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केशव प्रसाद मौर्य: जमाती प्रकरण के बावजूद उप्र में कोरोना पर लगाम लगाने में कामयाब रहे

कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी लड़ाई में उत्तर प्रदेश ने साबित कर दिया है कि 'उत्तर प्रदेश बदह रहा है.' उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कहना है, यहां की स्थिति (महामारी से संबंधित) दिल्ली, महाराष्ट्र या राजस्थान से कहीं बेहतर है.

केशव प्रसाद मौर्य: जमाती प्रकरण के बावजूद उप्र में कोरोना पर लगाम लगाने में कामयाब रहे
केशव प्रसाद मौर्य (Photo Credits: Facebook)

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Covid-19) के खिलाफ अपनी लड़ाई में उत्तर प्रदेश ने साबित कर दिया है कि 'उत्तर प्रदेश बदह रहा है.' उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) का कहना है, यहां की स्थिति (महामारी से संबंधित) दिल्ली, महाराष्ट्र या राजस्थान से कहीं बेहतर है. मौर्य ने आईएएनएस को बताया, हमारे पास देश में सबसे बड़ी आबादी है, मगर कोविड-19 मामलों की संख्या कई अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम है. यह हमारी सरकार की दक्षता ही है कि हमने केंद्र के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है. दुनिया भर के महामारी विशेषज्ञ शुरू में राज्य की प्रतिक्रिया से आशंकित थे, क्योंकि भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य को इससे पहले भी अन्य भयानक वायरल बीमारियों के प्रसार के लिए जाना जाता रहा है. हालांकि इन विशेषज्ञों के लिए बहुत आश्चर्य की बात है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने वायरस को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के लिए मिशन मोड में काम किया.

मौर्य ने कहा, मोदी जी के मजबूत नेतृत्व और उत्तर प्रदेश के लिए उनकी चिंता ने हमारे राज्य की धारणा को बदल दिया है. अब हम अन्य राज्यों को हमारा अनुसरण करने के लिए उदाहरण पेश कर रहे हैं." केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, वायरस के खिलाफ हमारी लड़ाई के बारे में मुझे लगता है कि योगी सरकार ने प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए निदेशरें और पत्रों में से प्रत्येक को लागू किया है. हमारे यहां संख्या 2,000 को भी पार नहीं करती और यह आंकड़ा बहुत कम होता, लेकिन जिस तरह से तब्लीगी जमात के सदस्य यहां बीमारी लेकर आए, वह इस दिशा में एक दुर्भाग्यपूर्ण बात रही है. उनका व्यवहार भी हमारे लिए बहुत निराशाजनक रहा. उन्होंने (जमात) ने वायरस को रोकने के लिए हमारी योजनाओं को काफी हद तक चोट भी पहुंचाई, मगर बाधाओं के बावजूद हम इसे नियंत्रित करने में कामयाब रहे. यह भी पढ़ें: COVID-19: इंदौर में 36 वर्षीय व्यक्ति समेत दो मरीजों की कोरोना महामारी से हुई मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर पहुंची 80 के पार

राज्य के कई जिले ग्रीन जोन में हैं, लेकिन एक आगरा जिला ऐसा रहा है, जहां महामारी को नियंत्रित करने में प्रशासन नाकाम रहा है. यह पूछे जाने पर कि आगरा जैसे पर्यटक स्थल में क्या गलत हुआ, मौर्य ने कहा कि इसका एक कारण स्पष्ट रूप से तब्लीगी जमात ही है, जिसके सदस्य वायरस फैलाने में सहायक बने रहे. वहीं आगरा का एक निजी अस्पताल भी बीमारी के बारे में सही जानकारी नहीं दे पाया. उप मुख्यमंत्री ने कहा, अस्पताल प्रबंधन की ओर से लापरवाही हमें महंगी पड़ गई, लेकिन सरकार ने समय रहते कार्रवाई की. हमने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया, जिसमें एक प्रमुख सचिव-स्तर के अधिकारी, एक एडीजी-स्तर के पुलिस अधिकारी और एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने स्थिति का जायजा लिया. समिति ने आगरा में कोरोना वायरस के प्रसार को काफी हद तक कम करने में सफलता पाई है.

राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान उत्तर प्रदेश उन कुछ राज्यों में से एक रहा है, जिन्होंने सरकार द्वारा संचालित निर्माण परियोजनाओं को शुरू करके मजदूरों और कुशल श्रमिकों को रोजगार प्रदान किया. नौकरी के अवसरों और काम की प्रकृति के पैमाने के बारे में पूछे जाने पर मौर्य ने खुलासा किया कि एक लाख से अधिक कुशल और अकुशल श्रमिकों को नौकरी प्रदान की गई है. उन्होंने कहा, मैं निर्माण कार्य से संबंधित मंत्रियों की एक समिति का नेतृत्व कर रहा हूं. हमने निर्णय लिया कि सड़क निर्माण के अलावा शहरी विकास से संबंधित परियोजनाएं, या फिर पानी से जुड़े जरूरी कार्य उन जिलों में शुरू किए जा सकते हैं, जो रेड जोन के अंतर्गत नहीं आते हैं. यह भी पढ़ें:  उत्तर प्रदेश: प्रयागराज में कोरोना वायरस महामारी से हुई पहली मौत, संक्रमित मरीज ने देर रात तोड़ा दम

मौर्य, जिनके पास पीडब्ल्यूडी जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी है, ने कहा, हमने स्वास्थ्य सुरक्षा से संबंधित सभी प्रोटोकॉल का पालन किया. हमने श्रमिकों को साइट पर मास्क, सैनिटाइजर प्रदान किए. कोरोना के किसी भी संदिग्ध मरीज की पहचान करने के लिए थर्मल स्कैनिंग का इस्तेमाल किया. मौर्य, जो पीडब्ल्यूडी का महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो रखते हैं, ने कहा. इन फैसलों से अच्छे नतीजे मिल रहे हैं.''

राज्य भर में पीडब्ल्यूडी द्वारा चलाई जा रही सामुदायिक रसोई पर एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विभाग के कर्मचारियों द्वारा बंद के दौरान गरीबों की सेवा करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा, मैंने अपने कर्मचारियों से अनुरोध किया कि हमें ऐसे वंचितों के लिए कुछ करना चाहिए, जिन्हें अपने परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है. कुछ ही दिनों में पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों ने जरूरतमंदों को भोजन, राशन परोसना शुरू कर दिया. यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव से ठाकरे विधायक के तौर पर शुरू कर सकते हैं करियर

यह पूछे जाने पर कि इन रसोईघरों में कितने लोगों को प्रतिदिन भोजन दिया जा रहा है, मौर्य ने कहा, यह राज्य के कर्मचारियों के लिए एक अच्छा काम है. हालांकि, गरीबों की सेवा करना उनकी संख्या गिनने से ज्यादा महत्वपूर्ण है. उत्तर प्रदेश में आदित्यनाथ के बाद निस्संदेह भाजपा का सबसे लोकप्रिय चेहरा रहे उप मुख्यमंत्री मौर्य के लिए देश के हर कोने से प्रवासी मजदूरों को वापस लाना प्राथमिकता बनी हुई है.

इस संबंध में उन्होंने कहा, इसके लिए कई ट्रेनें चलाई जाएंगी. उन्हें (मजदूरों को) उनके गांवों तक ले जाने की व्यवस्था की जा रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिदेशरें का पालन किया जा रहा है. दिशानिदेशरें का पालन करने के लिए एकांतवास केंद्रों की स्थापना की गई है. हम विश्वास दिलाते हैं कि अपने नागरिकों की देखभाल के लिए उत्तर प्रदेश सबसे बेहतर कदम उठाएगा.

(The above story first appeared on LatestLY on May 06, 2020 11:59 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).