"कॉफी पर बात कर लो"; सुप्रीम कोर्ट की अमीर कपल को सलाह, बच्ची की कस्टडी विवाद को सुलझाने के लिए सुझाया ऐसा रास्ता
तीन साल की बच्ची की कस्टडी को लेकर लड़ रहे हाई-प्रोफाइल पति-पत्नी को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा सुझाव दिया जो कानून से कहीं ज्यादा मानवीय था. कोर्ट ने कहा, "आज एक कप कॉफी पर बैठकर बात करिए, बिना वकील और परिवार के किसी सदस्य के."
नई दिल्ली: तीन साल की बच्ची की कस्टडी को लेकर लड़ रहे हाई-प्रोफाइल पति-पत्नी को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा सुझाव दिया जो कानून से कहीं ज्यादा मानवीय था. कोर्ट ने कहा, "आज एक कप कॉफी पर बैठकर बात करिए, बिना वकील और परिवार के किसी सदस्य के." यह मामला दो अमीर और सफल लोगों का है. पत्नी एक फैशन उद्यमी हैं और पति एक बड़े पैकेज्ड फूड बिजनेस के मालिक. दोनों 2023 से अलग रह रहे हैं और तलाक की प्रक्रिया जारी है.
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पत्नी ने अदालत से अनुरोध किया कि वह जून-जुलाई की गर्मियों की छुट्टियों में अपनी तीन साल की बेटी को यूरोप ले जाना चाहती हैं. लेकिन पति ने पासपोर्ट पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया. उनका तर्क था कि अगर पत्नी बच्ची को विदेश ले गईं, तो वे शायद कभी वापस न लौटें.
पति चाहते हैं कि पासपोर्ट उनके पास रहे, ताकि बच्ची भारत लौट सके. वहीं पत्नी की ओर से पेश सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह सिर्फ यात्रा को रोकने की कोशिश है. उनका कहना था, "यह साल में एक बार का मौका है जब मैं अपनी बच्ची के साथ लंबी छुट्टी पर जा सकती हूं."
कोर्ट की टिप्पणी: "अभी तलाक नहीं हुआ, साथ यात्रा क्यों नहीं?"
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कपल से पूछा, "जब तलाक हुआ ही नहीं, तो एक हफ्ते साथ यात्रा क्यों नहीं कर सकते?" कोर्ट ने कहा कि यह एक “शानदार लग्जरी” है विदेश जाना, और जब गंभीर मुद्दे लंबित हैं तो मिल-बैठकर हल निकालना ही बेहतर है.
अब सुलह संभव नहीं: पत्नी का आरोप
पत्नी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रिश्ता अब सुधारने लायक नहीं रहा, क्योंकि यह एक "अब्यूसिव रिलेशनशिप" (दुरुपयोग करने वाला रिश्ता) था. इस आरोप को पति ने सिरे से खारिज कर दिया. वहीं पति का कहना है कि उन्हें बच्ची से मिलने नहीं दिया जा रहा, और जब भी मुलाकात होती है, वो पत्नी के परिवार के घर में होती है, जहां खुलकर बातचीत करना मुमकिन नहीं.
सुलह की कोशिश: कोर्ट ने सुझाया मध्यस्थता का रास्ता
कोर्ट ने सुझाव दिया कि दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय ओका की मध्यस्थता में बैठकर अपनी कस्टडी और तलाक से जुड़े मुद्दों को सुलझा सकते हैं. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि यह “भविष्य को बेहतर बनाने का मौका” है और दोनों को अपने अहम से ऊपर उठकर बच्ची के हित में सोचना चाहिए.
(The above story first appeared on LatestLY on May 26, 2025 10:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

