Senior Medical Officer: स्वास्थ्य विभाग में सुधार को लेकर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, वरिष्ठ डॉक्टरों के लिए हफ्ते में 3 घंटे OPD अनिवार्य
महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्वास्थ्य अधिकारियों और शल्य चिकित्सकों सहित वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के लिए हफ्ते में कम से कम 3 घंटे ओपीडी में मरीजों की जांच करना अनिवार्य कर दिया है
Senior Medical Officer: महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है. अब जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) और जिला सिविल सर्जन (CS) कैडर के वरिष्ठ व अनुभवी अधिकारियों को केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित रहने के बजाय स्वयं मैदान में उतरकर मरीजों का इलाज करना होगा. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के आयुक्त एवं मिशन निदेशक संजय काटकर ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए हैं.
इस नए नियम के तहत उच्च शिक्षित और दीर्घ अनुभवी वरिष्ठ अधिकारियों की सेवाओं का सीधा लाभ दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के मरीजों तक पहुंचाया जाएगा. यह भी पढ़े: मुंबई लेटेस्ट न्यूज़ टुडे: मराठा आरक्षण, FDA की कार्रवाई, गणेश विसर्जन समेत यहां पढ़ें दिनभर की अपडेट खबरें, एक क्लिक में
किन अधिकारियों पर लागू होगा यह आदेश?
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्नातकोत्तर (PG डिग्री या डिप्लोमा) योग्यता रखने वाले सभी उच्च पदस्थ अधिकारियों के लिए यह नियम अनिवार्य कर दिया गया है. इनमें निम्नलिखित पद शामिल हैं:
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जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO)
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जिला शल्यचिकित्सक (Civil Surgeon)
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अतिरिक्त जिला शल्यचिकित्सक (Additional Civil Surgeon)
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तालुका स्वास्थ्य अधिकारी (THO)
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विभिन्न सरकारी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षक (Medical Superintendent)
इन सभी अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कम से कम तीन अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में प्रति सप्ताह न्यूनतम 3 घंटे ओपीडी (OPD) सेवाएं प्रदान करनी होंगी.
अस्पतालों के निरीक्षण और सुरक्षा जांच की भी जिम्मेदारी
वरिष्ठ अधिकारियों का यह दौरा केवल मरीज जांच तक सीमित नहीं रहेगा. क्षेत्र भ्रमण के दौरान अधिकारियों को अस्पताल के दैनिक परिचालन, दवाओं के स्टॉक, टीकों की उपलब्धता, चिकित्सा उपकरणों की स्थिति और कर्मचारियों की उपस्थिति का भी बारीकी से निरीक्षण करना होगा.
इसके अलावा, अतिदक्षता विभाग (ICU), शिशु आईसीयू (NICU), प्रसूति गृह और ऑपरेशन थियेटर (OT) में जीवन रक्षक उपकरणों के रखरखाव की जांच करना अनिवार्य किया गया है. अस्पताल परिसरों में अग्निशमन प्रणालियों की कार्यप्रणाली और नियमित 'फायर ऑडिट' (Fire Audit) अद्यतन रखने का उत्तरदायित्व भी संबंधित संस्था प्रमुखों पर सौंपा गया है.
लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
आदेश का पालन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, इसके लिए समीक्षा की एक मजबूत व्यवस्था बनाई गई है. उप-निदेशक स्तर पर हर हफ्ते समीक्षा रिपोर्ट तैयार कर स्वास्थ्य आयुक्तालय को भेजी जाएगी.
शासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र भ्रमण न करने, कर्तव्यों में ढिलाई बरतने या अस्पताल की कमियों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी. इस पहल से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर सुधरने की संभावना जताई जा रही है.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 16, 2026 10:54 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

