FSSAI ने Old Monk, Antiquity Blue, Royal Challenge समेत कई पॉपुलर शराब ब्रांड्स पर क्यों लगाया प्रतिबंध? जानें क्या है पूरा मामला
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ओल्ड मोंक, रॉयल चैलेंज और एंटिक्विटी ब्लू जैसी लोकप्रिय शराब ब्रांड्स की कुछ वैरायटी की बिक्री पर रोक लगा दी है. प्रयोगशाला जांच में तय मानकों के विपरीत कृत्रिम फ्लेवर का इस्तेमाल पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है.
नई दिल्ली: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश में बिकने वाले कई प्रमुख शराब ब्रांड्स की विशिष्ट वैरायटी की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. इस कार्रवाई की जद में ओल्ड मोंक (Old Monk), एंटिक्विटी ब्लू (Antiquity Blue), रॉयल चैलेंज (Royal Challenge) और बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की (Bagpiper Deluxe Whisky) जैसे लोकप्रिय नाम शामिल हैं.
एफएसएसएआई द्वारा प्रयोगशालाओं में कराए गए नमूनों के परीक्षण में पाया गया कि इन उत्पादों में कृत्रिम और 'नेचर-आइडेंटिकल' फ्लेवर का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो निर्धारित विनिर्माण मानकों के अनुरूप नहीं है. यह फैसला यूनाइटेड स्पिरिट्स, इनब्रू बेवरेजेज और मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर जैसी कंपनियों के निर्माण संयंत्रों के निरीक्षण के बाद लिया गया है. यह भी पढ़े: Dry Day: 1 मई 2026 को 'ड्राई डे', महाराष्ट्र और दिल्ली में बंद रहेंगी शराब की दुकानें; जानें क्या है कारण
एफएसएसएआई ने क्यों उठाया यह कदम?
खाद्य सुरक्षा नियामक के अनुसार, भारतीय खाद्य सुरक्षा नियमों में अल्कोहल युक्त पेय पदार्थों में केवल प्राकृतिक स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थों (natural flavouring substances) के इस्तेमाल की ही अनुमति है. हालांकि, प्रयोगशाला जांच में सामने आया कि कुछ निर्माता उत्पादों में ऊपर से कृत्रिम या 'नेचर-आइडेंटिकल' फ्लेवर मिला रहे थे.
नियामक ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई विनिर्माण प्रक्रिया नहीं है जिसके तहत रम में अलग से 'रम फ्लेवर' या व्हिस्की में 'व्हिस्की फ्लेवर' जोड़ा जाए. एफएसएसएआई के मुताबिक, इस प्रकार के कृत्रिम फ्लेवर मिलाने से कंपनियां मैच्युरेशन (परिपक्वता प्रक्रिया) और शीरा (molasses), माल्ट या अंगूर जैसे प्राकृतिक कच्चे माल के इस्तेमाल को दरकिनार कर देती हैं. इसी आधार पर इन उत्पादों को 'मानक से कम श्रेणी' (Sub-standard) घोषित किया गया है.
कौन-से ब्रांड्स और प्लांट्स हुए प्रभावित?
एफएसएसएआई का यह आदेश विशिष्ट विनिर्माण इकाइयों में तैयार किए गए चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर लागू होता है:
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यूनाइटेड स्पिरिट्स (मध्य प्रदेश प्लांट): एंटिक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की.
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इनब्रू बेवरेजेज (मध्य प्रदेश प्लांट): बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम.
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मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर (महाराष्ट्र प्लांट): ओल्ड मोंक रम की तीन अलग-अलग वैरायटी.
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह प्रतिबंध केवल इन विशिष्ट फैक्ट्रियों में बने बैच पर ही लागू है या अन्य प्लांट्स से आने वाले इन ब्रांड्स के पूरे स्टॉक पर भी इसका असर पड़ेगा.
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और बाजार पर प्रभाव
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शराब उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों ने नियामक के इस फैसले पर चिंता जताई है. उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि इस तरह के फ्लेवर का इस्तेमाल मौजूदा भारतीय नियमों के तहत स्वीकार्य माना जाता रहा है. हालांकि, यूनाइटेड स्पिरिट्स (डियाजियो इंडिया), इनब्रू बेवरेजेज और मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर ने इस विषय पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
भारत दुनिया के सबसे बड़े अल्कोहल बाजारों में से एक है, जिसका वार्षिक राजस्व लगभग 40 अरब डॉलर है. एफएसएसएआई की यह कार्रवाई खाद्य और पेय क्षेत्र में चल रहे व्यापक प्रवर्तन अभियानों का हिस्सा है, जिसके तहत हाल ही में 'एनर्जी ड्रिंक्स' के रूप में बेचे जाने वाले उच्च-कैफीन पेय पदार्थों के विपणन दावों पर भी कड़े निर्देश दिए गए थे.