RBI's Polymer Currency Notes Trial: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में पॉलीमर (प्लास्टिक) आधारित करेंसी नोटों के परीक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. आरबीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने अपनी और सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCIL) की फैक्ट्रियों में पॉलीमर नोट छापने के लिए प्लास्टिक शीट्स की खरीद हेतु एक वैश्विक निविदा (ग्लोबल टेंडर) जारी की है. इस परीक्षण के लिए दो अलग-अलग मूल्यवर्ग (Denominations) के नोटों को चुना गया है, जिनके लिए 34,000-34,000 रीम (कुल 68,000 रीम) 'बायअक्षीय रूप से उन्मुख पॉलीप्रोपाइलीन' (BOPP) शीट्स की मांग की गई है. इच्छुक कंपनियों को 18 अगस्त तक अपनी बोलियां जमा करनी होंगी.
क्या होते हैं पॉलीमर नोट और क्यों है इनकी जरूरत?
पॉलीमर बैंकनोट पारंपरिक कपास-फाइबर (कॉटन) के कागज के बजाय एक सिंथेटिक प्लास्टिक सामग्री से बनाए जाते हैं. आमतौर पर इसके लिए बीओपीपी (BOPP) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. दुनिया में सबसे पहले 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने पॉलीमर नोट पेश किए थे और वर्तमान में 50 से अधिक देश इसका उपयोग कर रहे हैं. ये नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ, साफ और सुरक्षित माने जाते हैं. नमी और गंदगी के प्रति प्रतिरोधी होने के कारण ये कागजी नोटों की तुलना में दो से छह गुना अधिक समय तक चलते हैं, जिससे पर्यावरण पर भी कम प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा, इनकी नकल (काउंटरफिटिंग) करना बेहद मुश्किल होता है.
खरीद के लिए कड़े सुरक्षा नियम और भू-राजनीतिक शर्तें
इस वैश्विक निविदा दस्तावेज में सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त दिशानिर्देश शामिल किए गए हैं. खासकर भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए बोली लगाने वाली कंपनियों के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं. निविदा के अनुसार, बोलीदाताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके भारतीय परिचालन चीन या पाकिस्तान में होने वाली किसी भी व्यावसायिक गतिविधि से पूरी तरह अलग (फायरवॉल्ड) हों. इस परियोजना के लिए चीन और पाकिस्तान से किसी भी कच्चे माल की आपूर्ति पर पूरी तरह रोक रहेगी. इसके साथ ही, खरीद प्रक्रिया के दौरान इन दोनों देशों के नागरिकों या वहां काम कर चुके किसी भी कर्मचारी को इस प्रोजेक्ट में शामिल करने की अनुमति नहीं होगी.
आधुनिकीकरण की ओर कदम और वर्तमान चुनौतियां
यह कदम आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने 5 जून को मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद कहा था कि पॉलीमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है. उन्होंने स्पष्ट किया था कि इसके फायदे और नुकसान का आकलन शुरुआती स्तर पर किया जा रहा है.
यह परीक्षण ऐसे समय में हो रहा है जब आरबीआई भारी मात्रा में नकदी का प्रबंधन कर रहा है. 31 मार्च तक देश में 41 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 17,000 करोड़ से अधिक करेंसी नोट चलन में थे. केवल वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्रीय बैंक ने नोटों की छपाई पर 4,875 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इसके अलावा, पिछले साल 2.3 लाख नकली नोट पकड़े गए, जो कि उससे पिछले वर्ष (2024-25) के 2.17 लाख नकली नोटों की तुलना में अधिक हैं.
सफल परीक्षण के बाद बढ़ेगी खरीद
निविदा दस्तावेज में इस बात पर जोर दिया गया है कि वर्तमान आवश्यकता तात्कालिक परीक्षण के लिए है. दस्तावेज के अनुसार, एक बार फील्ड ट्रायल सफल होने के बाद, केंद्रीय बैंक विभिन्न मूल्यवर्ग के नोटों के लिए बड़े पैमाने पर पॉलीमर शीट्स की खरीद की योजना बनाएगा. हालांकि, आरबीआई ने अभी तक उन दो विशिष्ट मूल्यवर्गों (Denominations) के नामों का खुलासा नहीं किया है जिन्हें इस शुरुआती परीक्षण के लिए चुना गया है.













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