RBI का बड़ा कदम: बैंकिंग धोखाधड़ी पर मिलेगा 25,000 रुपए तक का मुआवजा, 'मिसेल-सेलिंग' पर भी कसेगा शिकंजा
RBI गवर्नर ने कहा कि छोटे-मोटे फ्रॉड वाले ट्रांजैक्शन के मामले में मुआवजे के फ्रेमवर्क सहित, रिवाइज्ड इंस्ट्रक्शन का ड्राफ्ट जल्द ही पब्लिक कंसल्टेशन के लिए जारी किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि RBI बैंकों और NBFCs को फाइनेंशियल प्रोडक्ट और सर्विस की गलत बिक्री करने से रोकने के लिए नियमों को सख्त कर रहा है.
मुंबई, 6 फरवरी 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) यानी आरबीआई (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने शुक्रवार को बैंक ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं. मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद गवर्नर ने बताया कि बैंक अब छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले लेनदेन (Small-Value Fraudulent Transactions) के मामले में ग्राहकों को मुआवजा देंगे. इसके साथ ही, बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों की गलत जानकारी देकर बिक्री करने (Mis-Selling) और रिकवरी एजेंटों की मनमानी को रोकने के लिए भी नए नियम लागू किए जा रहे हैं. यह भी पढ़ें: RBI Monetary Policy: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, होम और कार लोन की EMI कम होने के लिए अभी करना होगा इंतजार
धोखाधड़ी पर मुआवजा: ग्राहकों को बड़ी राहत
डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दायरे को देखते हुए RBI ने 2017 के 'कस्टमर लायबिलिटी' नियमों की समीक्षा की है। नए प्रस्ताव के अनुसार, छोटे मूल्य के फ्रॉड होने पर ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा देने के लिए एक रूपरेखा तैयार की गई है।
- उद्देश्य: अनाधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों के नुकसान को कम करना.
- प्रक्रिया: इसके लिए जल्द ही एक ड्राफ्ट जारी किया जाएगा, जिस पर आम जनता से राय मांगी जाएगी.
'मिस-सेलिंग' और थर्ड-पार्टी उत्पादों पर लगाम
अक्सर देखा जाता है कि बैंक काउंटर पर ग्राहकों को ऐसे बीमा या निवेश उत्पाद बेच दिए जाते हैं जो उनकी जरूरत या जोखिम लेने की क्षमता के अनुरूप नहीं होते. गवर्नर ने स्पष्ट किया कि अब बैंकों और एनबीएफसी (NBFCs) को विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री के लिए सख्त दिशानिर्देशों का पालन करना होगा.
'बैंक काउंटरों पर बेचे जाने वाले थर्ड-पार्टी उत्पाद ग्राहक की जरूरतों के अनुकूल होने चाहिए। इसके लिए विज्ञापन और बिक्री के व्यापक निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे.' - संजय मल्होत्रा, गवर्नर, RBI
रिकवरी एजेंटों के लिए एक समान नियम
लोन रिकवरी की प्रक्रिया में होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए RBI सभी मौजूदा नियमों को एक समान (Harmonise) बनाने जा रहा है. वर्तमान में बैंकों और एनबीएफसी के लिए रिकवरी के नियम अलग-अलग हैं, जिन्हें अब एकीकृत किया जाएगा.
- नया ढांचा: रिकवरी एजेंटों के व्यवहार और उनके काम करने के तरीकों के लिए सख्त 'कंडक्ट रूल्स' लाए जाएंगे.
- जवाबदेही: बैंकों को अपने द्वारा नियुक्त एजेंटों के आचरण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
क्यों पड़ी इन नियमों की जरूरत?
तकनीक के तेजी से अपनाने के साथ बैंकिंग क्षेत्र में धोखाधड़ी के नए तरीके सामने आए हैं. 2017 के पुराने नियमों में वर्तमान चुनौतियों को कवर करना मुश्किल हो रहा था. साथ ही, हाल के वर्षों में रिकवरी एजेंटों द्वारा ग्राहकों के उत्पीड़न और वित्तीय उत्पादों की गलत जानकारी देकर बिक्री करने की शिकायतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके चलते केंद्रीय बैंक को यह कड़े कदम उठाने पड़े हैं.