सुधांशु त्रिवेदी ने सीएजी रिपोर्ट के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को घेरा, पूछा- पेश क्यों नहीं की रिपोर्ट

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को कैग (सीएजी) रिपोर्ट के मुद्दे पर आम आदी पार्टी को घेरा. सुधांशु त्रिवेदी ने भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में मुख्यमंत्री हैं भी और नहीं भी हैं.

Sudhanshu Trivedi (img: tw)

नई दिल्ली, 13 जनवरी : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को कैग (सीएजी) रिपोर्ट के मुद्दे पर आम आदी पार्टी को घेरा. सुधांशु त्रिवेदी ने भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में मुख्यमंत्री हैं भी और नहीं भी हैं. दिल्ली में अस्थायी मुख्यमंत्री और वास्तविक मुख्यमंत्री के बीच द्वंद है, इसे लेकर जनता के मन में कई प्रश्न तो उठ ही रहे थे. अब यह प्रश्न केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्थाओं और कानूनी दृष्टिकोण से भी उठने लगे हैं.

उन्होंने कहा कि 'आप' रोज एक सवाल खड़ी कर रही है, लेकिन दिल्ली सरकार सीएजी की रिपोर्ट को सदन के पटल पर क्यों नहीं रख रही है? हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद भी आप सरकार सीएजी की रिपोर्ट को सदन में नहीं रख रही है. दिल्ली सरकार ने 11 जनवरी 2025 को कहा कि सीएजी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है. इससे यह साफ है कि ये आर्थिक राजनीति के साथ-साथ संवैधानिक आपदा भी है. आप सरकार अपने आय व्यय की समीक्षा को सार्वजनिक भी नहीं करना चाहती है. यह भी पढ़ें : Kalyan Satta Matka Mumbai: भारत में कैसे हुई कल्याण सट्टा मटका की शुरुआत?

कांग्रेस के साथ गए, अब साथ नहीं है लेकिन उनका वायरस तो लेकर आए हैं. दिवंगत पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि 100 जवाबों से बेहतर है मेरी एक खामोशी, उसी तरह केजरीवाल शायद ये कहने का प्रयास कर रहे हैं कि 100 जवाबों से अच्छा है मेरा ये बवाल. रोज आकर कुछ ना कुछ बोलना शुरू कर देते हैं.

उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि '100 जवाबों से अच्छा है मेरा ये बवाल, ताकि आर्थिक घोटाले के हर पहलू से बचते रहें केजरीवाल'. इसलिए हम उनसे पूछना चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी जवाब दे कि उसने सीएजी की रिपोर्ट क्यों सदन के पटल पर नहीं रखी. उनके सेक्रेटेरिएट ने लिख कर दिया है इसका कोई फायदा नहीं है, तो वो आकर साफ़ स्पष्ट करे कि संवैधानिक अपरिहार्यता को पूरा करने के पीछे नो यूज कहना, क्या अपने को संविधान से ऊपर समझते हैं या नहीं.

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