भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर चल रही खींचतान के बीच एक बड़ी खबर आई है. भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 22 सितंबर को एक टीम के साथ अमेरिका जा रहे हैं. इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच एक फायदेमंद व्यापार समझौते को जल्द से जल्द फाइनल करना है.
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर थोड़ा तनाव बना हुआ है. हाल ही में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ (टैक्स) लगा दिया था. इसके अलावा, अमेरिका ने H-1B वीजा की एप्लीकेशन फीस को बढ़ाकर $1,00,000 कर दिया है, जिससे भारतीय आईटी कंपनियों की चिंता बढ़ गई है. H-1B वीजा के जरिए ही भारतीय पेशेवर अमेरिका में काम करने जाते हैं.
क्या है इस दौरे का मकसद?
इस दौरे का मुख्य लक्ष्य व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत को आगे बढ़ाना है. कुछ दिन पहले ही 16 सितंबर को अमेरिकी अधिकारियों की एक टीम भारत आई थी, जहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत काफी सकारात्मक रही थी. अब उसी बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए पीयूष गोयल अपनी टीम के साथ न्यूयॉर्क जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि दोनों देश चाहते हैं कि यह समझौता जल्दी हो और इससे दोनों को फायदा मिले.
व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य
भारत और अमेरिका के बीच इस व्यापार समझौते का लक्ष्य बहुत बड़ा है. दोनों देश चाहते हैं कि 2030 तक आपसी व्यापार को मौजूदा $191 अरब से बढ़ाकर $500 अरब तक पहुंचाया जाए. अमेरिका पिछले चार साल से भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है, जिससे यह समझौता भारत के लिए और भी अहम हो जाता है.
हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैक्स और वीजा फीस में बढ़ोतरी जैसी कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन पीयूष गोयल ने भरोसा जताया है कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द ही कोई समाधान निकलेगा.













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