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भारत को 'रेयर अर्थ' खनिज और टनल-बोरिंग मशीन देगा चीन, अमेरिका के मुंह फेरने पर ड्रैगन ने लपका मौका

गलवान झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में एक अहम मोड़ आया है, जहां चीन ने भारत को ज़रूरी 'रेयर अर्थ' खनिज देने का वादा किया है. यह फैसला ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका-भारत के व्यापारिक रिश्तों में तनाव है, जिससे यह सवाल उठता है कि यह चीन की दोस्ती है या कोई रणनीतिक चाल. इस कदम से भारत के मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर को बड़ी राहत मिल सकती है जो चीन पर निर्भर हैं.

भारत को 'रेयर अर्थ' खनिज और टनल-बोरिंग मशीन देगा चीन, अमेरिका के मुंह फेरने पर ड्रैगन ने लपका मौका
(Photo : X)

India China Relations: एक ऐसी खबर आई है जो भारत-चीन के रिश्तों में एक नया मोड़ ला सकती है. चीन ने भारत की 'रेयर अर्थ' खनिजों की बढ़ती ज़रूरत को पूरा करने पर विचार करने का वादा किया है. यह एक बहुत बड़ी बात है, खासकर 2019 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद, जब दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब हो गए थे.

आखिर हुआ क्या है?

हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत दौरे पर आए थे. उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाक़ात की. सूत्रों के मुताबिक, इसी मीटिंग में चीन ने वादा किया कि वो भारत को तीन ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई में आ रही दिक्कतों को दूर करेगा - खाद, सुरंग खोदने वाली मशीनें (टनल-बोरिंग मशीन) और सबसे ज़रूरी, 'रेयर अर्थ' मिनरल्स.

यह वादा इसलिए भी अहम है क्योंकि कुछ ही हफ़्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के लिए चीन जाने वाले हैं. सात साल में यह उनका पहला चीन दौरा होगा.

तो ये 'रेयर अर्थ' चीज़ क्या है और इतनी ज़रूरी क्यों है?

'रेयर अर्थ' 17 खनिजों का एक समूह है. ये नाम के ही 'दुर्लभ' नहीं हैं, बल्कि आज की टेक्नोलॉजी की दुनिया में किसी खजाने से कम नहीं हैं. आपके मोबाइल फोन से लेकर लैपटॉप, इलेक्ट्रिक गाड़ियों, सोलर पैनल, और मेडिकल उपकरणों तक, हर छोटी-बड़ी आधुनिक चीज़ को बनाने में इनका इस्तेमाल होता है. ये चीज़ों को छोटा, हल्का और ज़्यादा असरदार बनाते हैं.

समस्या यह है कि दुनिया का 60-70% 'रेयर अर्थ' चीन ही निकालता और सप्लाई करता है. यानी इस मामले में पूरी दुनिया एक तरह से चीन पर निर्भर है.

कहानी में अमेरिका का एंगल

इस पूरे मामले को समझने के लिए हमें अमेरिका की तरफ भी देखना होगा. एक तरफ जहां भारत और चीन के बीच यह बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि उनकी चीन के साथ एक डील पक्की हो गई है, जिसके तहत चीन अमेरिका को ज़रूरी 'रेयर अर्थ' और चुंबक सप्लाई करेगा.

लेकिन भारत के साथ अमेरिका का रवैया ठीक इसके उल्टा है. अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 50% तक का भारी टैक्स (टैरिफ) लगा दिया है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए रूस से तेल खरीद रहा है. मज़े की बात यह है कि चीन भी रूस से तेल खरीदता है, लेकिन उस पर अमेरिका ने ऐसा कोई टैक्स नहीं लगाया है. इस वजह से भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में खटास आ गई है. भारत ने अमेरिका के इस कदम को "गलत और अनुचित" बताया है.

चीन का क्या फायदा है?

चीन इस मौके को भुनाना चाहता है. वो भारत और अमेरिका, दोनों के साथ व्यापार करना चाहता है. नई दिल्ली में हुई मीटिंग के बाद चीन ने एक बयान में अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि "एकतरफा दादागिरी बढ़ रही है". चीन का कहना है कि भारत और चीन जैसे बड़े देशों को मिलकर विकासशील देशों के लिए एक मिसाल कायम करनी चाहिए और दुनिया को 'मल्टीपोलर' (जहां किसी एक देश का दबदबा न हो) बनाने में मदद करनी चाहिए.

भारत पर क्या असर पड़ रहा था?

भारत हर साल करोड़ों डॉलर के 'रेयर अर्थ' चीन से मंगाता है. चीन ने भारत को इसकी सप्लाई पूरी तरह से रोकी तो नहीं थी, लेकिन कड़े नियम और लाइसेंस की प्रक्रिया बना दी थी. इससे भारतीय कंपनियों को माल मिलने में बहुत दिक्कत हो रही थी. SBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसका सीधा असर भारत के ट्रांसपोर्ट, कंस्ट्रक्शन, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे बड़े सेक्टरों पर पड़ रहा था.

तो आखिर इसका मतलब क्या है?

अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि चीन का दिल सच में बदल गया है. हो सकता है कि यह सिर्फ एक कारोबारी चाल हो, जिसका मकसद अमेरिका और भारत के बीच आई दूरी का फायदा उठाना है. लेकिन एक बात साफ़ है - दुनिया की राजनीति तेज़ी से बदल रही है और भारत इस बदलाव के बीच अपने हितों को साधने की कोशिश कर रहा है. चीन का यह वादा इसी बदलती दुनिया का एक बड़ा संकेत है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 19, 2025 01:04 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).