Ebola Outbreak: कांगो में इबोला का प्रकोप बना वैश्विक चिंता, 2014-16 की महामारी से भी ज्यादा घातक हो सकता है संक्रमण, WHO ने दी चेतावनी
पश्चिम अफ्रीका में 2014 से 2016 के बीच फैली इबोला महामारी में 28,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे, जबकि 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. उसी महामारी के बाद इबोला वैक्सीन विकसित करने के प्रयासों में तेजी आई थी. अब WHO का कहना है कि कांगो का मौजूदा प्रकोप यदि समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह इतिहास की सबसे बड़ी इबोला महामारी बन सकता है.
Ebola Outbreak: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि कांगो में फैला मौजूदा इबोला वायरस का प्रकोप इतिहास की सबसे घातक इबोला महामारी को भी पीछे छोड़ सकता है. WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयसस ने बुधवार को कहा कि अगर संक्रमण की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो यह 2014-16 पश्चिम अफ्रीका इबोला महामारी से भी बड़ा संकट बन सकता है. Ebola Outbreak: कांगो-युगांडा में इबोला के बढ़ते मामलों के बीच WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, जानें यह दुर्लभ महामारी क्या है
2,000 से ज्यादा लोगों की मौत
WHO के अनुसार, पूर्वी कांगो में फैले इस प्रकोप में अब तक 4,300 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप माना जा रहा है. हालांकि इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी, लेकिन जीनोमिक सीक्वेंसिंग से पता चला है कि संक्रमण की शुरुआत फरवरी 2026 में ही हो चुकी थी.
इस बार नहीं है कोई मंजूरशुदा वैक्सीन
इस बार फैल रहा इबोला वायरस बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन का है. WHO के मुताबिक, इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है. हालांकि, वैक्सीन और उपचार विकसित करने के प्रयास जारी हैं.
संघर्षग्रस्त इलाकों में तेजी से फैल रहा संक्रमण
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रकोप पूर्वी कांगो के दूरदराज और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित हैं. यह इलाका दक्षिण सूडान, युगांडा और रवांडा की सीमाओं के करीब स्थित है. अधिकांश नए मामले उन क्षेत्रों से सामने आ रहे हैं, जहां स्वास्थ्यकर्मी आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं. खराब सड़कें, कमजोर स्वास्थ्य ढांचा और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों तक समय पर इलाज नहीं पहुंच पा रहा है.
स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल और अफवाहें बनीं बड़ी चुनौती
WHO के अनुसार, कई स्वास्थ्यकर्मी वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल पर चले गए हैं. वहीं, वायरस को लेकर फैली अफवाहों और गलत जानकारी की वजह से कई लोग अस्पताल जाने से भी बच रहे हैं, जिससे संक्रमण को नियंत्रित करना और मुश्किल हो गया है.
6 से 12 महीने तक जारी रह सकता है प्रकोप
WHO महानिदेशक टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयसस ने कहा, "यह प्रकोप हमसे काफी आगे निकल चुका है और हम इसे रोकने की कोशिश में पीछे चल रहे हैं." WHO के हेल्थ इमरजेंसी अलर्ट एंड रिस्पॉन्स ऑपरेशंस के निदेशक डॉ. अब्दिरहमान महमूद ने कहा कि मौजूदा अनुमान के अनुसार संक्रमण करीब छह महीने में अपने चरम पर पहुंच सकता है. हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात और बिगड़े, तो यह प्रकोप 9 से 12 महीने तक भी जारी रह सकता है.
2014-16 की इबोला महामारी थी सबसे घातक
पश्चिम अफ्रीका में 2014 से 2016 के बीच फैली इबोला महामारी में 28,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे, जबकि 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. उसी महामारी के बाद इबोला वैक्सीन विकसित करने के प्रयासों में तेजी आई थी. अब WHO का कहना है कि कांगो का मौजूदा प्रकोप यदि समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह इतिहास की सबसे बड़ी इबोला महामारी बन सकता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 12, 2026 09:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

