DR Congo Ebola Outbreak: कांगो में इबोला का अब तक का सबसे तेज प्रकोप; 2,000 से अधिक मौतें, WHO ने बुंडिबुग्यो स्ट्रेन पर जारी की चेतावनी

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस का प्रकोप बेहद तेज गति से फैल रहा है. अब तक 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 4,300 से अधिक मामले सामने आए हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ स्वीकृत वैक्सीन न होने और सशस्त्र संघर्ष के बीच फैलते संक्रमण को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी की है.

DR Congo Ebola Outbreak (Photo Credits: UNICEF)

जिनेवा/किंशासा: मध्य अफ्रीकी देश 'डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो' (Democratic Republic of the Congo) (DRC) के पूर्वी क्षेत्रों में फैला इबोला वायरस का नया प्रकोप (Ebola outbreak) रिकॉर्ड स्तर पर तेजी से फैल रहा है. संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इस महामारी के कारण मरने वालों का आंकड़ा 2,000 के पार पहुंच चुका है, जबकि कुल पुष्ट और संदिग्ध मामलों की संख्या 4,300 से अधिक हो गई है.

मई 2026 के मध्य में आधिकारिक रूप से घोषित यह प्रकोप लगभग हर 20 दिन में दोगुना हो रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्येयियस ने आगाह किया है कि यदि संक्रमण की वर्तमान दर पर तुरंत काबू नहीं पाया गया, तो यह प्रकोप 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीकी इबोला संकट को भी पीछे छोड़ सकता है. यह भी पढ़ें: Ebola Outbreak: कांगो में इबोला का प्रकोप बना वैश्विक चिंता, 2014-16 की महामारी से भी ज्यादा घातक हो सकता है संक्रमण, WHO ने दी चेतावनी

दुर्लभ 'बुंडिबुग्यो स्ट्रेन' और इलाज की सीमित सुविधाएं

स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा किए गए जेनेटिक अनुक्रमण (Genetic Sequencing) से पुष्टि हुई है कि यह प्रकोप इबोला के दुर्लभ बुंडिबुग्यो (Bundibugyo ebolavirus) स्ट्रेन के कारण फैला है. 

अधिक सामान्य 'ज़ैरे' (Zaire) स्ट्रेन के विपरीत—जिसके लिए पूर्व में प्रभावी टीके और एंटीबॉडी उपचार विकसित किए जा चुके हैं—बुंडिबुग्यो प्रजाति के लिए वर्तमान में कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है. हालांकि डब्ल्यूएचओ ने संभावित उपचारों के मूल्यांकन और परीक्षणों को त्वरित मंजूरी दी है, लेकिन वर्तमान में चिकित्सा दल मुख्य रूप से पुनर्जलीकरण (Rehydration) और द्वितीयक संक्रमणों के प्रबंधन जैसी सहायक देखभाल (Supportive Care) तक ही सीमित हैं. 

सशस्त्र संघर्ष, हिंसा और विस्थापन बनी बड़ी बाधा

पूर्वी डीआरसी के इतुरी (Ituri), उत्तरी किवु और दक्षिण किवु जैसे प्रभावित प्रांत लंबे समय से स्थानीय सशस्त्र संघर्षों और असुरक्षा से जूझ रहे हैं:

छुपी हुई ट्रांसमिशन चेन और बच्चों पर गंभीर असर

रिपोर्ट के मुताबिक, नए पाए जाने वाले 80% से अधिक मामले पहले से निगरानी सूची में शामिल संपर्कों से बाहर के हैं, जो यह दर्शाता है कि स्थानीय समुदायों में कई ट्रांसमिशन चेन बिना पहचान के फैल रही हैं. इसके अलावा, सामाजिक झिझक, गलत सूचनाओं और पारंपरिक अंतिम संस्कार प्रथाओं के कारण लगभग दो-तिहाई मौतें स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर घरों में ही हो रही हैं.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के आंकड़ों के अनुसार, इस प्रकोप में 300 से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है, जो कुल मौतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है. बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए भी खतरा कई गुना बढ़ गया है. 

सीमा पार प्रसार का जोखिम और वैश्विक प्रतिक्रिया

पूर्वी डीआरसी से सटे पड़ोसी देश युगांडा में भी जुड़े हुए मामलों की पुष्टि के बाद डब्ल्यूएचओ और अफ्रीकी रोग नियंत्रण केंद्र (Africa CDC) ने रवांडा और दक्षिण सूडान सहित सभी सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और आपातकालीन प्रोटोकॉल को कड़ा कर दिया है.

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां टेस्टिंग केंद्रों की संख्या बढ़ाने, स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों के जरिए जनजागरूकता फैलाने और सुरक्षित अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर राहत अभियान चला रही हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक पहचान और त्वरित चिकित्सकीय देखभाल से मृत्यु दर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

 

Share Now