SC on Hate Speeches: सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्‍पीच की घटनाओं पर जताई चिंता, कहा- हमने ईश्वर को कितना छोटा कर दिया है

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नफरत भरे भाषणों पर अंकुश लगाने के लिए कई निर्देश जारी किए और दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड पुलिस को नफरत फैलाने वाले भाषणों से जुड़े मामलों में बिना किसी शिकायत के स्वत: संज्ञान लेने का निर्देश दिया.

सुप्रीम कोर्ट (Photo Credit : Twitter)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नफरत भरे भाषणों पर अंकुश लगाने के लिए कई निर्देश जारी किए और दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड पुलिस को नफरत फैलाने वाले भाषणों से जुड़े मामलों में बिना किसी शिकायत के स्वत: संज्ञान लेने का निर्देश दिया. शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखने के लिए अभियुक्तों के धर्म को देखे बिना कार्रवाई की जानी चाहिए. Taj Mahal: ताजमहल के बंद कमरे को खोलने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, याचिकाकर्ता का दावा 'तेजो महालय में हैं शिव'

जस्टिस के.एम. जोसेफ और हृषिकेश रॉय ने नफरत भरे भाषणों की घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि यह 21वीं सदी है. याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता निजाम पाशा ने नफरत भरे भाषणों से जुड़े मामले में एसआईटी के गठन की मांग की.

इस पर, जस्टिस जोसेफ ने सिब्बल से पूछा, मुसलमान नफरत भरे भाषण दे रहे हैं, सिर्फ क्यों?.लोग दोनों तरफ से हैं, हम कह रहे हैं. सिब्बल ने कहा कि जो भी नफरत फैलाए, उसे उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए. न्यायमूर्ति जोसेफ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, यह दुखद है हमने ईश्वर को कितना छोटा कर दिया है, और 21वीं सदी में वैज्ञानिक स्वभाव के महत्व पर जोर दिया है.

याचिकाकर्ता द्वारा रिकॉर्ड पर लाए गए घृणास्पद भाषणों के संदर्भ में, पीठ ने कहा कि ये बयान निश्चित रूप से एक ऐसे देश के लिए बहुत चौंकाने वाले हैं जो धर्म तटस्थ है, और किसी का भी इस तरह का बयान निंदनीय है. याचिका में कहा गया है कि देश में पूर्ण सद्भाव होना चाहिए. पीठ ने कहा कि देश को सद्भाव से रहना चाहिए और यह मामला इस अदालत के ध्यान का पात्र है.

याचिकाकर्ता शाहीन अब्दुल्ला का प्रतिनिधित्व करने वाले सिब्बल ने दिल्ली में भाजपा सांसद परवेश वर्मा द्वारा दिए गए एक भाषण को घृणास्पद भाषणों में से एक के रूप में उद्धृत किया. उन्होंने कहा, इस तरह के घृणास्पद भाषण दिए जाते हैं, वह क्या प्रचार कर रहे हैं? शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिका काउंटी में नफरत के माहौल से संबंधित है, जो याचिकाकर्ता के अनुसार, दंडात्मक कानून में उपयुक्त प्रावधानों और संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की कमी के बावजूद नफरत फैलाने वाले भाषणों को जन्म देती है.

शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक विभिन्न समुदायों के सदस्य सद्भाव से नहीं रहते तब तक बंधुत्व नहीं हो सकता है, और दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड के पुलिस बलों को याचिका में अभद्र भाषा की घटनाओं के संबंध में की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा. पीठ ने कहा कि पुलिस को

यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जब अभद्र भाषा की घटना होती है, यहां तक कि बिना किसी शिकायत के भी, स्वत: कार्रवाई की जानी चाहिए और अधिकारियों को कानून के अनुसार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. कार्रवाई करने में किसी भी तरह की हिचकिचाहट को अदालत की अवमानना के रूप में देखा जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.

पीठ ने स्पष्ट किया कि भाषण देने वाले के धर्म की परवाह किए बिना कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को संरक्षित किया जा सके. याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से केंद्र और राज्यों को देश भर में घृणा अपराधों और घृणास्पद भाषणों की घटनाओं की स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच शुरू करने का निर्देश देने की मांग की. याचिका में दावा किया गया है कि नफरत भरे भाषण देने में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के सदस्यों की भागीदारी से मुस्लिम समुदाय को लक्षित और आतंकित किया जा रहा है.

Share Now

संबंधित खबरें

Andhra Civic Polls: सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद आंध्र प्रदेश में 100 स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया पर रोक; SEC करेगा नामांकन हिंसा की समीक्षा

Voter Deletion Row: चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस; राहुल गांधी व INDIA गठबंधन की SIR याचिका पर जवाब तलब, एक याचिकाकर्ता के आचरण पर CJI ने जताई कड़ी आपत्ति

'प्रदर्शनकारी छात्रों के रास्ते में न आएं, वे भारत की आवाज हैं': राहुल गांधी की पीएम मोदी को चेतावनी; एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया बर्बरता के लगाए आरोप

Rahul Gandhi on Jantar Mantar Protest: 'जंतर-मंतर भारत की जनता का है, हम इसे वापस लेंगे'; CJP प्रवक्ताओं को तिहाड़ जेल भेजे जाने पर बरसे राहुल गांधी, कहा- 'कायरता'