त्योहार

Kamika Ekadashi 2026: तिथि, व्रत नियम, पूजा विधि और पारण मुहूर्त

कामिका एकादशी 2026 रविवार, 9 अगस्त को है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में कामिका एकादशी की सही तिथि, भगवान विष्णु की पूजा विधि, व्रत के नियम (क्या खाएं और क्या न खाएं), महत्व और पारण का शुभ मुहूर्त (10 अगस्त, सुबह 05:47 से 08:00 बजे) जानें। यह व्रत सभी पापों से मुक्ति और मोक्ष दिलाता है।.

Kamika Ekadashi 2026: तिथि, व्रत नियम, पूजा विधि और पारण मुहूर्त

सावन का पवित्र महीना चल रहा है और ऐसे में भगवान शिव के साथ श्री हरि विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। इस माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह चातुर्मास की पहली एकादशी होती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखने से व्यक्ति को जाने-अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कामिका एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में कामिका एकादशी रविवार, 9 अगस्त को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि का आरंभ 8 अगस्त 2026 को दोपहर 01:59 बजे (IST, नई दिल्ली) होगा और इसका समापन 9 अगस्त 2026 को सुबह 11:04 बजे (IST, नई दिल्ली) होगा। व्रत का पारण अगले दिन यानी सोमवार, 10 अगस्त 2026 को किया जाएगा। पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 05:47 बजे से 08:00 बजे (IST, नई दिल्ली) तक रहेगा।

कामिका एकादशी का महत्व

हिंदू धर्मग्रंथों में कामिका एकादशी का बड़ा महत्व बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों से भी मुक्ति मिल जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की भक्तिपूर्वक पूजा करने से गंगा स्नान या अश्वमेध यज्ञ करने के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है और घर में सुख-शांति व समृद्धि लाता है। भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद यह श्रीहरि की पूजा का पहला पर्व होता है, जिससे आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पूजा विधि और नियम

कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने का विधान है।

व्रत संकल्प और पूजा:

  1. प्रातःकाल स्नान: एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (हो सके तो पीले रंग के) धारण करें।
  2. संकल्प: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर हाथ में जल और अक्षत लेकर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  3. भगवान की स्थापना: पूजा स्थान पर चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  4. अभिषेक और अर्पण: भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराएं। फिर उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, चंदन, गोपी चंदन का तिलक लगाएं। पंजीरी, फल, मिठाई और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शकर का मिश्रण) का भोग लगाएं। विशेष रूप से तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, क्योंकि इसके बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते।
  5. मंत्र जाप और कथा: धूप-दीप जलाकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। विष्णु सहस्त्रनाम या भागवत कथा का पाठ भी कर सकते हैं। कामिका एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  6. तुलसी पूजन: इस दिन तुलसी माता के समक्ष घी का दीपक जलाना और उनका पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  7. रात्रि जागरण: संभव हो तो रात के समय भगवान के भजन गाते हुए जागरण करें।

कामिका एकादशी: क्या करें और क्या न करें

क्या करें (Dos) क्या न करें (Don'ts)
आहार: दूध, दही, फल, शरबत, साबूदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक, मखाना, पनीर, ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें। आहार: अनाज (विशेषकर चावल), दालें, गेहूं, जौ, सामान्य नमक, प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा, बाहर का तला-भुना भोजन, बैंगन, मूली, सहजन, गोभी, पालक का सेवन न करें।
व्रत: अपनी क्षमतानुसार निर्जला या फलाहारी व्रत रखें। व्यवहार: दिन में सोना, क्रोध करना, निंदा करना, किसी से विवाद या झगड़ा करना, नशा करना, नकारात्मक विचार लाना वर्जित है।
पवित्रता: मन और तन से पवित्रता बनाए रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें। अन्य: वृक्ष से पत्ता न तोड़ें (विशेषकर तुलसी का, गिरे हुए पत्ते उपयोग करें)। व्रत का पारण निर्धारित मुहूर्त से बाहर न करें।
दान: अपनी क्षमतानुसार अन्न, फल, वस्त्र, घी, तिल और धन का दान करें।

पारण विधि

व्रत का पारण द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद और पारण मुहूर्त के भीतर ही करें। पारण के लिए सबसे पहले कुछ सात्विक भोजन जैसे अनाज (चावल) ग्रहण कर सकते हैं। व्रत के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए भगवान विष्णु से क्षमा याचना करें।

कामिका एकादशी का यह पावन पर्व भक्तों को भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन को पवित्र बनाने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन सच्ची श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए व्रत करने से आध्यात्मिक शांति और लौकिक सुख दोनों की प्राप्ति होती है।

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 08, 2026 06:53 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).