Kaal Bhairav Jayanti 2025 Messages: हैप्पी काल भैरव जयंती! प्रियजनों संग शेयर करें ये हिंदी WhatsApp Wishes, GIF Greetings और Quotes
काल भैरव जयंती के दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति, मन की शांति, और साहस प्राप्त होता है. ऐसा माना जाता है कि उनकी कृपा से जीवन में धन, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है. इस दिन शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता है. ऐसे में आप भी इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स, कोट्स के जरिए अपनों से हैप्पी काल भैरव जयंती कह सकते हैं.
Kaal Bhairav Jayanti 2025 Messages in Hindi: काल भैरव जयंती (Kaal Bhairav Jayanti) के दिन भगवान शिव (Bhagwan Shiv) के उग्र और रौद्र स्वरूप काल भैरव (Kaal Bhairav) की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस पर्व को भैरव जयंती, काल भैरव अष्टमी और कालाष्टमी की नाम से जाना जाता है, जिसका हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व बताया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती मनाई जाती है. भगवान भैरव को दंडपाणि भी कहा जाता है. उनका वाहन कुत्ता है, इसलिए उन्हें कुत्ते की सवारी करने वाले देवता की रूप में भी जाना जाता है. इस साल 12 नवंबर 2025 को काल भैरव जयंती मनाई जा रही है. प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने काल भैरव के रूप में अवतार लिया था. ऐसे में इस तिथि पर उनकी पूजा करने से साधक को भय, पाप और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है.
काल भैरव जयंती के दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति, मन की शांति और साहस प्राप्त होता है. ऐसा माना जाता है कि उनकी कृपा से जीवन में धन, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है. इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करने के अलावा शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता है. ऐसे में आप भी इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स, कोट्स के जरिए अपनों से हैप्पी काल भैरव जयंती कह सकते हैं.




5- इस काल भैरव जयंती, आप पर सुरक्षा और सकारात्मकता की वर्षा हो.
भगवान काल भैरव का आशीर्वाद आज और सदैव आप पर बना रहे.

प्रचलित पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महादेव में श्रेष्ठता को लेकर वाद-विवाद हुआ, तब ब्रह्मा द्वारा कही गई एक कटु बात से शिव क्रोधित हो गए. अपने क्रोध से उन्होंने भैरव को उत्पन्न किया और आदेश दिया कि ब्रह्मा के पांच सिरों में से एक को काट दें. भगवान शिव की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान भैरव ने ब्रह्मा जी का एक मस्तक काट दिया. इस कारण भैरव पर ब्रह्महत्या का दोष लग गया. ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए वे काशी पहुंचे, तब उनका पाप समाप्त हुआ. आज भी वाराणसी में काल भैरव का प्राचीन मंदिर स्थित है, जहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 12, 2025 06:30 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

