Eid-e-Milad-un-Nabi 2021: कब है मिलाद-उन-नबी? जानें क्यों और कैसे मनाया जाता है यह पर्व?

इस्लाम धर्म के अनुयायी पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिन को ईद-ए-मिलाद उन नबी अथवा ईद-ए-मिलाद के नाम से मनाते हैं. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक ये पर्व तीसरे महीने रबि-उल-अव्वल के बारहवें दिन मनाया जाता है. इसकी सही तिथि को लेकर लोगों में काफी दुविधा है.

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी 2021(Photo Credits: File Image)

इस्लाम धर्म के अनुयायी पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिन को ईद-ए-मिलाद उन नबी अथवा ईद-ए-मिलाद के नाम से मनाते हैं. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक ये पर्व तीसरे महीने रबि-उल-अव्वल के बारहवें दिन मनाया जाता है. इसकी सही तिथि को लेकर लोगों में काफी दुविधा है. इस वर्ष ईद-ए-मिलाद 19 अक्टूबर 2021 को मनाया जायेगा. भारत में यह पर्व 8 अक्टूबर 2021 से रबि-उल-अव्वल महीना शुरु हो चुका है. पैगंबर मोहम्मद साहब की याद में इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग जुलूस निकालते हैं, लेकिन इस वर्ष कोरोना के कारण किसी भी प्रकार का जुलूस निकाल पाना संभव नहीं लग रहा है.

क्या है मिलाद-उन-नबी?

मिलाद-उन-नबी वस्तुतः अरबी शब्द है. यह पर्व इस्लाम के आखरी पैगंबर हज़रत मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्म-दिन से संबद्ध है. इस्लाम धर्म के अनुसार इनका जन्म 8 जून, 570 ई के दिन मक्का (सऊदी अरब) में हुआ था. इनके पिता का नाम अब्दुल्लाह एवं माँ का नाम बीबी आमीना है. 62 वर्ष की उम्र में 8 जून 632 ई. को इनका इंतकाल मदीना, सऊदी अरब में हुआ था. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इनका जन्म एवं इंतकाल दोनों 8 जून के दिन हुआ था. मुस्लिम धर्म के अनुयायियों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. इस दिन मुस्लिम समुदाय पैगंबर मोहम्मद उपदेशों को याद करते हैं, और उनके बताये रास्तों पर चलने का संकल्प लेते हैं.

ईद-मिलाद-उन-नबी का महत्व!

मुस्लिम समाज से जुड़े मौलवियों का कहना है कि मोहम्मद साहब ने अपने उपदेशों के जरिये इस्लामिक समाज में फैली बुराइयों को खत्म कर ईमान, नेकी और शांति से जीवन जीने का सुझाव दिया है. पैगंबर हजरत मोहम्मद आखिरी उपदेशक एवं सबसे महान नबी माने जाते हैं, कहते हैं कि उन्हें स्वयं अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रईल द्वारा कुरान का सन्देश दिया था. इसलिए मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश सारी दुनिया के मुसलमानों के लिए बेहद खास मानी जाती है. हांलाकि ईद-मिलाद-उन-नबी को लेकर मुस्लिम समाज के दो प्रमुख घटक शिया और सुन्नियोंं में इस दिन को लेकर विभिन्न मत हैं लेकिन इस पर्व को सभी धूमधाम के साथ सेलिब्रेट करते हैं. यह भी पढ़ें : उत्तर प्रदेश से ईरान के लिए समुद्री मार्ग द्वारा केले निर्यात किए जाएंगे

कैसे मनाते हैं ईद-मिलाद-उन-नबी?

ईद-मिलाद-उन-नबी के दिन मुस्लिम समुदाय रात भर प्रार्थनाएं करते हैं. पैगंबर मोहम्मद के प्रतीकात्मक पैरों के निशान पर प्रार्थना की जाती है. मो. साहब की शान में जुलूस निकाले जाते हैं. इसी दिन पैगंबर मोहम्मद साहब के उपदेश पढ़े जाते हैं. इसी रात इस्लाम का पाक ग्रंथ कुरान भी पढ़ा जाता है. दुनिया भर के भारी तादाद में मुसलमान मक्का मदीना और दूसरे दरगाहों पर जाते हैं. मान्यता है कि इन दिनों इस्लाम धर्म के अनुरूप नियम पूर्वक जीवन जीने वाले लोग अल्लाह के और करीब जाते हैं. इसके साथ-साथ बच्चों को पैगंबर मोहम्मद साहब के बारे में तालीम दी जाती है. सभी लोग मिलजुल खुशियां मनाते हैं और खुद पर अल्लाह का करम महसूस करते हैं.

Share Now

\