Pune Sus Road Accident: पुणे के सुस रोड हादसे में 10 साल के बच्चे की मौत, परिवार को ₹6 लाख मुआवजा देने के निर्देश

यह दुर्घटना 17 अगस्त को उस समय हुई जब 10 वर्षीय बालक विराज पटोले अपने पिता संदीप पटोले और बहन के साथ दुपहिया वाहन से यात्रा कर रहा था. सड़क पर मौजूद गड्ढे से बचने और संतुलन बिगड़ने के कारण वाहन फिसल गया, जिसके बाद पीछे से आ रहे एक ट्रक ने बच्चे को कुचल दिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: IANS)

Pune Sus Road Accident:  पुणे के सुस-म्हाळुंगे मार्ग पर सड़क के गड्ढे के कारण हुए दर्दनाक हादसे में 10 वर्षीय बच्चे की जान जाने के बाद पुणे नगर निगम (PMC) की स्थाई समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने नागरिक प्रशासन को पीड़ित परिवार को ₹6 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया है. भिमाले ने पुणे नगर निगम आयुक्त नवल किशोर राम से घटना का स्वतः संज्ञान लेने और पीड़ित परिवार द्वारा औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करने का इंतजार किए बिना ही मुआवजा प्रक्रिया तुरंत शुरू करने का आग्रह किया है.

हादसे का विवरण और पृष्ठभूमि

यह दुर्घटना 17 अगस्त को उस समय हुई जब 10 वर्षीय बालक विराज पटोले अपने पिता संदीप पटोले और बहन के साथ दुपहिया वाहन से यात्रा कर रहा था. सड़क पर मौजूद गड्ढे से बचने और संतुलन बिगड़ने के कारण वाहन फिसल गया, जिसके बाद पीछे से आ रहे एक ट्रक ने बच्चे को कुचल दिया. इस घटना के बाद सुस-म्हाळुंगे मार्ग की खस्ताहाल स्थिति और सुरक्षा मानकों को लेकर नागरिकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है.

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश का हवाला

अपने निर्देशों में स्थाई समिति अध्यक्ष ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 13 अक्टूबर 2025 को जारी उस ऐतिहासिक आदेश का हवाला दिया, जिसमें सड़कों के गड्ढों और खुले नालों के कारण होने वाली मौतों पर ₹6 लाख के मुआवजे का प्रावधान किया गया है. अदालत के नियमों के अनुसार, मुआवजे का भुगतान पहले संबंधित स्थानीय निकाय (PMC) द्वारा किया जाएगा. इसके बाद लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारी, इंजीनियर या ठेकेदार से इस राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

जांच और जवाबदेही तय करने के निर्देश

भिमाले ने नगर निगम प्रशासन को इस हादसे की विस्तृत जांच कराने और यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि सुस-म्हाळुंगे सड़क के रखरखाव के लिए कौन सी एजेंसी या विभाग जिम्मेदार था. उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों को सुरक्षित सड़कें मुहैया कराना नगर निगम का संवैधानिक कर्तव्य है और स्पष्ट अदालती आदेश होने के बाद पीड़ित परिवार को सहायता के लिए भटकने नहीं दिया जाना चाहिए.

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