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यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों की पढ़ाई फिर से शुरू करने की मांग के साथ जनहित याचिका दायर

दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें केंद्र और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों को भारत में अपनी शिक्षा फिर से शुरू करने में सक्षम बनाने के लिए कदम उठाए.

यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों की पढ़ाई फिर से शुरू करने की मांग के साथ जनहित याचिका दायर
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

नई दिल्ली, 12 मार्च : दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें केंद्र और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों को भारत में अपनी शिक्षा फिर से शुरू करने में सक्षम बनाने के लिए कदम उठाए. याचिकाकर्ता प्रवासी कानूनी प्रकोष्ठ के अनुसार, इसने यूक्रेन से लौटे 20,000 भारतीय छात्रों की ओर से देश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की अनुमति देने के लिए जनहित याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता ने कहा कि उच्च न्यायालय 21 मार्च को याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है.

अधिवक्ता एम. पी. श्रीविग्नेश के माध्यम से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में युद्ध प्रभावित यूक्रेन से भारत लाए गए भारतीय मेडिकल छात्रों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला गया है. याचिका में कहा गया है कि हजारों युवा छात्र, जिसमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं, के करियर पर बुरा असर पड़ सकता है, जो पहले से ही युद्ध क्षेत्र में होने के आघात से गुजर चुके हैं. यह प्रस्तुत किया जाता है कि चिकित्सा की पढ़ाई के इच्छुक हजारों भारतीय यूक्रेन को चिकित्सा शिक्षा के लिए पसंद करते हैं, क्योंकि इसके विभिन्न कारकों में सामथ्र्य, शिक्षा की गुणवत्ता और विदेशों में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस शामिल है. यूक्रेन में, भारतीय मेडिकल छात्रों को नीट पास करने के बाद कोई भी अन्य मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने की कोई बाध्यता नहीं है. उपरोक्त सभी कारक यूक्रेन को भारतीयों के लिए एक आरामदायक विकल्प बनाते हैं. यह भी पढ़ें : यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों की पढ़ाई फिर से शुरू करने की मांग के साथ जनहित याचिका दायर

यूक्रेन में अध्ययन करने वाले भारतीय छात्रों को भारत में चिकित्सा का अभ्यास करने का भी लाभ मिलता है. यूक्रेन से अर्जित एक मेडिकल डिग्री राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा उनकी विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) परीक्षा उत्तीर्ण करने पर स्वीकार की जाती है. इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि एफएमजीई के नए नियमों के अनुसार, एक एमबीबीएस उम्मीदवार को 4.5 साल के न्यूनतम पाठ्यक्रम कार्यकाल के अलावा कोर्स को पूरा करने में 10 साल तक का समय लग सकता है, उम्मीदवारों को दो साल के लिए इंटर्न होना चाहिए - विदेशी चिकित्सा संस्थान में 12 महीने जहां वे पढ़ रहे हैं और एक और साल भारत में पर्यवेक्षित इंटर्नशिप का है. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (विदेशी चिकित्सा स्नातक लाइसेंसधारी) विनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार, भारत के बाहर पूरे पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, और इंटर्नशिप या क्लर्कशिप पूरे अध्ययन के दौरान एक ही विदेशी चिकित्सा संस्थान में किया जाएगा.

प्रावधानों में यह भी कहा गया है कि चिकित्सा प्रशिक्षण और इंटर्नशिप का कोई भी हिस्सा भारत में या उस देश के अलावा किसी अन्य देश में नहीं किया जाएगा, जहां से प्राथमिक चिकित्सा योग्यता प्राप्त की गई है. इसके अलावा, यह प्रस्तुत किया गया है कि वर्तमान में भारत में ऐसे मेडिकल छात्रों को भारतीय मेडिकल कॉलेजों में समायोजित करने के लिए कोई मानदंड या नियम नहीं हैं, जो विदेश में पढ़ रहे थे और एक शैक्षणिक सत्र के बीच में ही भारत लौट आए हैं. 4 मार्च के एक परिपत्र की ओर इशारा करते हुए, जो भारत में विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा के लिए अर्हता (क्वालीफाई) प्राप्त करने वालों को वजीफा के भुगतान की अनुमति देता है, जनहित याचिका में कहा गया है, हालांकि, उपरोक्त परिपत्र उन छात्रों के लिए अधिक उपयोग नहीं है, जिन्हें यूक्रेन से बचाया गया है. उनमें से दूसरे, तीसरे या चौथे वर्ष में हैं और उन्होंने अभी तक अपनी डिग्री पूरी नहीं की है. वजीफे को लेकर क्वालीफाई करने के लिए, किसी को भी डिग्री पूरी करनी होगी, परीक्षा देनी होगी और फिर इंटर्नशिप भी करनी होगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 13, 2022 10:06 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).