमारी ताकत और स्थिरता हमारे सिद्धांतों और मूल्यों की मजबूती पर निर्भर करती है."
- "यदि कोई व्यक्ति ऐसा महसूस करता है कि वह असहाय है, तो यह केवल उसके मन का भ्रम है; आत्मविश्वास सबसे बड़ी ताकत है."
- "आर्थिक मुद्दे हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं, और यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने सबसे बड़े दुश्मन—गरीबी और बेरोजगारी से लड़ें."
- "जो लोग शासन करते हैं, उन्हें यह देखना चाहिए कि लोग प्रशासन पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं; अंततः जनता ही अंतिम निर्णायक होती है."
स्वतंत्रता संग्राम और सादगी की मिसाल: न निजी घर, न संपत्ति
शास्त्री जी का जीवन सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और त्याग का दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत करता है:
- असहयोग आंदोलन में भागीदारी: उन्होंने महज 16 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़कर महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया. 17 वर्ष की आयु में उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया, लेकिन नाबालिग होने के कारण रिहा कर दिया गया.
- नैतिक जीवन शैली: देश के शीर्ष पद पर रहने के बावजूद उनके पास न तो कोई निजी मकान था और न ही कोई चल-अचल संपत्ति. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई बार जेल जाने के बावजूद उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और नियमों से समझौता नहीं किया.
1965 का युद्ध, भुखमरी का संकट और 'जय जवान, जय किसान'
शास्त्री जी के कार्यकाल की सबसे बड़ी परीक्षा 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध था:
- सैन्य मोर्चे पर खुली छूट: युद्ध के दौरान उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों को आवश्यक रणनीतिक फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता दी, जिसके चलते भारतीय सेना ने लाहौर सेक्टर तक पहुंचकर पाकिस्तान को पीछे धकेल दिया.
- उपवास की अपील: देश में उस समय भीषण सूखे के कारण अनाज की गंभीर किल्लत थी. देश को आत्मनिर्भर बनाने और स्वाभिमान जगाने के लिए उन्होंने देशवासियों से सप्ताह में एक समय का उपवास रखने की अपील की, जिसे उन्होंने सबसे पहले अपने घर पर लागू किया.
- अमर नारा: सीमा पर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों और खेतों में अन्न उगाने वाले अन्नदाताओं के सम्मान में उन्होंने 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया, जो आज भी भारतीय समाज की धड़कन बना हुआ है.
ताशकंद समझौता और असामयिक निधन का अनसुलझा सवाल
युद्ध विराम के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने के लिए तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद में शांति वार्ता आयोजित की गई थी:
- ताशकंद समझौता: 10 जनवरी 1966 को शास्त्री जी ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ ताशकंद घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए.
- 11 जनवरी 1966 की रात: समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ ही घंटों बाद देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में उनका निधन हो गया. आधिकारिक तौर पर मौत की वजह दिल का दौरा (हार्ट अटैक) बताई गई.
- हालांकि, पार्थिव शरीर पर नीले निशान होने के दावों और पोस्टमॉर्टम न कराए जाने को लेकर कई सवाल उठे. बाद में गठित राजनारायण जांच समिति के बावजूद आज भी उनकी मृत्यु से जुड़े कई पहलुओं पर ऐतिहासिक विमर्श जारी रहता है.
नई दिल्ली स्थित उनके समाधि स्थल 'विजय घाट' पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विभिन्न दलों के प्रतिनिधि श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, वहीं देशभर के शिक्षण संस्थानों में उनके जीवन और राष्ट्रसेवा पर विशेष परिचर्चाएं आयोजित की जा रही हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 02, 2026 07:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

