TMC Symbol Frozen: चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न किया फ्रीज; बंगाल उपचुनाव से पहले दोनों गुटों को बड़ा झटका
भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और पार्टी के आरक्षित चुनाव चिह्न 'फूल और घास' के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाते हुए इसे फ्रीज कर दिया है. चुनाव आयोग ने यह कदम पार्टी के दो विरोधी गुटों के बीच संगठनात्मक नियंत्रण और मूल पार्टी होने के दावों के चलते उठाया है.
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नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा उपचुनावों से ठीक पहले राजनीतिक रूप से एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक अंतरिम आदेश जारी कर 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' (TMC) के आधिकारिक नाम और पार्टी के आरक्षित चुनाव चिह्न 'फूल और घास' (Flowers & Grass) के उपयोग को तत्काल प्रभाव से फ्रीज (अस्थायी रूप से निलंबित) कर दिया है.
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग का यह अंतरिम फैसला आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले नंदिग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों पर सीधे लागू होगा। इस आदेश के बाद दोनों गुटों में से कोई भी आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न के साथ इन उपचुनावों में नहीं उतर सकेगा. यह भी पढ़ें: Mamata Banerjee On TMC Office Attack: टीएमसी दफ्तर में तोड़फोड़ पर ममता बनर्जी ने BJP को दी चेतावनी, कहा- नहीं रुके हमले तो दिल्ली में करेंगे धरना
क्यों फ्रीज किया गया TMC का नाम और चुनाव चिह्न?
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों की मौजूदगी दर्ज की है, जिसमें दोनों ही पक्ष खुद को मान्यता प्राप्त मूल तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं:
- पैरा 15 के तहत विवाद: राजनीतिक दलों के विभाजन और चुनाव चिह्न विवाद का अंतिम निपटारा चुनाव प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत विस्तृत सुनवाई के बाद किया जाता है.
- समय का अभाव: उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और नामांकन पत्रों की जांच का समय नजदीक है. ऐसे में इतने कम समय में सभी साक्ष्यों की पूर्ण जांच और अंतिम फैसला सुनाना संभव नहीं था,
- समान अवसर (Level Playing Field): चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी एक गुट को अनुचित चुनावी लाभ से वंचित रखने और दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करते हुए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह अंतरिम रोक लगाई गई है.
विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर हमला बोला
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी।…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 18, 2026
अपने जन्मदिन पर मोदी जी का देश को तोहफा। क्या इस तरह चुनाव जीतेंगे? pic.twitter.com/smihbrJIv1
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) September 18, 2026
चुनाव आयोग लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने के लिए फ़ैसले ले तो उसके मान-सम्मान में वृद्धि होगी।
और कुछ नहीं कहना है… बस इतना पूछना है कि हमारे द्वारा इलेक्शन कमीशन में जमा किये गये एफ़िडेविट मिले क्या? pic.twitter.com/uzVk1XfLT2
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 17, 2026
दोनों गुटों को दिए गए नए निर्देश: 18 सितंबर तक देनी होगी पसंद
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने दोनों धड़ों को तत्काल नई पहचान चुनने के निर्देश दिए हैं:
- तीन वैकल्पिक नाम: दोनों गुटों को 18 सितंबर को सुबह 11:00 बजे तक अपनी प्राथमिकता के क्रम में तीन अलग-अलग नाम आयोग को सौंपने को कहा गया है. यदि वे चाहें, तो अपने नए नाम में मूल पार्टी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का संदर्भ जोड़ सकते हैं.
- मुक्त चुनाव चिह्नों में से चयन: दोनों पक्षों को आयोग द्वारा अधिसूचित 'फ्री सिंबल' (मुक्त चुनाव चिह्न) की सूची में से प्राथमिकता के आधार पर तीन-तीन चुनाव चिह्नों के विकल्प देने होंगे.
- आयोग प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक मुक्त चुनाव चिह्न को उपचुनाव के उद्देश्य से मंजूरी देगा.
मूल चुनाव चिह्न का क्या होगा?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक अंतरिम व्यवस्था (Interim Measure) है और यह इस बात का अंतिम निर्णय नहीं है कि पार्टी का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है.
- आयोग पैरा 15 के तहत संगठनात्मक बहुमत, विधायी संख्या बल और पार्टी संविधान के आधार पर विस्तृत अदालती सुनवाई जारी रखेगा.
- कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि किस गुट को आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस माना जाएगा और 'फूल और घास' का मूल चिह्न स्थायी रूप से किसे आवंटित किया जाएगा.
- इससे पहले शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में हुए विवाद के दौरान भी चुनाव आयोग ने उपचुनावों के मद्देनजर इसी तरह के अंतरिम फ्रीज का सहारा लिया था.
उपचुनाव में नया समीकरण
इस फैसले के बाद अब 6 अक्टूबर को नंदिग्राम और रेजीनगर की जनता तृणमूल कांग्रेस के दोनों विरोधी धड़ों को नए नामों और अलग-अलग चुनाव चिह्नों के साथ चुनावी मैदान में देखेगी. इस आदेश को लेकर दोनों खेमों में कानूनी हलचल तेज हो गई है और राजनीतिक दलों की नजरें अब आयोग द्वारा आवंटित किए जाने वाले नए अंतरिम प्रतीकों पर टिकी हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 18, 2026 01:09 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

