Veg-Non Veg Symbol Rule: साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट पर दिखेगा वेज-नॉनवेज का निशान, सरकार ने पैकेजिंग नियमों में किया बड़ा बदलाव
उपभोक्ताओं के हित और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पैकेज्ड पर्सनल केयर और टॉयलेटरी उत्पादों के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियमों में बदलाव को अधिसूचित किया है.
Veg-Non Veg Symbol Rule: उपभोक्ताओं के हित और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पैकेज्ड पर्सनल केयर और टॉयलेटरी उत्पादों के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियमों में बदलाव को अधिसूचित किया है. इसके तहत अब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक्स और अन्य टॉयलेटरीज के पैकेट पर उनके शाकाहारी या मांसाहारी मूल की पहचान के लिए स्पष्ट रंगीन डॉट (प्रतीक निशान) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है.
हरे और लाल/भूरे रंग के डॉट से होगी पहचान
नया नियम लागू होने के बाद शाकाहारी (Vegetarian) मूल के घटकों से बने उत्पादों के पैकेट पर स्पष्ट रूप से हरा डॉट (Green Dot) लगाना होगा. वहीं, जिन उत्पादों में मांसाहारी (Non-Vegetarian) या पशु-आधारित सामग्री या घटकों का उपयोग किया गया है, उनके पैकेट पर लाल या भूरे रंग का डॉट (Red/Brown Dot) अंकित करना अनिवार्य होगा. यह निशान उपभोक्ता को आसानी से दिखाई दे, इसके लिए इसे पैकेट के 'प्रिंसिपल डिस्प्ले पैनल' (मुख्य दृश्य भाग) के सबसे ऊपरी हिस्से पर लगाया जाएगा. यह भी पढ़े: UPI New Rules: 15 अक्टूबर से बदलेंगे यूपीआई के नियम, सरकार ने MDR, GST और RuPay चार्ज को लेकर किया बड़ा खुलासा
इन दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर लागू होंगे नियम
केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित इस व्यवस्था के दायरे में रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले कई उत्पाद शामिल हैं. इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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नहाने एवं धोने के साबुन
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विभिन्न प्रकार के शैंपू और हेयर केयर प्रोडक्ट्स
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टूथपेस्ट और ओरल केयर प्रोडक्ट्स
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त्वचा की देखभाल से जुड़े अन्य कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज
लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में किया गया संशोधन
यह बदलाव 'लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011' के नियम 6 में किया गया है. लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) फोर्थ अमेंडमेंट रूल्स, 2026 के माध्यम से नियम 6 के सब-रूल (4A) में नया क्लॉज (d) जोड़ा गया है, जबकि इसके पुराने सब-रूल (8) को हटा दिया गया है. सरकार ने अधिसूचना G.S.R. 826 (E) के जरिए इस नए ढांचे को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया है.
पुराने नियमों और अदालती फैसलों का संदर्भ
टॉयलेटरीज़ और कॉस्मेटिक उत्पादों पर वेज और नॉन-वेज के निशान लगाने की व्यवस्था का प्रावधान सबसे पहले 2014 के संशोधनों (पुराने नियम 6(8)) में किया गया था. हालांकि, अधिकार क्षेत्र और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स कानून के साथ नियमों के तालमेल को लेकर उद्योग जगत और नियामकों के बीच कानूनी स्पष्टता का अभाव था. फरवरी 2026 में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष भी इस विषय पर सुनवाई हुई थी, जिसमें अदालत ने नियामकों को कॉस्मेटिक्स पर लेबलिंग व्यवस्था को स्पष्ट करने का निर्देश दिया था. नवीनतम संशोधन के जरिए सरकार ने इसे संशोधित कानूनी ढांचा प्रदान किया है.
उपभोक्ताओं के लिए कितना मददगार होगा यह निर्णय?
दैनिक उपयोग की कई सामग्रियों (जैसे ग्लिसरीन, फैटी एसिड या स्टीयरिक एसिड) का निर्माण वनस्पति और पशु उत्पाद दोनों स्रोतों से संभव होता है. पहले उपभोक्ताओं को सामग्री की बारीक सूची पढ़े बिना यह जानना कठिन होता था कि उत्पाद पूरी तरह शाकाहारी है या नहीं. इस संशोधन के बाद, पैकेट के मुख्य भाग पर लगा रंगीन डॉट देखकर ग्राहक खरीदारी के समय ही अपनी धार्मिक व व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के अनुरूप सही उत्पाद का चयन आसानी से कर सकेंगे.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 22, 2026 12:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

