FSSAI Action On Nestle India: बेबी फूड के प्रचार वाले दावों और बायोटिन गुणवत्ता को लेकर FSSAI ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ शुरू की कानूनी कार्रवाई
कंपनी ने कहा कि उसने नोटिस के जवाब में विस्तृत स्पष्टीकरण सौंप दिया है और लेबल पर दिए गए सभी दावे तथ्यात्मक हैं तथा वैज्ञानिक साहित्य से समर्थित हैं. प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कंपनी सभी लागू नियमों और लेबलिंग मानकों का पालन करती है और उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने के लिए FSSAI के साथ सहयोग जारी रखेगी.
FSSAI Legal Action Against Nestle India: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बेबी फूड से जुड़े कथित नियमों के उल्लंघन को लेकर नेस्ले इंडिया (Nestle India) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है. नियामक संस्था ने शुक्रवार, 18 सितंबर को बताया कि उसने कंपनी के खिलाफ तीन अलग-अलग एडजुडिकेशन (Adjudication) मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर शिशु पोषण उत्पादों के प्रचार संबंधी दावों और एक फॉलो-अप फॉर्मूला में निर्धारित मानकों से कम बायोटिन (Biotin) पाए जाने का आरोप शामिल है.
FSSAI के अनुसार, जांच और लैब परीक्षण के बाद यह कार्रवाई की गई है. मामले की जानकारी सामने आने के बाद शुक्रवार को इंट्राडे कारोबार के दौरान नेस्ले इंडिया के शेयरों में करीब 3% तक की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि बाद में शेयरों ने कुछ रिकवरी कर ली.
FSSAI ने बेबी फ़ूड के प्रचार वाले दावों को लेकर नेस्ले इंडिया के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की:
Legal action initiated against Nestle India Ltd over several non-compliances pertaining to the FSS Act.
FSSAI remains committed to strengthening the food safety ecosystem through its enforcement actions. #FSSAINotice #FSSAIAction pic.twitter.com/gG1k6noK0X
— FSSAI (@fssaiindia) September 18, 2026
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्रचार संबंधी दावों पर उठाए सवाल
FSSAI द्वारा जारी एडजुडिकेशन आदेश के मुताबिक, NAN Excella Pro Stage 1 के प्रचार में '5 HMOs (Human Milk Oligosaccharides)' और 'Whey Protein' से जुड़े दावे किए गए थे. वहीं Lactogen Pro 1 के प्रचार में यह दावा किया गया कि इसका 'Whey Protein' 'Easy to Digest' है.
नियामक का कहना है कि ये दावे Food Safety and Standards (Foods for Infant Nutrition) Regulations, 2020 के Regulation 4(2) का उल्लंघन करते हैं. यह नियम शिशु पोषण उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से किसी भी प्रकार के प्रचार या दावों पर रोक लगाता है.
इसके अलावा, FSSAI ने Infant Milk Substitutes, Feeding Bottles and Infant Foods (Regulation of Production, Supply and Distribution) Act, 1992 की धारा 3 का भी हवाला दिया, जो ऐसे उत्पादों के विज्ञापन और व्यावसायिक प्रचार पर प्रतिबंध लगाती है.
बायोटिन मानकों पर भी खरा नहीं उतरा सैंपल
मार्केटिंग से जुड़े आरोपों के अलावा, नेस्ले इंडिया के एक Follow-Up Formula का सैंपल लैब परीक्षण में निर्धारित बायोटिन (Vitamin B7) मानकों पर खरा नहीं उतरा. FSSAI ने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद सैंपल को दोबारा परीक्षण (Referral Laboratory) के लिए भेजा गया, जहां भी यह निर्धारित बायोटिन आवश्यकता के अनुरूप नहीं पाया गया. नियामक के अनुसार, शिशु पोषण उत्पादों में बायोटिन की मात्रा के लिए तय मानक अनिवार्य हैं.
नेस्ले इंडिया ने आरोपों को किया खारिज
नेस्ले इंडिया ने FSSAI के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उसके सभी उत्पाद लागू नियमों के अनुरूप हैं. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि संबंधित उत्पादों और उनके लेबल को पहले ही FSSAI की विशेषज्ञ समिति से मंजूरी मिल चुकी है.
कंपनी ने कहा कि उसने नोटिस के जवाब में विस्तृत स्पष्टीकरण सौंप दिया है और लेबल पर दिए गए सभी दावे तथ्यात्मक हैं तथा वैज्ञानिक साहित्य से समर्थित हैं. प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कंपनी सभी लागू नियमों और लेबलिंग मानकों का पालन करती है और उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने के लिए FSSAI के साथ सहयोग जारी रखेगी.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 19, 2026 06:06 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

