SC On EC: 'नागरिकता जांचना तुम्हारा काम नहीं', आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को क्यों लगाई फटकार

बिहार वोटर लिस्ट की विशेष जांच को लेकर विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने आधार को नागरिकता का सबूत नहीं माना. इस पर कोर्ट ने आयोग को फटकार लगाते हुए कहा कि नागरिकता जांचना गृह मंत्रालय का काम है, आपका नहीं.

सुप्रीम कोर्ट (Photo: Wikimedia Commons)

नई दिल्ली: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जो अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. चुनाव आयोग (ECI) ने बिहार में वोटर लिस्ट की एक "स्पेशल गहन जांच" (Special Intensive Revision) शुरू की है. इसी फैसले के खिलाफ आरजेडी (RJD) और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है. गुरुवार को इसी मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई.

पूरा मामला क्या है?

आसान शब्दों में समझिए. चुनाव आयोग चाहता है कि बिहार में वोटर लिस्ट को फिर से गहराई से जांचा जाए. इसके लिए उन्होंने एक नियम बनाया है. नियम यह है कि जिन लोगों का नाम वोटर लिस्ट में 1 जनवरी 2003 के बाद जुड़ा है, उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए 11 तरह के दस्तावेजों में से कोई एक जमा करना होगा.

विपक्षी पार्टियों को इसी नियम से आपत्ति है. उनका कहना है कि यह भेदभाव वाला नियम है.

कोर्ट में किसने क्या दलील दी?

असली बहस कहां शुरू हुई?

बहस तब गरमा गई जब बात आधार कार्ड पर आई. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पहचान के लिए कई दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. जब चुनाव आयोग के वकील से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सिर्फ आधार कार्ड से किसी की भारतीय नागरिकता साबित नहीं होती, इसलिए हम उसे एकमात्र सबूत नहीं मान सकते.

बस, इसी दलील पर सुप्रीम कोर्ट भड़क गया.

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को क्या कहा?

जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने चुनाव आयोग को साफ शब्दों में फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा:

"अगर आप हर वोटर की नागरिकता साबित करने बैठेंगे, तो यह एक बहुत बड़ा काम हो जाएगा. यह काम आपका नहीं, गृह मंत्रालय का है. आप उस झमेले में मत पड़िए. नागरिकता तय करने की अपनी एक अलग कानूनी प्रक्रिया है. अगर आप यह सब करने लगेंगे तो आपकी इस पूरी कवायद (जांच) का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा."

सुप्रीम कोर्ट के इस बयान का सीधा मतलब था कि चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष चुनाव कराना और वोटर लिस्ट तैयार करना है, न कि हर वोटर की नागरिकता की जांच करना. यह एक बड़ी टिप्पणी है, जिसने सुनवाई का रुख ही बदल दिया.

फिलहाल, इस मामले में सुनवाई जारी है. लेकिन कोर्ट की इस फटकार के बाद चुनाव आयोग के लिए अपने फैसले को सही ठहराना एक बड़ी चुनौती बन गया है.

Share Now

\