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कांवड़ यात्रा 2025: दुकानों पर QR कोड लगाने के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती, धार्मिक भेदभाव का आरोप

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर भोजन विक्रेताओं के लिए QR कोड अनिवार्य किया है, जिससे उनकी पहचान उजागर होगी. इस निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है क्योंकि इससे धार्मिक भेदभाव और निजता के हनन की आशंका है. सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर 15 जुलाई 2025 को सुनवाई करेगा.

कांवड़ यात्रा 2025: दुकानों पर QR कोड लगाने के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती, धार्मिक भेदभाव का आरोप

कांवड़ यात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाली खाने-पीने की दुकानों को लेकर एक नया नियम विवादों में आ गया है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों ने आदेश दिया है कि यात्रा के रास्ते में सभी भोजन विक्रेता अपने बैनरों पर एक QR कोड लगाएं. इस कोड को स्कैन करके कोई भी तीर्थयात्री दुकान के मालिक का नाम और अन्य जानकारी पता कर सकता है, लेकिन अब इस सरकारी निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया गया है.

मामला क्या है?

प्रोफेसर अपूर्वानंद नाम के एक आवेदक ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर इस नियम पर रोक लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि यह निर्देश दुकानदारों की धार्मिक पहचान को उजागर करने की एक कोशिश है, जिससे समाज में भेदभाव और ध्रुवीकरण बढ़ सकता है.

आवेदक की मुख्य दलीलें:

  1. पुराने आदेश का उल्लंघन: आवेदक ने याद दिलाया कि पिछले साल भी ऐसा ही एक मामला उठा था. तब सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में कहा था कि किसी भी दुकानदार को अपनी पहचान उजागर करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. उनका आरोप है कि सरकारी अधिकारी अब QR कोड का नया तरीका अपनाकर सुप्रीम कोर्ट के उसी आदेश को दरकिनार करने की कोशिश कर रहे हैं.
  2. नियत में खोट: अर्जी में कहा गया है कि इस QR कोड का असली मकसद दुकानदारों, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की धार्मिक पहचान को सार्वजनिक करना है. इससे उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है और भीड़ द्वारा हिंसा का डर भी है.
  3. निजता का हनन: यह भी तर्क दिया गया है कि दुकान का लाइसेंस रखना और उसे दुकान के अंदर दिखाना एक कानूनी आवश्यकता है, जो सही है. लेकिन मालिकों का नाम और पहचान बड़े-बड़े बैनरों या होर्डिंग पर QR कोड के जरिए सार्वजनिक करना उनकी निजता (Privacy) के अधिकार का उल्लंघन है.

आसान शब्दों में कहें तो, अर्जी का सार यह है कि सरकार "लाइसेंस की जरूरत" की आड़ में दुकानदारों की धार्मिक पहचान को उजागर करना चाहती है, जो गलत है और खतरनाक हो सकता है.

आगे क्या होगा?

यह आवेदन वकील आकृति चौबे के माध्यम से दायर किया गया है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले रहा है. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच 15 जुलाई को इस पर सुनवाई करेगी. अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या दुकानदारों को यह QR कोड लगाना होगा या इस निर्देश पर रोक लगेगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 12, 2025 12:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).