कर्नाटक में इंजेक्शन से युवक की मौत, आयुर्वेदिक डॉक्टर कर रहा था एलोपैथिक इलाज, परिजनों ने की कार्रवाई की मांग

कर्नाटक के कोलार जिले में बुखार के इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाने से एक युवक की मौत हो गई. मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर कोलार ग्रामीण थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

कोलार में फर्जी डॉक्टरों और अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है. वे स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.

बुखार से पीड़ित युवक की इलाज के दौरान मौत

कोलार जिले के वक्कलेरी गांव के रहने वाले गौतम उर्फ नागेंद्रबाबू को बुखार की शिकायत थी. शाम को परिजन उसे गांव के ही सनराइज क्लिनिक में इलाज के लिए ले गए. वहां मौजूद बीएएमएस डॉक्टर मोहम्मद रफीक ने उसे एक इंजेक्शन दिया.

इंजेक्शन लगते ही गौतम की तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही देर में वह तड़पने लगा. जब डॉक्टर रफीक ने देखा कि उसकी दिल की धड़कन धीमी हो रही है, तो उन्होंने उसे कोलार के अस्पताल रेफर कर दिया. परिवारवालों ने उसे कोलार के जालप्पा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

डॉक्टर पर लगे गंभीर आरोप

मृतक गौतम के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर रफीक द्वारा दिए गए इंजेक्शन के कारण ही उसकी मौत हुई है. मृतक की मां ने दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. गौतम के पिता का पहले ही निधन हो चुका था, ऐसे में उसकी मां ने मजदूरी कर उसे पाला-पोसा और अच्छी शिक्षा दिलाने का प्रयास किया.

आयुर्वेदिक डॉक्टर कर रहा था एलोपैथिक इलाज

गौतम ने एमबीए पूरा किया था और नौकरी की तलाश में था. वह छोटे-मोटे काम कर अपनी मां की आर्थिक मदद करता था. गौतम की अचानक हुई मौत से परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई है.

डॉक्टर मोहम्मद रफीक ने बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की थी, लेकिन वह एलोपैथिक दवाएं भी दे रहा था. यह खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कैसे एक आयुर्वेदिक डॉक्टर एलोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल कर रहा था.

परिजनों और ग्रामीणों ने की न्याय की मांग

स्थानीय लोगों के अनुसार, डॉक्टर रफीक बंगारपेट तालुक अस्पताल में अनुबंध के आधार पर काम कर रहा था. इस मामले में मृतक के परिजनों ने कोलार ग्रामीण थाने में डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और सख्त कार्रवाई की मांग की है.

इसके अलावा, वक्कलेरी सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित अनुपस्थिति से भी लोग परेशान हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब गौतम की हालत बिगड़ी, तब एंबुलेंस भी सही से काम नहीं कर रही थी. इस लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.

जांच में जुटी पुलिस, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सुधार नहीं किया गया तो इस लापरवाही के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन हो सकता है.

इस घटना ने कोलार में फर्जी डॉक्टरों और अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों की समस्या को उजागर कर दिया है. अब देखने वाली बात होगी कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इस पर क्या कदम उठाते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है.