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यूपी में सीट बंटवारे को लेकर सपा-कांग्रेस में तनाव, बसपा ने 'खेल बिगाड़ा'

उत्तर प्रदेश में 'इंडिया ब्लॉक' के दो मुख्य घटक कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच 'सियासी मुद्दे' सुलझने की बजाय और अधिक उलझ रहे हैं. सपा और कांग्रेस के बीच ताजा रोड़ा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) है.

यूपी में सीट बंटवारे को लेकर सपा-कांग्रेस में तनाव, बसपा ने 'खेल बिगाड़ा'
SP-Congress ( img credit -Wikipedia)

लखनऊ, 6 जनवरी : उत्तर प्रदेश में 'इंडिया ब्लॉक' के दो मुख्य घटक कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच 'सियासी मुद्दे' सुलझने की बजाय और अधिक उलझ रहे हैं. सपा और कांग्रेस के बीच ताजा रोड़ा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) है. सपा 28 विपक्षी दलों के गठबंधन में बसपा के शामिल होने के खिलाफ है, वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय, बसपा अध्यक्ष मायावती से 'इंडिया' में शामिल होने पर "गंभीरता से विचार" करने का आग्रह कर रहे हैं. ब्लॉक की समन्वय समिति में सपा के प्रतिनिधि जावेद अली खान ने कहा, ''अजय राय की पृष्ठभूमि बीजेपी की है और कांग्रेस को उनकी टिप्पणियों का संज्ञान लेना चाहिए." मायावती ने हाल ही में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि वे इंडिया ब्लॉक के सदस्यों के खिलाफ कोई टिप्पणी न करें क्योंकि बसपा ने अब गठबंधन के संबंध में अपने विकल्प खुले रखे हैं. इससे सपा और भी परेशान हो गई है, उसे संदेह है कि कांग्रेस अंतिम समय में बसपा को इंडिया में ला सकती है. इसे लेकर दोनों पार्टियों के बीच तनाव बढ़ गया है.

उत्तर प्रदेश में मुख्य समस्या यह है कि अखिलेश यादव एक राज्य के नेता हैं, लेकिन, खुद को एक राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित कर रहे हैं और खुद कमान संभालना चाहते हैं. कांग्रेस, जाहिर तौर पर, एसपी जैसे 'जूनियर पार्टनर्स' को ज्यादा महत्व नहीं देती है और पार्टी आलाकमान ने अब तक उत्तर प्रदेश की स्थिति पर चुप्पी साध रखी है. सीट बंटवारे पर बातचीत अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई है. इसलिए, सपा और कांग्रेस के बीच एक-दूसरे से आगे रहने से एकता टूट गई है. हाल के विधानसभा चुनावों में तीन राज्यों में पराजय से कांग्रेस के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है और वह समस्याग्रस्त क्षेत्रों की ओर से आंखें मूंदे बैठी है. विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद, सपा भी मध्य प्रदेश में अपने निराशाजनक प्रदर्शन को आसानी से भूलकर "मैंने कहा था तुम्हें" मूड में है. यह भी पढ़ें : देश की खबरें | पुणे में पुलिस कांस्टेबल को थप्पड़ मारने के आरोप में भाजपा विधायक के खिलाफ मामला दर्ज

एक वरिष्ठ सपा नेता ने कहा, ''कांग्रेस को यूपी में गठबंधन के लिए कोई शर्त रखने का अधिकार नहीं है. हम भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं और सीटों का बंटवारा किसी पार्टी की राजनीतिक प्रासंगिकता के अनुसार होगा.'' सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, कांग्रेस केवल दो लोकसभा सीटों की हकदार थी - संभवतः रायबरेली और अमेठी. उन्होंने उल्लेख किया कि कांग्रेस को अपने गलत निर्णयों के कारण मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार का सामना करना पड़ा, जिससे इंडिया गुट की एकता कमजोर हुई.

फखरुल हसन चांद ने बताया कि अधिक सीटें देने से अनजाने में भाजपा को मदद मिलेगी और भगवा पार्टी को हराने के लिए कांग्रेस को सपा के साथ जुड़ना चाहिए. पिछले दिनों वरिष्ठ सपा नेता आईपी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए प्रियंका गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि तीन राज्यों में बीजेपी की जीत के लिए केंद्र से डील की गई. अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने खुलासा किया कि सीट बंटवारे पर बातचीत दूसरी पार्टी के रुख पर निर्भर होगी.

उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि हम एकमात्र पार्टी हैं जो यूपी में बीजेपी को चुनौती दे सकती है और इंडिया ब्लॉक के अन्य सदस्यों को भी इस तथ्य को स्वीकार करना चाहिए." हालांकि, उन्होंने कहा कि सपा विपक्षी गुट का हिस्सा बनी रहेगी और गठबंधन की बैठकों में भी शामिल होगी. कांग्रेस ने अभी तक औपचारिक रूप से सीटों की कोई मांग नहीं रखी है. लेकिन, राज्य के नेताओं का कहना है कि वे अपनी राष्ट्रीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहेंगे. कांग्रेस ने सपा के आरोपों को पूरी तरह से निराधार और अप्रासंगिक बताते हुए खारिज कर दिया और उसके आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

अब तक, दोनों पक्षों की ओर से मुद्दों को सुलझाने और उनके बीच तनाव कम करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है. हालांकि, इंडिया ब्लॉक के सदस्य के रूप में, सपा खुद को विपक्षी सदस्यों के बीच अलग-थलग नहीं करना चाहती है, लेकिन, वह उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग सीट पर भी रहना चाहती है, जो दोनों एक साथ नहीं हो सकते हैं. कांग्रेस के साथ अखिलेश के तीखे, ठंडे रिश्ते और मुद्दे पर स्पष्टता की कमी ने उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हैरान कर दिया है.

पार्टी के एक वरिष्ठ विधायक ने कहा, ''हमें नहीं पता कि कांग्रेस के साथ हमारा रिश्ता क्या है. जमीनी स्तर पर दोनों पार्टियों के बीच एक अजीब सी दूरी है, अगर मतभेदों को अभी दूर नहीं किया गया तो चुनाव के दौरान गठबंधन अरुचिकर हो जाएगा. विपक्षी दलों के रूप में, हम एक ही भाषा नहीं बोलते हैं और न ही हम प्रमुख मुद्दों के संबंध में एक ही राय रखते हैं.''

इसके अलावा, अखिलेश यादव भले ही अपनी पार्टी में एक निर्विवाद नेता हों, लेकिन, वह अपनी स्थिति, रणनीतियों और राजनीतिक चालों को लेकर भ्रमित रहते हैं. अखिलेश नरम हिंदुत्व का प्रचार कर रहे हैं. लेकिन, स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं को अक्सर हिंदू विरोधी बयान देने की अनुमति देते हैं. सपा अपने मुस्लिम मतदाताओं पर बहुत अधिक भरोसा करती है. लेकिन, अखिलेश अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर बोलने से भी उतने ही सावधान रहते हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 06, 2024 05:05 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).