देश

UPI New Rules Explained: 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर मर्चेंट चार्ज को लेकर NPCI के विस्तृत FAQ जारी; जानिए आम जनता और व्यापारियों पर क्या होगा असर

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर 42 सवालों की एक विस्तृत प्रश्नोत्तरी जारी की है. एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी और इसका बोझ केवल बड़े व्यापारियों (मर्चेंट्स) पर पड़ेगा, न कि आम उपभोक्ताओं पर.

UPI New Rules Explained: 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर मर्चेंट चार्ज को लेकर NPCI के विस्तृत FAQ जारी; जानिए आम जनता और व्यापारियों पर क्या होगा असर
UPI Representative Image (File Photo)

नई दिल्ली: देश के सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यम यूपीआई (UPI) को तकनीकी और वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नए ढांचे को लेकर स्थिति साफ कर दी है. एनपीसीआई ने 15 सितंबर को जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों व अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) में दोहराया है कि यह व्यवस्था आगामी 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी.

इस पूरे नीतिगत बदलाव का मुख्य आधार यह है कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई पहले की तरह शत-प्रतिशत निशुल्क रहेगा. कोई भी व्यापारी या ऐप प्रदाता ग्राहकों पर यह शुल्क नहीं डाल सकता और न ही कोई अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क वसूल सकता है. यह भी पढ़ें: UPI Payment Charges: 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI लेनदेन पर लग सकता है चार्ज; NPCI जल्द जारी कर सकता है गाइडलाइंस, जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर

आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?

एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि रोजमर्रा के लेन-देन करने वाले आम नागरिकों को किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना होगा:

  • उपभोक्ताओं के लिए शून्य शुल्क: बाजार में किसी भी दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने पर ग्राहकों से कोई पैसा नहीं कटेगा.

  • P2P और सेल्फ-ट्रांसफर फ्री: अपने परिजनों, मित्रों को पैसे भेजने, बिल बांटने (Splitting Bills) या अपने ही एक बैंक खाते से दूसरे में फंड ट्रांसफर करने पर कोई सीमा या शुल्क नहीं है.

  • कोई मासिक कोटा नहीं: उपभोक्ताओं के लिए फ्री यूपीआई भुगतानों पर कोई मासिक सीमा नहीं है. दैनिक सुरक्षा सीमा (बैंकों द्वारा तय ₹1 लाख से ₹5 लाख) केवल जोखिम प्रबंधन के लिए है, शुल्क लगाने के लिए नहीं.

  • ऑटोपे और यूटिलिटी मैंडेट सुरक्षित: बिजली बिल, म्यूचुअल फंड एसआईपी या ओटीटी सब्सक्रिप्शन के आवर्ती स्वतः भुगतानों (UPI AutoPay/Mandates) पर भी कोई एमडीआर देय नहीं होगा.

मर्चेंट्स पर कैसे लागू होगा MDR? समझें पूरा गणित

यह नया शुल्क ढांचा केवल वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और बड़े कारोबारियों (Person-to-Merchant यानी P2M) पर लागू होगा:

  • ₹2,000 तक शून्य शुल्क: 2,000 रुपये तक के सभी मर्चेंट भुगतानों पर एमडीआर 0% रहेगा. देश में कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 95% से अधिक हिस्सा इसी श्रेणी में आता है.

  • ₹2,000 से अधिक पर 0.4% शुल्क: 2,000 रुपये से अधिक के बिलों पर व्यापारी अपने बैंक को 0.40% शुल्क देगा.

  • अधिकतम ₹300 का कैप: यदि कोई ग्राहक 75,000 रुपये या 1,00,000 रुपये का बड़ा भुगतान करता है, तो भी व्यापारी पर शुल्क का बोझ ₹300 से अधिक नहीं होगा (75,000 रुपये से ऊपर के सभी भुगतानों पर अधिकतम सीमा ₹300 निर्धारित है).

ग्राहक द्वारा किया गया भुगतान लागू MDR दर मर्चेंट द्वारा देय शुल्क ग्राहक पर अतिरिक्त भार
₹2,000 तक 0.00% ₹0 शून्य
₹3,000 0.40% ₹12 शून्य
₹50,000 0.40% ₹200 शून्य
₹75,000 और उससे अधिक फिक्स्ड कैप अधिकतम ₹300 शून्य

छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों (P2PM) को पूरी सुरक्षा

एनपीसीआई ने स्थानीय छोटे व्यापारियों और असंगठित क्षेत्र के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की है:

  • P2PM फ्रेमवर्क: जो छोटे दुकानदार या वेंडर अपने व्यक्तिगत बचत खाते से जुड़े क्यूआर कोड पर प्रति माह ₹1 लाख तक की राशि प्राप्त करते हैं, वे P2PM (Person-to-Person-Merchant) श्रेणी में आते हैं। इन पर किसी भी स्थिति में एमडीआर नहीं लगेगा.

  • जीएसटी पंजीकरण आवश्यक नहीं: शून्य एमडीआर का लाभ लेने के लिए छोटे कारोबारियों को जीएसटी (GST) नंबर की आवश्यकता नहीं होगी.

  • क्यूआर कोड बदलने की जरूरत नहीं: मौजूदा क्यूआर स्टैंडी या साउंडबॉक्स सामान्य रूप से काम करते रहेंगे; इन्हें बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है.

पेट्रोल, रेलवे, बीमा और कैपिटल मार्केट के लिए विशेष रियायती दरें

जनहित और आवश्यक सेवाओं को लागत वृद्धि से बचाने के लिए विशिष्ट क्षेत्रों के लिए फ्लैट रेट तय किए गए हैं:

  • पेट्रोल पंप, रेलवे, बीमा और बिजली बिल: पेट्रोल पंपों पर ईंधन भराने, रेलवे टिकट बुकिंग, बीमा प्रीमियम और बिजली-पानी के बिलों पर 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4% के बजाय केवल ₹5 का फ्लैट एमडीआर देय होगा। ₹2,000 तक यह भी शून्य रहेगा.

  • कैपिटल मार्केट (म्यूचुअल फंड व शेयर बाजार): सेबी-पंजीकृत ब्रोकर्स, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड निवेश के लिए यूपीआई ट्रांसफर पर केवल 0.02% (अधिकतम ₹300 कैप) की सांकेतिक दर लागू होगी.

क्यों जरूरी था एमडीआर? 20,000 करोड़ का वार्षिक बुनियादी ढांचा खर्च

एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, अकेले अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए 2,451 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य ₹29.9 लाख करोड़ रहा.

इतने विशाल पैमाने को संभालने के लिए भारी भरकम सर्वर, हाई-स्पीड टेलीकॉम लाइनें, साइबर सुरक्षा, एआई आधारित धोखाधड़ी रोकथाम और बैंकिंग सॉफ्टवेयर की निरंतर देखरेख में सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ का खर्च आता है. केवल सरकारी बजटीय सब्सिडी पर निर्भर रहने के बजाय एक संतुलित वाणिज्यिक मॉडल अपनाने से नए फिनटेक स्टार्टअप्स को बाजार में टिकने का अवसर मिलेगा और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा अधिक सुरक्षित और मजबूत बनेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 15, 2026 07:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).