Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026 Wishes: लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती, शेयर करें ये हिंदी WhatsApp Messages, Facebook Greetings और Quotes
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री और सादगी व ईमानदारी के प्रतीक लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को देशभर में मनाई जा रही है. इस अवसर पर नागरिक बापू के साथ-साथ शास्त्री जी के उच्च आदर्शों, शुचिता और राष्ट्रभक्ति से जुड़े विचारों व संदेशों को सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से साझा कर रहे हैं.
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026 Wishes in Hindi: देश को आत्मनिर्भरता और नैतिक नेतृत्व का पाठ पढ़ाने वाले स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) की याद में 2 अक्टूबर को पूरा देश उनकी 122वीं जयंती मना रहा है.
शास्त्री जी का संपूर्ण जीवन 'सादा जीवन, उच्च विचार' की मिसाल रहा. वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उनका दृढ़ नेतृत्व और देश को खाद्यान्न संकट से उबारने के लिए दिया गया 'जय जवान, जय किसान' का नारा आज भी भारतीय जनमानस और राष्ट्रीय नीतियों के केंद्र में बना हुआ है.
शास्त्री जयंती पर साझा करने योग्य प्रेरक विचार और संदेश
शास्त्री जयंती के अवसर पर लोग उनके सिद्धांतों और विचारों को याद करते हुए संदेश भेज रहे हैं:





- "जय जवान, जय किसान."
- "सच्चा लोकतंत्र या राष्ट्र का स्वराज कभी भी असत्य और हिंसक साधनों से हासिल नहीं किया जा सकता."
- "हम सिर्फ अपने देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखते हैं."
- "कानून का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि हमारे लोकतंत्र की बुनियादी संरचना सुरक्षित रहे और मजबूत बने."
- शुभकामना संदेश: "सादगी, सत्यनिष्ठा और अदम्य साहस के प्रतीक, भारत के गौरव पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन."
मुगलसराय से प्रधानमंत्री पद तक का प्रेरक सफर
शास्त्री जी का जीवन संघर्ष और मूल्यों पर अडिग रहने की यात्रा रहा है:
- जन्म एवं प्रारंभिक जीवन: लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय (वाराणसी के निकट) में हुआ था। कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त करने वाले शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से 'शास्त्री' की उपाधि प्राप्त की थी.
- स्वतंत्रता संग्राम में योगदान: महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर वे महज 16 वर्ष की आयु में असहयोग आंदोलन में कूद पड़े. उन्होंने सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और कुल मिलाकर करीब नौ साल जेल में बिताए.
- जेल की नैतिकता का किस्सा: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल में रहते हुए जब उनकी पत्नी ललिता शास्त्री नियम विरुद्ध तरीके से दो आम छिपाकर उनसे मिलने लाईं, तो उन्होंने इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए खाने से इनकार कर दिया था और व्यवस्था के प्रति अनुशासन का कड़ा संदेश दिया था.
1965 का युद्ध और 'जय जवान, जय किसान' का आह्वान
जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 1964 में शास्त्री जी ने देश की कमान संभाली। उनका कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन उनके फैसलों ने देश को दिशा दी:
- युद्ध का कुशल नेतृत्व: वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने सेना को पूर्ण अधिकार देकर देश की सुरक्षा को प्राथमिकता दी.
- उपवास की ऐतिहासिक अपील: देश में उस समय भीषण सूखा और अनाज की कमी थी. उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे सप्ताह में एक दिन एक समय का उपवास रखें। इस अपील को लागू करने से पहले उन्होंने स्वयं अपने परिवार में इसे आजमाया था.
- हरित और श्वेत क्रांति की नींव: किसानों के सम्मान और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और कृषि सुधारों की रूपरेखा को प्रोत्साहन दिया.
ताशकंद समझौता और अंतिम समय
युद्ध विराम के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने के लिए 10 जनवरी 1966 को तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद (वर्तमान उज्बेकिस्तान) में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए:
- ऐतिहासिक ताशकंद समझौते के कुछ ही घंटों बाद, 11 जनवरी 1966 को दिल का दौरा पड़ने से उनका असामयिक निधन हो गया.
- देश के लिए उनके अप्रतिम योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.
नई दिल्ली स्थित उनके समाधि स्थल 'विजय घाट' पर सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभाओं के अलावा, देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में उनके जीवन और राष्ट्रसेवा पर आधारित विशेष व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 01, 2026 03:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

