Govatsa Dwadashi 2025 Wishes In Hindi: पांच दिवसीय दिवाली उत्सव की शुरुआत से पहले मनाए जाने वाले गोवत्स द्वादशी (Govatsa Dwadashi) के पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को गोवत्स द्वादशी मनाई जाती है. इस साल 17 अक्टूबर 2025 को यह पर्व मनाया जा रहा है. इस पर्व को देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नामों से जाना जाता है. महाराष्ट्र में जहां इसे वसु बारस (Vasu Baras) के नाम से जाना जाता है तो वहीं गुजरात में गोवत्स द्वादशी को बाघ बारस (Vagh Baras) या बछ बारस (Bach Baras) कहा जाता है, जबकि आंध्र प्रदेश में इसे श्रीपाद श्री वल्लभ (Sripada Sri Vallabha) के श्रीपाद वल्लभ आराधना उत्सव (Sripada Vallabha Aradhana Utsav) के तौर पर मनाया जाता है. यहां इसे नंदिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए इस दिन लोग नंदी और नंदिनी को अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं, जिन्हें शैव परंपरा में बेहद पवित्र माना जाता है. नंदिनी व्रत पृथ्वी पर मानव जीवन को बनाए रखने में गौ माता के योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने का खास दिन है.
धनतेरस से एक दिन पहले मनाए जाने वाले गोवत्स द्वादशी पर्व के दिन लोग गायों और उनके बछड़ों को कपड़े व आभूषण से सजाते हैं, फिर माथे पर तिलक लगाकर उनकी पूजा करते हैं. इसके साथ ही उनके प्रति प्यार और सम्मान जाहिर किया जाता है. ऐसे में इस बेहद खास अवसर पर आप इन हिंदी विशेज, कोट्स, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए अपनों को गोवत्स द्वादशी की शुभकामनाएं दे सकते हैं.





सनातन धर्म में गौ माता को बेहद पवित्र और पूजनीय माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए उनकी पूजा की जाती है. भविष्य पुराण के मुताबिक, गाय के पृष्ठदेश में ब्रह्मा, गले में विष्णु, मुख में रुद्र, मध्य में समस्त देवी-देवता, रोमकूपों में महर्षिगण, पूंछ में अनंत नाग, खूरों में सभी पर्वत, नेत्रों में सूर्य-चंद्र, गौमूत्र में सभी पवित्र नदियों का वास माना जाता है. इतना ही नहीं भगवान श्रीकृष्ण को भी गौ माता अत्यंत प्रिय थीं, इसलिए वे स्वयं गायों की सेवा भी करते थे. कहा जाता है कि गौ माता के पूजन से सिर्फ देवी-देवता ही प्रसन्न नहीं होते हैं, बल्कि इससे पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है.













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