सुप्रीम कोर्ट: सांप्रादायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए अभद्र भाषा का त्याग जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए नफरत फैलाने वाले भाषणों का परित्याग करना एक मूलभूत आवश्यकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए नफरत फैलाने वाले भाषणों का परित्याग करना एक मूलभूत आवश्यकता है.एक याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील निजाम पाशा ने जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने महाराष्ट्र में कई रैलियों में दिए गए नफरती भाषणों के संबंध में एक समाचार लेख का हवाला दिया था.
पाशा ने कहा कि उन्होंने समाचार रिपोर्टों को संलग्न किया है और कार्रवाई की मांग की है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने समाचार रिपोर्टों के आधार पर याचिका दायर करने पर आपत्ति जताई. सॉलिसिटर जनरल ने बेंच में शामिल जस्टिस बीवी नागरत्ना के समक्ष तर्क दिया कि पाशा उस जानकारी का उल्लेख कर रहे हैं जो केवल महाराष्ट्र से संबंधित है और याचिकाकर्ता, जो केरल से हैं, को महाराष्ट्र के बारे में पूरी तरह से पता है और उन्होंने कहा कि याचिका केवल महाराष्ट्र तक ही सीमित है.
उन्होंने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता मजिस्ट्रेट की अदालत से घृणा अपराधों की रिपोर्ट करने के लिए सीआरपीसी के तहत सहारा लेने की मांग कर सकता है, इसके बजाय उन्होंने सुप्रीम कोर्टके समक्ष अवमानना याचिका दायर की है, जो समाचार रिपोर्टों पर आधारित है.
नफरती भाषण पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
बेंच ने कहा कि जब उसने आदेश पारित किया, तो उसे देश में मौजूदा परिस्थितियों की जानकारी थी. बेंच ने कहा, "हम समझते हैं कि क्या हो रहा है, इस तथ्य को गलत नहीं समझा जाना चाहिए कि हम चुप हैं."
सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "अगर हम वास्तव में इस मुद्दे के बारे में गंभीर हैं तो कृपया याचिकाकर्ता को निर्देशित करें, जो एक सार्वजनिक उत्साही व्यक्ति है, जो सभी धर्मो में नफरत फैलाने वाले भाषणों को इकट्ठा करे और समान कार्रवाई के लिए अदालत के समक्ष रखे." उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को वास्तविकता का पता लगाने की जरूरत है.
अभद्र भाषा पर कार्रवाई जरूरी-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने तब मौखिक रूप से कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अभद्र भाषा को त्यागना मूलभूत आवश्यकता है, जिससे मेहता सहमत हुए.
बेंच ने मेहता से पूछा कि प्राथमिकी दर्ज करने के बाद क्या कार्रवाई की गई है और केवल शिकायत दर्ज करने से अभद्र भाषा की समस्या का समाधान नहीं होने वाला है. तब सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि नफरत भरे भाषणों के संबंध में 18 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं.
पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा था कि संविधान भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में देखता है, जबकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों को अभद्र भाषा के मामलों पर सख्त कार्रवाई करने और शिकायत की प्रतीक्षा किए बिना दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने का निर्देश दिया था.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 29, 2023 12:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

