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क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर 30 सितंबर से फूड लेबल और एक्सपायरी डेट दिखाना अनिवार्य; FSSAI का कड़ा रुख

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए खाद्य उत्पादों के लेबल और एक्सपायरी डेट को अपने ऐप्स व वेबसाइट्स पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने की 30 सितंबर 2026 की सख्त समयसीमा तय की है. एफएसएसएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजित पुन्हानी ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की ठीक वैसी ही जांच और निगरानी होगी जैसी पारंपरिक दुकानों पर होती है.

क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर 30 सितंबर से फूड लेबल और एक्सपायरी डेट दिखाना अनिवार्य; FSSAI का कड़ा रुख

नई दिल्ली: देश में 10 मिनट डिलीवरी और ऑनलाइन ग्रॉसरी सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डिजिटल रिटेल सेक्टर के खिलाफ सख्त विनियामक कदम उठाने की तैयारी कर ली है. नियामक ने सभी त्वरित वाणिज्य (Quick Commerce) और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को 30 सितंबर 2026 तक खाद्य उत्पादों के लेबल और उनकी एक्सपायरी डेट (Expiry Date) को डिजिटल डिस्प्ले पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने का अल्टीमेटम दिया है.

एफएसएसएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजित पुन्हानी ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में खराब या एक्सपायर हो चुके खाद्य उत्पादों को ऑनलाइन बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

ऑनलाइन खरीदारी से पहले दिखेगी एक्सपायरी और पैकेजिंग जानकारी

नए विनियामक निर्देशों के तहत अब ऑनलाइन कंपनियों को हर लिस्टेड खाद्य उत्पाद के साथ उसकी पैकेजिंग और एक्सपायरी से जुड़ी पूरी जानकारी साझा करनी होगी ताकि उपभोक्ता खरीदारी का निर्णय लेने से पहले उसे देख सकें.

रजित पुन्हानी के अनुसार, "जैसे एक सामान्य दुकान पर जाकर ग्राहक उत्पाद को हाथ में लेकर उसकी निर्माण व एक्सपायरी तिथि जांचते हैं, ठीक वैसी ही दृश्यता और पारदर्शिता ऑनलाइन खरीदारी के दौरान भी सुनिश्चित की जाएगी." नियामक का मानना है कि उपभोक्ता जागरूकता बढ़ने के साथ पैकेज्ड फूड की सही लेबलिंग खाद्य सुरक्षा का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहलू बन गई है.

केवल 'एग्रीगेटर' होने का दावा नहीं चलेगा

नियामक ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की विधिक जवाबदेही को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है:

  • सीधी जवाबदेही: ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियां खुद को केवल खरीदार और विक्रेता को जोड़ने वाला 'एग्रीगेटर' बताकर पल्ला नहीं झाड़ सकतीं.
  • गुणवत्ता की निगरानी: उनके प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों तक डिलीवर होने वाले हर खाद्य उत्पाद की प्रामाणिकता, सुरक्षा और वैध मानकों की सीधी जिम्मेदारी संबंधित प्लेटफॉर्म की भी होगी.
  • फिजिकल स्टोर जैसा स्तर: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले सामानों की निगरानी और जांच का स्तर पारंपरिक खुदरा दुकानों के समान ही सख्त रहेगा.

क्विक कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स पर FSSAI की कार्रवाई पर रजित पुन्हानी का बयान

150 से अधिक कंपनियों को नोटिस, 1 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना

उपभोक्ताओं को भ्रामक जानकारी से बचाने के लिए एफएसएसएआई ने हाल के महीनों में देश भर में व्यापक स्तर पर प्रवर्तन अभियान चलाया है:

  • भ्रामक दावों पर कार्रवाई: भ्रामक विज्ञापनों, झूठे पोषण दावों और लेबलिंग मानकों का पालन न करने के मामले में 150 से अधिक प्रमुख खाद्य एवं पेय (F&B) कंपनियों को औपचारिक नोटिस जारी किए गए हैं.
  • 33,000 अभियोजन: पिछले एक वर्ष के दौरान प्राधिकरण ने लगभग 33,000 अभियोजन (Prosecutions) दर्ज किए हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है.

ब्रांड प्रतिष्ठा पर पड़ता है असर: पुन्हानी

वित्तीय जुर्माने की राशि कम होने की आलोचनाओं पर जवाब देते हुए सीईओ रजित पुन्हानी ने कहा कि जुर्माने की रकम से अधिक महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई का संदेश होता है. किसी प्रतिष्ठित ब्रांड पर लगने वाला छोटा जुर्माना भी उसकी साख को बड़ा नुकसान पहुंचाता है. उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में दर्ज किए गए कानूनी मामले यह दर्शाते हैं कि नियामक का प्रवर्तन ढांचा प्रभावी ढंग से काम कर रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 02, 2026 08:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).